बहुत माहिर हैं

बहुत माहिर हैं वो साध लेते हैं समीकरण वक्त के मुताबिक साध लेते हैं शब्दों को हालात के मुताबिक देते हैं वक्तव्य सार्वभौमिक... Read more

झूठ की चकाचौंध

झूठ की चकाचौंध चीखते हैं टी. वी. चैनल एक सुर में मिला रहे हैं ताल सभी समाचार-पत्र इनके मालिक हैं सरकार में सांझेदार या हैं... Read more

कौन है उत्तरदायी

कौन है उत्तरदायी जब शुद्रों को नहीं था अधिकार सेना में भर्ती होने का युद्ध करने का तब होता रहा भारत बार-बार विदेशियों का गु... Read more

खोई हुई आजादी

खोई हुई आजादी मैं ढूंढ रहा हूँ अपनी खोई आजादी मजहबी नारों के बीच न्यायधीश के दिए निर्णयों में संविधान के संशोधनों में लालकिल... Read more

प्रमाण

प्रमाण वो समझता है खुद को सर्वश्रेष्ठ कर रखे हैं उसने गवाह तैयार जो दे रहे हैं उसके पक्ष में सर्वश्रेष्ठ होने की गवाही तमा... Read more

हुआ हिमालय क्रोध में

हुआ हिमालय क्रोध में हुआ हिमालय क्रोध में, आंखें उसकी लाल| हुआ वनों का दूहना, मानव को न ख... Read more

दहेज दानव

दहेज दानव ये दहेज दानव हजारों कन्याएं खा गया। ये बदलता माहौल भी रंग दिखा गया।। हर रोज अखबारों में ये समाचार है, ससुर... Read more

अनुच्छेद दूसरा जान

अनुच्छेद दूसरा जान अनुच्छेद दूसरा जान, जो है बड़ा विशेष| इसी के तहत सिक्किम का, संघ में ह... Read more

पढ़ो प्रथम अनुच्छेद

पढ़ो प्रथम अनुच्छेद भारत के संविधान में, पढ़ो प्रथम अनुच्छेद| वतन राज्यों का संघ है, रहे ... Read more

अनुच्छेद 47

अनुच्छेद 47 अनुच्छेद संतालिस पढ़, भारतीय संविधान| नशा नियंत्रण सत्ता करे, कर रहा है बखा... Read more

निजीकरण

निजीकरण नौकरियां तो चढ़ गई, निजीकरण की भेंट| पेट पर पट्टी बांध कर, ... Read more

सरकार के बाप

सरकारों के बाप जब भी बदलती है सरकार बदल जाती हैं नीतियाँ नई नीतियाँ बनाती है सरकार अपने बाप के नाम पर बदल जाती हैं ... Read more

दायरे

दायरे कर लिए कायम दायरे सबने अपने-अपने हो गए आदि तंग दायरों के कितना सीमित कर लिया खुद को सबने नहीं देखा कभी दायरों को... Read more

सवेरा

सवेरा मेरे शहर के बाहर, झुग्गियों के पास, वहीं खेल रहे थे कुछ, युवक तास , उनसे छोटे भी वहीं, कंचे खेल रहे थे, एक-दूस... Read more

आज की तरह

आज की तरह एक था वो समय जब मानव था अभावग्रस्त फिर भी नहीं होती थी मारा-मारी आज की तरह तब इंसान नहीं थे सभ्य परन्तु नही... Read more

बातूनी

बातूनी मैं बैठा था एकान्त में होना चाहा निशब्द परन्तु हो न सका नहीं हिले होठ नहीं हिली जुबान लेकिन बोलता रहा अपने-आप से ... Read more

प्रेम विवाह

प्रेम विवाह उन्होंने नहीं की परवाह जमाने की नकार दिया परम्पराओं को हो गई मिसाल कायम हो गया आगाज परिवर्तन का खुल गए नए द्व... Read more

परिवर्तन

परिवर्तन होता है विरोध हर परिवर्तन का नहीं आता रास परिवर्तन यथास्थितिवादियों को वे लगा देते हैं एड़ी-चोटी का जोर परिवर्तन र... Read more

