विवेक दुबे "निश्चल"

निवासी-रायसेन (मध्य प्रदेश)

Joined April 2017

मैं – विवेक दुबे “निश्चल”
पिता-श्री बद्री प्रसाद दुबे”नेहदूत”
माता- स्व.श्रीमती मनोरमा देवी

शिक्षा – स्नातकोत्तर
पेशा – दवा व्यवसाय
मोबाइल– 07694060144

कवि पिता श्री बद्री प्रसाद दुबे “नेहदूत” से
प्रेरणा पा कर कलम थामी।
यही शौक है बस फुरसत के पल ,
कलम के संग काम के साथ साथ ।
ब्लॉग भी लिखता हूँ
“निश्चल मन ” नाम से
vivekdubyji.blogspot.com

Awards:
निर्दलीय प्रकाशन भोपाल द्वारा
बर्ष 2012 में
“युवा सृजन धर्मिता अलंकरण”
से अलंकृत।

जन चेतना साहित्यिक सांस्कृतिक समिति पीलीभीत द्वारा 2017
श्रेष्ठ रचनाकार से सम्मानित

कव्य रंगोली त्रैमासिक पत्रिका
लखीमपुर खीरी द्वारा
साहित्य भूषण सम्मान 2017
से सम्मानित

काव्य रंगोली ,अनुगूंज , कस्तूरी कंचन साहित्य पत्रिका एवं निर्दलीय साप्ताहिक
पत्र में रचनाओं का प्रकाशन।

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जिंदगी

रूबरू ज़िंदगी ,घूमती रही । रूह की तिश्नगी, ढूँढती रही । रहा सफ़र दर्या का, दर्या तक, मौज साहिल को ,चूमती रही । .... विवेक दुबे"नि... Read more

माँ

लिए हक़ीक़त का अहसास सी । ओ माँ तू बड़ी ख़ास ख़ास सी । मिलता है सुकूँ तेरे आँचल में , तेरी हँसी में सारी कायनात सी । .... विवेक दुब... Read more

मेरा रहबर

वो सच कहाँ था ,जो सच कहा था । मेरे ही रहबर ने,मुझको ही ठगा था । पढ़ता रहा जो क़सीदे शान में मेरी , लफ्ज़ लफ्ज़ जिनमे भरा दगा था । ..... Read more

अंदाज़

मुस्कुराने की भी एक बजा चाहिए । नज़्र-ओ-निग़ाह की अदा चाहिए । कैसे रहे कायम बात पर अपनी , हर अंदाज़ की एक फ़िज़ा चाहिए । .... विवेक द... Read more

वक़्त

वक़्त बड़ा कमज़र्फ है । जफ़ा भरा हर्फ़ हर्फ़ है । अरमान घुटे सीनों में , सर्द दर्द हुआ वर्फ़ है । .. विवेक दुबे"निश्चल"@... Read more

हालात को बदलता गया ।

"निश्चल" रहा मैं मगर , सफ़र जिंदगी चलता गया । बदलकर अपने आपको , हालात को बदलता गया । .. *विवेक दुबे"निश्चल"* @.... Read more

कुछ ख़ुश ख़याल खोजते रहे ।

हर हाल बे-हाल कचोटते रहे । कुछ ख़ुश ख़याल खोजते रहे । चलते रहे सफ़र जिंदगी के , ये दिल हाल मगर रोज से रहे । .. विवेक दुबे"निश्चल"... Read more

आश्रयहीन अभिलाषाएं

शेष नही कही समर्पण है । मन कोने में टूटा दर्पण है । आश्रयहीन अभिलाषाएं , अश्रु नीर नैनो से अर्पण है । ...विवेक दुबे"निश्चल"@. Read more

कैसी चाहत है

यह कैसे कल की चाहत है । आज लम्हा लम्हा घातक है । उठ रहे हैं तूफ़ान खमोशी के , साहिल पे नही कोई आहट है । ... विवेक दुबे"निश्चल"@... Read more

कुलषित कुंठाएं

चलता नही मन साथ कलम के । खाली रहे अब हाथ कलम के । सिकुड़ती रहीं कुलषित कुंठाएं , लिए बैठीं दाग माथ कलम के । .... विवेक दुबे"निश... Read more

आज़ादी की पूर्व संध्या

रात बड़ी उल्लास में , लिये सुबह की आस । भोर यहाँ लहरायगा , राष्ट्रध्वज आकाश । ... धरा अपनी झूमेगी, झूमेगा आकाश । फैलाएग... Read more

निगाहें

निगाहों को निग़ाहों से धोका हुआ है । ज्यों जागकर भी कोई सोया हुआ है । झुकीं हैं निग़ाहें यूँ हर शख़्स की क्युं , ज्यों निग़ाहों का नि... Read more

