नाम : डॉ0 विवेक कुमार
शैक्षणिक योग्यता : एम0 ए0 द्वय हिंदी, अर्थशास्त्र, बी0 एड0 हिंदी, पी-एच0 डी0 हिंदी, पीजीडीआऱडी, एडीसीए, यूजीसी नेट।
उपलब्धियाँ : कादम्बिनी, अपूर्व्या, बालहंस, चंपक, गुलशन, काव्य-गंगा, हिंदी विद्यापीठ पत्रिका, जर्जर-कश्ती, खनन भारती, पंजाबी-संस्कृति, विवरण पत्रिका, हिंदुस्तान, प्रभात खबर,राँची एक्सप्रेस, दक्षिण समाचार, मुक्त कथन, वनवासी संदेश, प्रिय प्रभात, आदि पत्र-पत्रिकाओं में शताधिक रचनाएँ प्रकाशित।
आकाशवाणी केन्द्र, भागलपुर से समय-समय पर रचनाओं का प्रसारण.

E-mail – vivekvictor1980@gmail.com

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नव वर्ष मंगलमय हो

नव वर्ष मंगलमय हो जन-जन के घर-आँंगन में सुख का सूर्योदय हो, मिटे गरीबी और अशिक्षा सच्चाई की जय हो। जन-जन के उर सिंधु में ... Read more

कोई (डॉ. विवेक कुमार )

कोई पास रहकर भी याद नहीं आता है कोई दूर रहकर भी यादों में बस जाता है। कोई कह कर भी कुछ कह नहीं पाता है और कोई खामोश रहक... Read more

तुम आओ (डॉ. विवेक कुमार)

तुम आओ इस तरह जैसे आती है नदियाँ सागर की लहरों में समा जाने के लिए। तुम आओ इस तरह आती है जैसे बेचैन व्यक्ति को किसी की द... Read more

संजीवनी (डॉ. विवेक कुमार)

बहुत कुछ खोने के बाद भी खुश हूँ मैं यह सोच कर कि मेरे पास कुछ खोने को था तो सही । अपनों और परायों से अनगिनत ठोकरें और धोखे ... Read more

धूप छाँव (डाॅ. विवेक कुमार)

है आज मुझमें सामर्थ्य खड़ा हूँ पैरों पर अपने इसलिए तुम रोज ही आते हो मेरे घर मेरा हालचाल पूछने। बाँधते हो तारीफों के पुल ... Read more

तुम्हारे मिलकर जाने के बाद...

क्या रहस्य है यह आखिर क्यों हो जाता है बेमानी और नागफनी-सा दिन तुम्हारे मिलकर जाने के बाद... क्यों हो जाती है उदास मेरी ... Read more

कुछ नहीं कर पाएंगे

आज, तोड़े जा रहे हैं पहाड़ अंधाधुंध काटे जा रहे हैं पेड़ किये जा रहे हैं विज्ञान के नित नए आविष्कार। धरती के गर्भ को भी ... Read more

मुक्तक (डॉ. विवेक कुमार)

जीत की न हार की बात केवल प्यार की, आप साथ हो अगर क्या पड़ी बहार की। आप मुस्कुरा दिए ज्यों झड़ी फुहार की, देह आपकी की कनक च... Read more

जले होलिका नफरत की ...

अबकी बार इस होली में चले प्रेम की पिचकारी, राधा के गहरे रंग से रंग दें दुनिया सारी। जले होलिका नफरत की मिटे आपस की दूरी, ... Read more

छोटी-सी-जगह

छोटा-सा एक रास्ता जो जाता तुम्हारे दिल तक और लौटता मेरे दिल से होकर l चाहता हूँ - इस रास्ते के सहारे पहुँचूँ तुम्हारे ... Read more

बेटिया

बेटिया समय के साथ समझने लगती है इस रहस्य को क्यों असमय बूढ़े होते जा रहे हैं उसके पिता। वह जानती है, उसकी बढ़ती उम्र ही है... Read more