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जरुरत क्या है मै दुश्मन बनाऊ ज़माने को जब मेरे अपने ही काफ़ी है मुझे रुलाने को

जरुरत क्या है मै दुश्मन बनाऊ ज़माने को जब मेरे अपने ही काफ़ी है मुझे रुलाने को . काश मै उस युग मे होता,जिसमे प्यार मुमकिन होत ..... Read more

आज कह रहा हु तू ज़िन्दगी है मेरी

आज कह रहा हु तू ज़िन्दगी है मेरी ना ना न कर,कह दे मै भी हु तेरी, वरना फिर ना आकर कहना कब्र पर मेरी एक बार और कह देते,तो मै हो जाती... Read more

तुझे कुछ इस तरह सजाएंगे

तुझे कुछ इस तरह सजाएंगे चाँद नहीं अपनी कायनात बनाएंगे तोड़ना-टूटना, ये दिल की अदा है तुझे हम अपनी रूह मे समाएंगे Read more

कविता

नज़म प्यारे बच्चे अल्लाह को मे सजदा करूंगा सुबह शाम माँ-बाप के लिए दुआ करूँगा आधी – तुफानो से ना मे डरूंग... Read more

किया है ज़िन्दगी(?), एक नाम है ज़िन्दगी (!)

किया है ज़िन्दगी(?), एक नाम है ज़िन्दगी (!) कैसे जीए तेरे बगैर(?), तेरा नाम है ज़िन्दगी (!) Read more