जिंदगी

वो जाम सा अंजाम था । निग़ाहों से अपनी हैरान था । नही था कोई रिंद वो साक़ी, जिंदगी उसका ही नाम था । .... विवेक दुबे"निश्चल"@... Read more

कविता

शब्द शब्द अर्थ सजी है कविता । अपरिचित सी परिचित है कविता । गूढ़ भाव मौन गढ़ती है कविता । है "निश्चल" सचल बनी है कविता । ... विवेक ... Read more

वो

वो नुक़्स निकालते रहे । यूँ हमे खंगालते रहे । बार बार सम्हल कर हम, खुद को सम्हालते रहे । .... "निश्चल"@.. Read more

मुझको भी

कभी मुझको भी पढ़ लेना । कभी अपनों में गढ़ लेना । दूर कहीं निगाहों से रहकर, यादों की बांहों मे भर लेना । .... विवेक दुबे"निश्चल"@.. Read more

वो चिराग

बिखेर कर राख किनारों से । बुझ गए वो चिराग़ रातों के । रोशन शमा एक रात की ख़ातिर , दिन हुए हवाले फिर उजालों के । .... विवेक दुबे"... Read more

जीवन का माप

ना हर्ष रहे ना संताप रहे । बस "मैं" नही "आप" रहे । मोह नही नियति बंधन से , जीवन का इतना माप रहे । .... विवेक दुबे"निश्चल"@.. Read more

अहंकार

लज़्ज़ता छोड़ निर्लज़्ज़ता ओढ़ी । शर्म हया भी रही नही जरा थोड़ी । रहे नही शिष्ट आचरण अब कुछ , अहंकार की चुनर एक ऐसी ओढ़ी । ..... विवेक... Read more

सायली छंद

उन्मुक्त आकाश में , रिक्त कुछ आकांक्षाएं । भटक रहीं इच्छाएं । .... विवेक दुबे"निश्चल"@... Read more

सरल

सरल सदा ही तरल होता । बहता सा ही कल होता । मिल जाता वो सागर में , सफ़र वहाँ सफल होता । .... विवेक दुबे"निश्चल"@.. Read more

आज

आज इंसान ग़ुम हो रहा है । इतना मज़लूम हो रहा है । खा रहे वो कसमें ईमान की , यूँ ईमान का खूं हो रहा है । ..... विवेक दुबे"निश्चल... Read more

आदमी

विषय ... *बल* स्वयं को सँवारता आदमी । अन्य को बिसारता आदमी । थोथले दम्भ के बल पर , स्वयं को उभारता आदमी । आदमी को यूँ मा... Read more

वो निग़ाह

वो कोई अदावत नही थी । हुस्न से शिकायत नही थी । हुआ रुसवा जिस निगाह से , वो निगाह-ऐ-शरारत नही थी । .... विवेक दुबे"निश्चल... Read more

फ़ुर्सत

आज वो फुर्सत में नजर आते है । खुशियों के निग़ाह रंग सजाते है । समेट कर यादें गुजरे वक़्त की , यूँ वक़्त को अपना फिर बनाते है । .... Read more

निग़ाह

वक़्त ने वक़्त को समेटा था । नज्र पे नज्र का पहरा था । न थे राज निग़ाह में कोई , निग़ाह ने निग़ाह को घेरा था । .... विवेक दुबे"निश... Read more

अश्क़ आहों में

अश्क़ आहों में सजते रहे । इंतज़ार निग़ाह थकते रहे । वादा था न आने का मुझसे , यूँ वादे से हम मुकरते रहे । .... विवेक दुबे"निश्... Read more

माँ

जिंदगी उन्हें कभी हराती कैसे । साथ दुआएँ जो माँ की लेते । कदमों में उनके आकाश झुके । जिनके सर माँ के आशीष रुके । ..... विवेक दु... Read more

हल होगी

हर मुश्किल हल होगी । आज नही तो कल होगी । चमकेगा दिनकर फिर वहां , निशा जहां ख़तम होगी । ... विवेक दुबे"निश्चल"@.. Read more

अब्र कहे किससे

तू इतर नही मुझसे । क्यूँ बे-जिकर मुझसे । मैं धुँध है गुबार का , तू अब्र कहे किससे । .... विवेक दुबे"निश्चल"@.. Read more

मुक्तक

तीन मुक्तक--- 1... अतृप्ति यह भावों की । संतृप्ति यह हालतों की । आदि अनादि की परिधि से, सृष्टि चलती विस्तारों की । ... Read more

आईना

हर चेहरा शहर में नक़ली निकला । एक आईना ही असली निकला । लिया सहारा जिस भी काँधे का , वो काँधा भी जख़्मी निकला । .... विवेक... Read more

