Zia Zameer

Joined November 2016

ग़ज़ल गीत नज़्म दोहे माहिए कहानी समीक्षा आदि की पिछले पंद्रह वर्षों से रचना एवं प्रकाशन जारी। शायरी की दो किताबें प्रकाशित एवं पुरस्कृत। साहित्यिक मंचों से रचना पाठ जारी।

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मां का होना

घुटनों की पीड़ा में जागके सोने वाली मां इंसूलिन की गोली से खुश होने वाली मां सिलवटी हाथों से कपड़ों को धोने वाली मां पापा की इक ड... Read more

बिटिया

नन्ही सी गुनगुनी हंसी से घर आंगन महकाने वाली भोली सी दो आंखों में सब सपने सिमटा जाने वाली बादल की गर्जन सुन सुनकर गोद को गोद बन... Read more

ग़ज़ल

ज़िन्दगी से थकी थकी हो क्या तुम भी बे वज्ह जी रही हो क्या देख कर तुम को खिलने लगते हैं तुम गुलों से भी बोलती हो क्या ... Read more