vishwambhar pandey vyagra

गंगापुर सिटी, स.मा. (राज.) 322201

Joined September 2018

विश्वम्भर पाण्डेय ‘व्यग्र’ (व्यग्र पाण्डे)
‘कवि एवं साहित्यकार’

Books:
1. कौन कहता है…(काव्य-संग्रह)
2. पाण्डे जी कहिन…(काव्य-संग्रह)

Awards:
1. “श्रेष्ठ कविता पाठ” सत्यवती महाविद्यालय (दिल्ली विश्वविद्यालय)
2. “प्रतिभाशाली रचनाकार सम्मान” जे एम डी पब्लिकेशन नई दिल्ली

Copy link to share

माँ

माँ """"" माँ सुबह बनके जगाती है सबको चिड़िया सी चहकती फुलबारी सी महकती फिर दोपहर बन जाती सबको भोजन खिलाती फिर स्व... Read more

माँ (विषय- माँ प्रतियोगिता हेतु)

माँ """"" माँ सुबह बनके जगाती है सबको चिड़िया सी चहकती फुलबारी सी महकती फिर दोपहर बन जाती सबको भोजन खिलाती फिर स्व... Read more

आना चाहती हूँ ...

आना चाहती हूँ ... (प्रतियोगिता के लिए) """"""""""""""""""""""""" मैं इस जग में आना चाहती हूँ माँ तेरे दर्शन करना चाहती हूँ जन... Read more

ऐ जिंदगी...(कविता)

ऐ जिंदगी ! तू कितने रंग दिखलायेगी ऐ जिंदगी ! तेरे इन रंगो से अब मैं डरने लगा हूं तू कभी प्यारी थी न्यारी थी तेरी मेरे प्र... Read more