उपनाम

उपनाम मुख्यद्वार पर लगी नेमप्लेट चिड़ा रही थी उन बूढ़े माता-पिता को जिन्होंने रखा था नाम अपने पुत्र का बड़े अरमान से बड़े... Read more

फरमान

फरमान शीतकाल में धूप है कुदरत की अनमोल नियामत हर व्यक्ति अपना कार्य चाहता है निपटाना धूप में लेकिन मैं हूँ बाध्य कक्षाकक... Read more

दिल में बसता है गांव

दिल में बसता है गांव गांव छोड़े हो गए बीस वर्ष से अधिक वैसे तो गांव से आने के बाद भरपूर स्नेह दिया टोहाना शहर ने नहीं होने ... Read more

आंगन

आंगन यह आंगन जिसमें बिता हमारा बचपन बहनें तो नदियों माफिक छोड़कर पहाड़ को जा मिलीं अपने-अपने सागर में हम दोनों भाई निकल... Read more

हंसना है महत्वपूर्ण

हंसना है महत्वपूर्ण हंसता हुआ व्यक्ति लगता है बहुत सुंदर चित्र भी अक्सर लगते हैं सजिंदा हंसते हुए व्यक्ति के हंसी है कुद... Read more

मूल्यांकन

मूल्यांकन आप हैं इंसान मैं भी हूँ इंसान बाकी भी हैं इंसान तो आप बाकियों से बड़े कैसे हैं यह है समझ से परे मुझे आता नहीं स... Read more

असल पीड़ा

असल पीड़ा भरा है खेत पानी से झुके हुए हैं पानी में खेतीहर मजदूर कर रहे हैं रोपाई धान के पौधों की रह-रह कर पीड़ा होती होगी इ... Read more

भविष्य

भविष्य आज का युवा कल का है भारत कल का है भविष्य देखता हूँ अक्सर करते हुए गाली-गलौच उसे लांघते हुए सीमा सभ्यता की करते हु... Read more

सीखता रहा

सीखता रहा ताउम्र सीखता रहा इंसान बहुत कुछ सिखाया इसे विकट परिस्थितियों ने अपनों के दिए जख्मों ने जीवन में खाईं ठोकरों ने... Read more

स्वतंत्रता

स्वतंत्रता हर वर्ष बुलेट-प्रूफ शीशों में से दिया जाता है भाषण कि आज हम मना रहे हैं स्वतन्त्रता की सत्तरवीं या इकहत्तरवी ... Read more

बरसात

बरसात आ गई बरसात देख रहे थे कब से राह इसकी लहलहा उठे पेड़-पौधे टर्रा उठे मेंढक हुई धींगा-मस्ती बच्चों की चल पड़ीं कागज की... Read more

बीता समय

बीता समय ये सच है आदि काल में धर्म नहीं थे अंधविश्वास-आडंबर और भ्रम नहीं थे तब मानव के आत्मघाती कर्म नहीं थे जाति-मजहब नस... Read more

चुनाव

चुनाव देखा चुनाव का दौर प्रचार का शोर लगा हुआ एड़ी-चोटी का जोर किसी को बेचा किसी को खरीदा शह-मात का खेल शेर-बकरी का मेल ... Read more

सिरदर्द

सिरदर्द कुछ एक लेकर आते हैं धरती पर अपने साथ सिरदर्द जो भी उनके आता है संपर्क में दे जाते हैं उसे सिरदर्द उनके लिए स... Read more

सवाल-जवाब

सवाल-जवाब रेलवे स्टेशन पर बौद्धी वृक्ष के नीचे चबूतरे पर लेटी है एक वृद्धा सिरहाना बनाए अपनी पोटली का यह पोटली ही है उसक... Read more

तिरंगा यात्रा

तिरंगा यात्रा आज थी तिरंगा यात्रा उन हाथों ने थामा हुआ था तिरंगा सिर्फ और सिर्फ वोटार्थ वरना ताउम्र वो करते रहे उपेक्षा रा... Read more

