योगेन्द्र सिंह योगी

झींझक कानपुर देहात

Joined November 2018

सहायक अध्यापक एस एस जूनियर हाई स्कूल महेरा कानपुर देहात

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नजर भी आ रहा है अब

तिरा मासूम सा चेहरा नजर भी आ रहा है अब तेरी फितरत परख़ने का हुनर भी आ रहा है अब तेरे वादे , तेरी कसमें , तेरी ... Read more

आँधियों को मोड़ देकर छोड़ दो

आदमी हो मुश्किलों को तोड़ दो आँधियों को मोड़ देकर छोड़ दो मुश्किलों का दौर है अब हर तरफ ठोकरों से राह-ए-पर्वत तोड़ ... Read more

रेशम सी लड़की

::::::::::::::::::::: रेशम सी लड़की::::::::::::::::::: ख्वाबों में वो रोज ही आए रेशम सी लड़की दिल को हरदम ही तड़पाए रेश... Read more

नफरतों के दौर में एक शजर ही बाकी रहा

::::::::::;:::::::गजल :::::::::::::::::::: तेरे हिस्से में तुम्हारा शहर भी बाकी रहा मेरी किस्मत में हमारा घर ... Read more

रुलाया गर नहीं होता हँसाना ही नहीं पड़ता

:::::::::::::::::::::%गजल %;:::::::::::::::: रुलाया गर नहीं होता, हँसाना ही नहीं पड़ता मुसीबत में मेरे हुजरे में आना ही... Read more

न तेरा नाम जो लेते

%::::::::::::::::::गजल :::::::::::::::::% '' '' 'शीर्षक - न तेरा नाम जो लेते' '' '' मचल उठते सितारे भी नहीं गर थाम जो लेत... Read more

मुक्तक

::::::::::::::::::::मुक्तक ::::::::::::::::::::: 1-चाँदनी रात थी छत पर टहल रहा था मैं किसी की याद में दीपक सा जल रहा था मैं... Read more

नारी

::;::::::::;::::;:कुछ दोहे ::::::::::::::::: ::;:::::%::::शीर्षक - नारी::::%::::::::: नारी खुली किताब है , धारे कितने रं... Read more

चलो दुनियाँ बदलते हैं

चलो इक बार हम सब इक नया इतिहास रचते हैं जलाकर बस्तियाँ नफरत की उनको खाक़ करते हैं चलो छोडो ये दुनियाँ है यहां हर शै में दु... Read more

इस बार हंसाया जाये

::::::::::::::::::::::::::गजल ::::::::::::::::::::::::::: महफ़िली दौर से बाहर भी तो आया जाये शाम बोझिल है लौट घर भी... Read more

माँ

………… . . . . 🌹 मुक्तक. 🌹 ………….. छलक जाती मेरी आँखे, तुझे जब याद करता हूँ पलक पे हैं तेरी यादें , तेरी फरियाद करता हूँ महक जाता... Read more

पुराने खत

#पुराने खत# जाने कहाँ गए वो पुराने खत जिनमें होता था प्यार, अपनापन, स्नेह मे लिपटे हुए सुन्दर शब्द, करुणा, प्रेम, और भी ब... Read more

आग यदि आए तो दरिया में पिघल कर आए

. . . . . . . . . 🌹 गजल 🌹. . . . . . . . मशअला जो भी हो हल उसका निकलकर आए आग यदि आए तो दरिया में पिघलकर आए हाँथ लोगों ... Read more

गीत हरदम वफ़ाओं के गाता रहा

. . . . . # गीत# . . . . . हम ही शामिल न थे जुस्तजू में तेरी तुमको जालिम जमाना ही भाता रहा इश्क में कोई बंजारा रोता... Read more

नया एक गीत अब गाने को है

. . . . . . . . गजल. . . . . . . . . . बहर - 2122. 2122. 2122 212 आग सीने में दफन है, अब धुआँ छाने को है आज नफ़रत आदमी क... Read more

आजमा ले जिंदगी

. . . . . . . . . . . गजल. . . . . . . . . . . . . रूह को फुरकत के लम्हों से मिला ले जिंदगी फिर किसी पत्थर सनम को तू मन... Read more

माँ

............... शीर्षक - माँ.............. छलक जाती मेरी आँखे, तुझे जब याद करता हूँ पलक पे हैं तेरी यादें , तेरी फरिया... Read more