एक छोटा सा मुक्तक

==== जाते को , रोका किसने । आते को , टोका किसने । बहते रहे , लफ्ज़ हमारे , अश्कों को , सोखा किसने । .... विवेक दुब... Read more

इश्क़ राह

सिखाता रहा वो इश्क़ मुझे बार बार । गिरता रहा मैं इश्क़ राह बार बार । टूटता न था दिल उस संग की चोट से , होता रहा अपनी निग़ाह से जा... Read more

खर्च का हिसाब

खर्च का हिसाब न रहा । तेरा इतना इख़्तियार रहा । सम्हालता रहा लम्हा लम्हा , बे-इन्तेहाँ जो इंतज़ार रहा । ... विवेक दुबे"निश्चल"@... Read more

विश्व रंग मंच दिवस

यह जोकर सी ज़िंदगी । देखो कितनी संजीदगी । हँसती है हर दम हर दम, आँखों में छुपाकर नमी । .... विवेक दुबे"निश्चल"@.. व... Read more

ज़िंदगी

जिंदगी-ऐ-हक़ीकत में हँसना है मना । ख़यालों में ही मुस्कुरा लूँ मैं जरा । यूँ ही चलते चलते हो जाएगी फ़ना , ज़िंदगी बस तेरी एक यही र... Read more

चाहतें कैसी

ख्वाहिशों की चाहतें कैसी । हसरतों की अदावतें कैसी । पलकों की कोर से गिरते , अश्कों की आहटें कैसी । ... विवेक दुबे"निश्च... Read more

वक़्त जिया करता हूँ

हाँ लिखता हूँ मैं हाँ लिखता हूँ । ज़ीवन के कुछ सच लिखता हूँ । मैं दिल के साथ चलूँ कुछ ऐसे , हाँ बे-वक़्त *वक़्त* जिया करता हूँ ।... Read more

छल जाता जन

होने को बहुत कुछ होता है । जो दिखता वो कहाँ होता है । छला जाता जन हर बार ही , जो होता है वो कहाँ होता है । .... विवेक दुबे "... Read more

मिलते नही मुक़ाम

शिकायत शराफत बनी अब तो । अदावत इनायत बनी अब तो । मिलते नही मुकाम रास्तो के , रास्ते ही मंज़िल बनी अब तो । .... विवेक दुबे"निश्... Read more

चाह

मायूस सुबह ख़ामोश रात थी । अश्क़ से भरी हर आह थी । थे दामन में सितारे तो बहुत, चाँद की मगर मुझे चाह थी । .... विवेक दुबे"निश्च... Read more

पूछते हैं

चुरा कर अहसास मेरे , मुझसे अंदाज़ पूछते हैं । जज़्ब कर जज़्बात मेरे , मुझसे अल्फ़ाज़ पूछते हैं । .... विवेक दुबे"निश्चल"@... Read more

ज़िन्दगी

साथ होंसले हर दम न थे । ग़म ज़िन्दगी के कम न थे । ज़िन्दगी थी कदम कदम , ज़िन्दगी सँग हम न थे । .... विवेक दुबे"निश्चल"@.. Read more

बुत कह पुकारा उसने

शिद्दत से पुकारा जिसने । इल्म सा सराहा जिसने । गढ़ कर निगाहों से मुझे , बुत कह पुकारा उसने । .... विवेक दुबे"निश्चल"@.. Read more

तोहमतों से

कुछ शोहरत मिली तोहमतों से । कुछ मोहब्बत मिली अदावतों से । मगरूर न थी मगर ज़िंदगी मेरी , कुछ नजदीकियाँ मिलीं ज़िंदगी से । ... ... Read more

फाँसले कम न रहे

जागते तुम भी रहे। जागते हम भी रहे । दूर थे नही मगर , फाँसले कम न रहे । .... विवेक दुबे"निश्चल"@... Read more

ग़ुरबत उसकी

ग़ुरबत थी उसकी कुछ अपनी । निग़ाह यार क्यों बदल गया । रंग लगे थे फीके फीके सभी , हर रंग बैरंग उसे कर गया । ..... विवेक दुबे"निश... Read more

बेकार ही

बेकार ही वक़्त क्यों जाया होते है । कोई आए कोई नही आए होते है । गुजरते नजदीक से मेरे आपने ही , जाने क्यों वो नजरें चुराए होते ह... Read more

बंट रहा लहू

आज बदले से हालात हैं । नही रंग-ऐ-ज़ज्बात हैं । धर्म मजहब के नाम पर , बंट रहा लहू , जो साथ है । .... विवेक दुबे"निश्चल"@... Read more