सर्वव्यापक

सर्वव्यापक लोग बोलते हैं तो स्वार्थवश बोलना छोड़ते हैं तो स्वार्थवश स्वार्थपरता शह-मात तिकड़मबाज़ी षड़यंत्र के अतिरिक... Read more

मापदंड

मापदंड रख दी गिरवी नैतिकता अपने अल्प लाभार्थ नहीं चूकते वतन को बड़ा नुकसान पहुंचाने से काट रहे हैं उसी डाल को जिस पर ब... Read more

कतार में

कतार में वो है आमजन जब भी देखो मिलता है कतार में कभी रेलवे की टिकट खिड़की पर कभी राशन की सरकारी दुकान पर कभी गैस-एजेंसी की... Read more

गुल चाहता है

मैं चाहता हूँ गुल चाहता हूँ न गुलिस्तान चाहता हूँ। वंचितों के ओठों पे मुस्कान चाहता हूँ।। चहूँ ओर गूंजते हैं मजहबी... Read more

आज का अखबार

आज का अखबार ये आज का अखबार पढ़ लो। दुखद कई समाचार पढ़ लो ।। शौच के लिए गई लङकी से , सामुहिक बलात्कार पढ़ लो।। यौन शोषण ... Read more

श्रमिक

श्रमिक उस श्रमिक का चोटी से चला पसीना तय करके सफर पूरे बदन का पहुंचा एड़ी तक मिले चंद रुपए उसकी मेहनत पर किसी ने द... Read more

हुनरमंद

हुनरमंद उनकी बातें थीं मनमोहक एक-एक शब्द था कर्णप्रिय उसने वही कहा जो चाहते थे श्रोतागण सुनना नहीं था उसे भले-बुरे से सरो... Read more

परिवर्तन

परिवर्तन मन के द्वार देती हैं दस्तक बार-बार गमी व खुशी चिन्ता व बेफिक्री कभी हो जाता है मन भारी मानो पड़ा है इस पर कई मण ... Read more

बहुत माहिर हैं

बहुत माहिर हैं वो साध लेते हैं समीकरण वक्त के मुताबिक साध लेते हैं शब्दों को हालात के मुताबिक देते हैं वक्तव्य सार्व... Read more

झूठ की चकाचौंध

झूठ की चकाचौंध चीखते हैं टी. वी. चैनल एक सुर में मिला रहे हैं ताल सभी समाचार-पत्र इनके मालिक हैं सरकार में सांझेदार या ह... Read more

प्रमाण

प्रमाण वो समझता है खुद को सर्वश्रेष्ठ कर रखे हैं उसने गवाह तैयार जो दे रहे हैं उसके पक्ष में सर्वश्रेष्ठ होने की गवाही तमा... Read more

शहीद हो गई

शहीद हो गई वो सैनिक हो गया शहीद सीमा पर अपना कर्तव्य निभाते-निभाते सिर्फ वही शहीद नहीं हुआ शहीद हो गई सदा के लिए एक घर की... Read more

बाह्य मूल्यांकन

बाह्य मूल्यांकन कोट-पैंट टाई ने बाह्य व्यक्तित्व बना दिया आकर्षक गिटपिट भाषा ने बना दिया इक्किसवीं शदी का लेकिन अंदर आदमी ... Read more

खारा ही रहा

खारा ही रहा सागर की तरह मानव जीवन में मीठे जल की कितनी ही नदियाँ मिलीं फिर भी मानव जीवन सागर की तरह खारा ही रहा जबकी नदि... Read more

सुंदरता

सुंदरता सुंदर चेहरे नहीं होते सदैव सुंदर यह सुंदरता बाह्य आकार-प्रकार बाह्य मापदंड आधारित होती है जरूरी नहीं यह व्यवहार की... Read more

अवर्णित

अवर्णित पौराणिक कथाओं में वर्णित है ब्रह्मा के मुख से उत्पन्न हुआ ब्राह्मण भुजाओं से उत्पन्न हुआ क्षत्रिय उदर से उत्पन्न ह... Read more