Vindhya Prakash Mishra

नरई चौराहा संग्रामगढ प्रतापगढ उ प्र

Joined July 2017

विन्ध्यप्रकाश मिश्र विप्र
काव्य में रुचि होने के कारण मैं कविताएँ लिखता हूँ ।
मै मौलिक विचारों के बिम्ब को लिपिबद्ध करता हूँ ।
स्वान्तःसुखाय लिखता हूँ । किसी प्रसिद्धि एव प्रदर्शन की कामना नहीं है । चिंतनशील होने के कारण काव्य अनवरत है ।

कवि, अध्यापक

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चंदा मामा

चंदा मामा दूर रहे हो ऊपर से ही घूर रहे हो। मुँह मटका चिढाते हो दिखते कभी छिप जाते हो। चमक चांदनी साथ में लाते इसलिए ओषधिपति कहल... Read more

प्रेम रोग नहीं ओषधि है ।

कौन कह रहा प्रेम है मुश्किल, आंख बंद कर देख रहा हूँ । स्वप्न में रोज मुलाकाते है । प्रेम रस भरी बातें है । नहीं जरूरी सामने आये... Read more

बरसो मेघ छन छन

बादल घुमड़ घुमड़ कर बरसो , जन जन में खुशहाली लाओ आवाहन करते हैं पपीहा, वर्षों की तुम प्यास बुझाओ सूखी धरती सूखी नदियां सूख ... Read more

ताना क्यों मारना

ताने तनातनी देते, रोज सनातनी देते। मन की हालात बताते, शब्द बड़े चुभ जाते। जिससे न बने बना लो दूरी, किस बात की है मजबूरी। जो स... Read more

जो थोड़ा स्वाभिमानी हो

जो तुम्हे न कभी सम्मान दिया अवसर पाकर अपमान किया उसपर इतना न शोर करो। केवल उसको इग्नोर करो। जिसकी नजर में आपका मान नहीं ... Read more

झूठ का यूँ न नुमाया कर

झूठ का यूँ न नुमाया कर, सच को भी दिखलाया कर। दर्द सहे सौ बार हथौड़ा, फिर न अश्रु बहाया कर। खुद का खुद हौसला बने पर ... Read more

जिसके जान से ही मेरी पहचान है ।

जिसके जान से ही मेरी पहिचान है, तुम नही तो दिन मेरा सूनसान है। नजरे है कटीली दिलपर आ लगी, आंखे तो उसकी पूरी धनुष का बान है। आने ... Read more

आत्महत्या क्यों?

आत्महत्या क्यों? सुशांत सिंह राजपूत के आत्म हत्या की चौकाने वाली खबर आयी । आत्म हत्या किसी समस्या का समाधान नहीं है । प्र... Read more

रेलगाड़ी का खेल (बचपन)

----------------------------- लम्बी टेढ़ी मेढी रेल आओ हम मिलकर खेले खेल। जुडकर हम सब डिब्बा बन जाएं आज रेल का खेल खिलाएं। मुँह ... Read more

मैं तेरे प्यार में गुनगुनाता हूँ

रातभर जागकर बिताता हूँ, मैं तेरे प्यार में गुनगुनाता हू। कविता बनकर आ रही हो तुम। मैं प्रेम से गले लगाता हूँ । रातभर जागकर ... Read more

बेटी को जन्म दिन पर -

फुलवा बन आंगन में महको, बेटी खुशियाँ से तुम चहको। मिल जाएँ लम्बी उमर तुम्हे, जीवन हो तुम्हारे सौ बरसों । नित नई ऊंचाई पर चढ लो, ... Read more

गुस्से से लाल दिवाकर

गर्मी ने पसीने निकाले लाल सूर्य की रश्मिवलियां, कुद्ध दिख रहा क्यों आज दिवाकर , काट दिये जो तरू धरा के, समतल कर दिये जन ने भूधर... Read more

स्माइल प्लीज

सेल्फी खीचे सीना तान , हम पूरे हुए शाहरुख खान, बिना रूप रंग सुंदर दिखते ब्यूटी ऐप कैमरा महान। नीरस जीवन स्माइल प्लीज सुनकर अंद... Read more

घड़ी

घड़ी-(बाल कविता) दिनभर चलती रात न थकती सुई नही सुस्ताती है सही समय बतलाती है । टिक टिक की आवाज लगाती... Read more

