विवेक आस्तिक,
पिता का नाम – श्री राम आसरे शर्मा,
शिक्षा- डिप्लोमा इन मैकेनिकल इंजीनियरिंग, एमए हिंदी (नेट जेआरएफ हिंदी )।
पता – ग्राम- ताहरपुर , पोस्ट- चौहनापुर , जिला- शाहजहाँपुर ( उ.प्र. )
सम्पर्क -aastik333@gmail.com

प्रकाशित पुस्तकें (साझा संग्रह) – विहग प्रीत के , अथ से इति वर्ण स्तंभ , उत्कर्ष काव्य-संग्रह , किसलय, काव्य -त्रिपथगा ।
साथ ही कुछ पत्र-पत्रिकाओं में रचनायें प्रकाशित ।

प्राप्त सम्मान/पुरस्कार – कादम्बिनी राष्ट्रीय हिन्दी मासिक पत्रिका का युवा रचनाकार प्रोत्साहन सम्मान – दिसम्बर ( 2013)।
मुक्तक पुष्प , मुक्तक सम्राट व शीर्षक शिरोमणि सम्मान
दिव्यमान स्मृति सम्मान ,.श्री बालकृष्ण शर्मा ‘ बालेन्दु पुरस्कार ,
युवा उत्कर्ष साहित्यिक मंच द्वारा सर्वश्रेष्ठ पुरुष रचनाकार सम्मान 2017 , ट्रू मीडिया शिखर सम्मान , पर्पल पेन शब्दशिल्पी सम्मान , मेजर वीरेंद्र सिंह स्मृति सम्मान -2019।

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वार पीठ पर

सुख-सुविधा का वहम लपेटे इस मशीन को ठेल रहे हम! बॉलीवुड सा अभिनय करके अंदर-अंदर मरे हुए। पर्दा खींच रहा निर्देशक हम हँसते पर ... Read more

लुटता सालों-साल आदमी

एक लुटेरा सपना लेकर लुटता सालों-साल आदमी! गाँव छोड़कर नगर ओढ़कर दस गज घर में घुटता है। चौराहों पर भूख दबाए कुछ नोटों में बिकत... Read more

फिर से आग लगी है!

बुझने की उम्मीद थी , मगर फिर से आग लगी है! चंदन वन के पेड़ आँधियों से आपस में रगड़े। घास-फूस ,पत्तियाँ सभी ख़ुश देख-देख ये झग... Read more

धड़कन सुनना होता है

तन्हाई में सिर को धुनना होता है। दीवारों की धड़कन सुनना होता है। दुनिया वाले तो कीलें ही बोयेंगे , सखे! मार्ग तो ख़ुद ही चुनना हो... Read more

हर सड़क पर

हर सड़क पर कील बोते जा रहे हैं! देखिए हम सभ्य होते जा रहे हैं! तोड़ देना पुरुषवादी बेड़ियों को चाहते हैं तन सभी को हम दिखाएं। द... Read more

प्यास से व्याकुल परिंदे

जा रहे हो, ठीक है पर खुश रहो तुम , हम कोई वीरान मरुथल ढूँढ़ लेंगें। पाँव में जब फट रही होगी विबाई। भाव होगें सब हृदय के आतताई। ... Read more

जीभ के छाले कहेंगे

हम अगर कुछ कह न पाए जीभ के छाले कहेंगे । चीखकर दम तोड़ देंगी गाँव की पगडंडियाँ , हर मुहल्ले में मिलेंगी जमघटों की झंडियाँ... Read more

दीवारों के कान पक गए

पहले वाले मूल्य सभी हैं , चलते-चलते आज थक गए ! चौपालों के वक्षस्थल पर अद्धे -पौए झूम रहे हैं , मुखिया जी की चरण-पादुका चम... Read more

गीत- ' पहले तुमको चाहा था!

हाँ , पहले तुमको चाहा था! शशि सी तुम मुझको लगती थीं और तुम्हें लगता था दिनकर ! प्रथम बार जब दृष्टि पड़ी थी तुम भी विह्वल मैं ... Read more

दुर्मिल सवैया छंद

----दुर्मिल सवैया छंद ---- ...... रघुनाथ कहें समुझाइ सिया न चलौ तुम संग कछारिन मा। वन जीव भयंकर प्राणप्रिये! मग कंकर झार पहारिन म... Read more

दुर्मिल सवैया छन्द/// मनमोहिनि मूरति देखि रही

मटकी झटकी पटकी धरनी खटकी हिय मा दधि धार बही। तब खीझि गई बृषभानु लली झट जाइ यशोमति बात कही। पर पावन प्रेम गुँथी अइसी विपरीत भई उर प... Read more

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----------"भानू"-------(लघुकथा) भानू ........... भानु.......... शायद आप भानु सूरज को समझ रहे होंगे लेकिन ऐसा नहीं हाँ इसे कभी उगत... Read more

बेटा लेकर घूमता ( हास्य व्यंग )

----- हास्य व्यंग-----2/7/16 मैया भूखी मर रही,बप्पा भी बेहाल । बेटा लेकर घूमता, बीबी नैनीताल । बीबी नैनीताल , पहन भड़कीली साड़ी... Read more

कहीं लुटती शीला मुन्नी कहीं बदनाम होती है

भरी महफिल में' जा देखो जाम की शाम होती हैं । यहाँ लिव इन रिलेशनशिप की बात कुछ आम होती है। सुनो फिल्मों ने भी' तोड़ा है यारों दायर... Read more

वही पल - पल सताता है जिसे जितना भुलाता हूँ

बेवफा थी मगर उसके घर तक गया । मानकर प्रेम पावन शिखर तक गया । वो न समझी तो' इसमे खता क्या मेरी, आस दिल में जगा साल भर तक गया ।(... Read more

देख लो दोहे बिहारी के सभी जीवंत हैं

शब्द संयोजन, अटल आधार होना चाहिए । कम सही,थोथा नहीं,कुछ सार होना चाहिए । देख लो दोहे बिहारी के सभी जीवंत हैं, जो लिखो दिल से ... Read more

नवबर्ष गीत

गीत - - - - - - - - ---'''-------- नवबर्ष का इस तरह आधार हो । प्यार ही बस प्यार ही बस प्यार हो । ••••••••••••••••• पुष्प, चन्द... Read more

बसा परदेश में आकर अकेला छोड़कर माँ को

(1)-दहल जाता हृदय हरपल करारी पीर देती है । उदासी मुख पे ' छा जाती नयन भर नीर देती है । बसा परदेश में आकर अकेला छोड़कर माँ को, सता... Read more