DR.ZAFAR AIROLI

Uttarakhand

Joined November 2018

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थोड़ा थोड़ा हर शख्श मे पल रहा हूँ मैं ...

चिता की आग में जल रहा हूँ मै , तेरे मिलने को मचल रहा हूँ मै, एक रोज़ कभी मिली थी फ़ुलो की सेज़, जबकि रोज़ काँटों पर चल रहा हूँ ... Read more

सिर्फ तेरी मुस्कान को मैं लिखता रहा ...

बैठ के सुबह शाम को,मैं लिखता रहा , ख़त एक अन्जान को मैं लिखता रहा . नीद कम आंख नम होने लगी , फिर भी ख्याल गुमनाम को मैं लिखता... Read more

पूजा की थाली तुलसी का पत्ता हैं माँ...!!!

एक इबादत एक दुआ हैं माँ, मेरी सारी मन्नते मेरा ख़ुदा है माँ, हार जाती हैं जमाने भर की मुश्किले हर उलझन को आसा हैं माँ, क्यो स... Read more

चाँदनी नीली रात फिर उफ़ान पे है.....

जो तेरा ज़िक्र मेरी जुबान पे हैं चाँदनी नीली रात फिर उफ़ान पे है .. . !!! एक बार जो वो गुलबदन गुज़रा था यां से, उसकी खुशबु कबस... Read more