झूठे ही मुस्काता हूँ

झूठे ही मुस्काता हूँ ऐसे गम भुलाता है। चटकारे से सूखी रोटी प्याज नमक संग खाता हूँ । झूठे ही मुस्काता हूँ । ... Read more

प्यारे घन धरती पर आओ

प्यारे घन धरती पर आओ, छन छन बूँद पड़े पृथ्वी पर जन जन में खुशहाली लाओ। मुदित विहंगा चञ्चु फाडकर। गिरती बूँदो से प्यास बुझाओ। ... Read more

बुरे वक्त की स्याह लकीरे

कट जाएंगी धीरे धीरे बुरे वक्त की स्याह लकीरे अभी डगमगाई कश्ती है सन्नाटे मे सब बस्ती है । घबराई जनता सारी है घर में रहना लाचार... Read more

व्याकरण कविता

*व्याकरण कविता* ---------------------------- हिंदी का है व्याकरण, भाषा का आचार हिन्दी व्याकरण काव्य में लिखते विन... Read more

चींटी

दिन और रात एक कर देती, अथक ही चलती जाती है। श्रम से है पहचान जिसकी, वह पिपीलिका कहलाती है। क्या दिन क्या हो रात अंधेरी, क्य... Read more

पतंग बाल कविता

बाल कविता ---------------------------- उडती नभ में लाल पतंग, जुड़े हैं धागे उसके संग। खींच रहे जब नीचे डोर, उडती है वह नभ की ... Read more

घर

सब समस्या का हल है घर, सुख सुकून का पल है घर। भाव भावना लिए समेटे, कई स्मृति का दल है घर। जहाँ सुमति संस्कार पले, वही स... Read more

भूल जाओगे

तुम भी मुझको इक न इक दिन भूल जाओगे, अपने पीछे छोड ऊँची धूल जाओगे । कह रहे हो कसम देकर पर भरोसा क्या । छोड़ कर हृदय में मेरे शूल ... Read more

खुद को ही मैं भूल गया हूँ ।

खुद को ही मैं भूल गया हूँ नहीं मिला हूँ वर्षो से। अपनी बातें भूल गया हूँ सबकी हालत चर्चो से। जेब कहा है पता नहीं पर बढते जात... Read more

कमाल है कमाल है ।

संसद में बस शोरगुल है न उठता सवाल है कमाल है कमाल है । हर जगह दंगा है हर तरफ बवाल है। कमाल है कमाल है । केवल बयान बाजी हर ... Read more

प्रेम न कोई रोग दोष है ।

कौन कह रहा प्रेम है मुश्किल, आंख बंद कर देख रहा हूँ । स्वप्न में रोज मुलाकाते है । प्रेम रस भरी बातें है । नहीं जरूरी सामने आये... Read more

पतंग कविता

बाल कविता ---------------------------- उडती नभ में लाल पतंग, जुड़े हैं धागे उसके संग। खींच रहे जब नीचे डोर, उडती है वह नभ की ... Read more

चुहिया

चुहिया करती है मनमानी, बड़ी मूॅछ है दो दो चार, इसके कई काम बेकार । बिल्ली को देखें छिप जाती लुका छिपी का खेल खिलाती कोई वस्तु ... Read more

2020 नववर्ष मंगलमय हो

नया वर्ष हो नया हर्ष हो नव जीवन हो नया पर्व हो। नयी प्रीति हो नयी रीति हो न... Read more

डगर होइगवा सून

*-अवधी कविता-* --------------------------------------- *जाडा आवा। जाडा आवा।* ठिठुर ठिठुर सी सी बोलय सब। छिपे रहै मुँह न खोलय सब... Read more

क्या कहना

प्यार करे पर कह न पाए । क्या कहना । दूर रहे पर रह न पाए क्या कहना । बंद आंखों से देखें उसको। क्या कहना । मन ही मन में चाहे उसक... Read more

आदत की कोई दवाई नहीं है ।

जैसा हूँ वैसा समझते रहे तो, इसमें तो कोई बुराई नहीं है । दिल से मिलो अपने को सदा तुम, ऐसे कि मानो कोई खांई नही है । दूरी सदा ही... Read more

नफरत रखाना भी अच्छा नहीं है ।

जीवन है बहुमूल्य समझो इसे तुम। इकपल गवाना भी अच्छा नही है। भुला दो किया जो व्यवहार उसने। नफरत रखाना भी अच्छा नही है। सहयोग न... Read more

कितनी बदसूरत हो

है कजरे की धार, गले मोतियो का हार। कितना भी किया श्रृंगार । पर सब हो गया बेकार, कि तुम कितनी बदसूरत हो। कि तुम कितनी बदसूरत हो... Read more

