Vikash Rishi

Joined November 2016

मैं एक बहुत ही साधारण किस्म का इन्सान हूँ अगर कुछ ख़ास है मेरे बारे में कहने को तो वो है मेरा “साधारण” होना। एक बीमारी भी है “सोचने की बीमारी” मैं खुद को इससे बचा ही नहीं पाता “जो चल रहा, जो घट रहा है उसी को जीता हूँ ,भोगता हूँ कविताएँ, ग़ज़ल लिखने का,पढने का शौंक है इसलिए आप से जुड़ हूँ। धन्यवाद …

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मेरे बारे में.....

मेरे बारे में कोई तो राय उनकी भी होगी उसने भी कभी मोहब्बत की तो होगी। नहीं चाहते हम इम्तेहाँ और इश्क़ में इम्तहाँ ए इश्क़ में... Read more

तुम कोई प्यार भरी ग़ज़ल तो नहीं

न तुमसे कुछ पाना चाहता हूँ यूँ ही बस आज़माना चाहता हूँ! तुम कोई प्यार भरी ग़ज़ल तो नहीं जाने क्यों गुनगुनाना चाहता हूँ! ... Read more