नाम : विजय कुमार सिंह
पिता : स्वर्गीय राम नारायण प्रसाद
माता : स्वर्गीय सीता मणि देवी
जन्म वर्ष : १९६७
जन्मस्थान : पटना, बिहार, भारत
शिक्षा : स्नातक

दिल के भावों को लेखनी का सहारा है, समाज को बेहतर बनाना कर्तव्य हमारा है. आइये आपका स्वागत है हमारे लेखन के दरबार में, पलकें बिछाए बैठे हैं हम आपके इंतज़ार में.
vijaykumarsinghblog.wordpress.com

Copy link to share

बनवारी (मत्तगयंद छंद सवैया)

गोकुल ग्राम सजै जब केशव बाँसुरिया धुन बाजत प्यारी संग सखी सब नाचत ग्वालिन दर्श दिखावत हैं बनवारी ग्वाल सखा सब केशव संगहि माखन खावन... Read more

स्वच्छ मन

मन के बंधन खोलिये, जगत लीजिये जीत I नहीं किसी से बैर हो, रखिये सबसे प्रीत II रखिये सबसे प्रीत, जगत सुंदर बन जाए I प्रेम का पुष्प ... Read more

चुनावी शतरंज

तू डाल डाल चले तो मैं चलूँ पात पात राजनीति में क्या घात क्या प्रतिघात I पिता को पटखनी देकर पुत्र ने जीता दंगल राजनीति में रिश्त... Read more

राम की राजनीति

राजनीति के राम को, मिला बाण का संग I ऊँची सोच से पहले, दोनों ही थे तंग II दोनों ही थे तंग, बड़े पद की थी चाहत I जनता के दांव से, द... Read more

ट्रम्प का शपथ

धुन चले स्वदेशी की, थामे मोदी डोर I ट्रम्प का तड़का पाकर, ख़ुशी दिखी हर ओर II ख़ुशी दिखी हर ओर, अमेरिकी झूमे सभी I विरोध के कुछ स्वर... Read more

नर-नारी

नारी नर जब मिल चलें, जीवन वाहन रूप I सब राह मिल पार करें, कठिन हो या कुरूप II कठिन हो या कुरूप, अब राह से क्या डरना I हौसलों का ज... Read more

साइकिल

पिता पुत्र के कोप में, अब आ गया चुनाव I एक एक चक्का पकड़, साइकिल लगे दाँव II साइकिल लगे दाँव, होती मुश्किल सवारी I हवा निकली उसकी,... Read more

जननी जन्म से वंचित क्यों ?

दोहा गर्भ में नहीं मारिये, जगजननी का रूप I बिटिया घर को सींचती, पीहर सासुर कूप II चौपाई खुशियां मिली झूमना चाहूँ I गर्भ से न... Read more

गुरु गोविन्द सिंह चालीसा

दोहा गुरु को नमन कीजिये, महिमा होय अपार I प्रकाशपर्व कि बेला, होगा बेड़ा पार II चौपाई दिल्ली की गद्दी पर बैठा I जालिम शाशक था वो... Read more