बाल दिवस पर

बचपन के दिन की यादे प्यारी सी तोतली बाते नही चाह नही परवाह खुशी भरी थी दिन व रातें आगे की परवाह न थी न पछतातें बीती बातें मस्त... Read more

सहिष्णुता भारत के रग रग में

सहिष्णुता भारत के रग रग में- चार वर्ष पूर्व यह शब्द बडी तेजी से उछला आखिर भारत इतना असहिष्णु(इंटोलरेंश) हो गया है । यह पूणतः काल्प... Read more

परेशान दिल्ली बेचारी

धूल से है धुंध गहरी मिट रही है छवि सुनहरी। धुआं हो गयी हवा सारी। परेशान दिल्ली बेचारी। दिन नहीं वो दूर अब है प्रदूषण के मारे स... Read more

प्रदूषण से हानि है।

मानव ने खूब की मनमानी प्रकृति की कर दी हानि गंदी कर दी हवा पानी खनन किया की मनमानी धरती अब नही रही धान... Read more

महक रहा है

महक रहा अपने गुण से वह लोगों ने मसला तोडा है । कांटो के संग पला बढा पर फूल महकना कब छोड़ा है । लगी ठोकरे पग पग पर ... Read more

दिवाली शुभ होवे।

घर मे हो लक्ष्मी का वास खुशियां हो सबके पास अंधेरे का हो जाए नाश दिवाली शुभ होवे। जगमग हो दीप प्रकाश मिल जाए कुछ खास महके ... Read more

एक दीपक जल रहा है पतंगा विकल रहा है ।

एक दीपक जल रहा है । पतंगा विकल रहा है । एक दीपक स्वयं जलकर दूसरो को राह दिखाता पर पतंगा मूर्ख उसको रोकने को पर फैलाता। देखकर प... Read more

गीत बनाकर गाया कर ।

दर्द बढ़े जब दिल का अपने गीत बनाकर गाया कर। अपने हैं जो कहाँ का शिकवा। हरदम गले लगाया कर। अपना साथी आप बने तो नयी राह अपनाया कर... Read more

एक के साथ दूसरा चांद

एक चांद के साथ चांद का होता है दीदार दाम्पत्य प्रेम प्राकट्य का यह पावन त्योहार। पति के दीर्घजीवी की रहती सबकी आस इसी हेतु मे व्र... Read more

करवा चौथ

(@ करवा चौथ@) पति से खूब प्रीति बढै निशदिन इस हेतु ही व्रत ये धारति हैं । दीर्घ जीवी बनें नित सुहाग रहे ये प्रेम की दीपक बारति... Read more

ऐसी है मेरी घरवाली।

कभी कभी मिश्री सी मीठी कभी कडक चाय की प्याली। ऐसी हैं मेरी घरवारी। सुंदर मुखडा शुभ सूचक है । देखें दिन मंगल हो जाता । जिनसे है... Read more

राम आओ फिर एक बार

पाप का प्रतिफल बढा है । सामने दानव खडा है । अटल पैर सामने जडा है । हंसी है अट्टाहास । राम आओ फिर एक बार। बेटियाँ हैं असुर... Read more

दशानन हारा

कितना ज्ञान भरा हो अंदर कितनी होवे शक्ति अपार कितनी सेना पीछे चलती कितना होवे स्वर्ण भंडार । कितनी जीत मिली हो जग मे कितना फैला... Read more

पैसों से मत तोले

मैं गरीब से जाना जाऊँ इसमें हैं क्या मेरा दोष। मैं पैसो से तौला जाऊँ लग जाता है मेरा मोल कर्म करू असफल हो जाऊ। इसमें न मिलता ... Read more

माँ तो आखिर माँ होती है ।

माँ तो आखिर माँ होती है । माँ तो आखिर माँ होती है । नहीं कमी होती दुलार में। पालन पोषण स्नेह प्यार में । वत्सलता भरपूर मिली है ।... Read more

शब्द है पर बोलू कैसे

कहने को बहुत विचार उठे पर शब्द नहीं बोलूं कैसे । अपने अपने न हुए आज। यह राज भला खोलूं कैसे। दूसरे सहारा दे दे... Read more

आंशू

शब्द बहुत है बोलूं कैसे, हृदय पटल को खोलूं कैसे । जग जानेगा पीड़ा अपनी, भरभर आंशू रो लूँ कैसे ।। Read more