विवेक आस्तिक,
पिता का नाम – श्री राम आसरे शर्मा,
पता -शाहजहांपुर ( उ.प्र )
सम्पर्क -9958017216
प्राप्त सम्मान/पुरस्कार – कादम्बिनी राष्ट्रीय हिन्दी मासिक पत्रिका का युवा रचनाकार प्रोत्साहन सम्मान – दिसम्बर ( 2013)।
मुक्तक पुष्प , मुक्तक सम्राट व शीर्षक शिरोमणि सम्मान । युवा उत्कर्ष साहित्यिक मंच नई दिल्ली का श्रेष्ठ रचनाकार सम्मान व सारस्वत सम्मान।
दिव्यमान स्मृति सम्मान 2016।
नई दिल्ली में श्री बालकृष्ण शर्मा ‘ बालेन्दु पुरस्कार 2016 ।
युवा उत्कर्ष साहित्यिक मंच द्वारा सर्वश्रेष्ठ पुरुष रचनाकार सम्मान 2017।

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गीत- ' पहले तुमको चाहा था!

हाँ , पहले तुमको चाहा था! शशि सी तुम मुझको लगती थीं और तुम्हें लगता था दिनकर ! प्रथम बार जब दृष्टि पड़ी थी तुम भी विह्वल मैं ... Read more

दुर्मिल सवैया छंद

----दुर्मिल सवैया छंद ---- ...... रघुनाथ कहें समुझाइ सिया न चलौ तुम संग कछारिन मा। वन जीव भयंकर प्राणप्रिये! मग कंकर झार पहारिन म... Read more

दुर्मिल सवैया छन्द/// मनमोहिनि मूरति देखि रही

मटकी झटकी पटकी धरनी खटकी हिय मा दधि धार बही। तब खीझि गई बृषभानु लली झट जाइ यशोमति बात कही। पर पावन प्रेम गुँथी अइसी विपरीत भई उर प... Read more

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----------"भानू"-------(लघुकथा) भानू ........... भानु.......... शायद आप भानु सूरज को समझ रहे होंगे लेकिन ऐसा नहीं हाँ इसे कभी उगत... Read more

बेटा लेकर घूमता ( हास्य व्यंग )

----- हास्य व्यंग-----2/7/16 मैया भूखी मर रही,बप्पा भी बेहाल । बेटा लेकर घूमता, बीबी नैनीताल । बीबी नैनीताल , पहन भड़कीली साड़ी... Read more

कहीं लुटती शीला मुन्नी कहीं बदनाम होती है

भरी महफिल में' जा देखो जाम की शाम होती हैं । यहाँ लिव इन रिलेशनशिप की बात कुछ आम होती है। सुनो फिल्मों ने भी' तोड़ा है यारों दायर... Read more

वही पल - पल सताता है जिसे जितना भुलाता हूँ

बेवफा थी मगर उसके घर तक गया । मानकर प्रेम पावन शिखर तक गया । वो न समझी तो' इसमे खता क्या मेरी, आस दिल में जगा साल भर तक गया ।(... Read more

देख लो दोहे बिहारी के सभी जीवंत हैं

शब्द संयोजन, अटल आधार होना चाहिए । कम सही,थोथा नहीं,कुछ सार होना चाहिए । देख लो दोहे बिहारी के सभी जीवंत हैं, जो लिखो दिल से ... Read more

नवबर्ष गीत

गीत - - - - - - - - ---'''-------- नवबर्ष का इस तरह आधार हो । प्यार ही बस प्यार ही बस प्यार हो । ••••••••••••••••• पुष्प, चन्द... Read more

बसा परदेश में आकर अकेला छोड़कर माँ को

(1)-दहल जाता हृदय हरपल करारी पीर देती है । उदासी मुख पे ' छा जाती नयन भर नीर देती है । बसा परदेश में आकर अकेला छोड़कर माँ को, सता... Read more