Vivek shrivastava

Gwalior

Joined August 2018

Sub editor in Rajasthan patrika gwalior

Books:
Kavita & kahani published in many magzin

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मोहब्बत

मुझे मोहब्बत का सिला नहीं मिला जिसे चाहा वो दिलबर नहीं मिला आंसुओं से भर गई जिंदगी मेरी कोई आंसू पोंछने वाला नहीं मिला ज... Read more

सास-बहू

आज फिर छिड़ी है सास बहू में जंग घर घर का है यही प्रसंग घर के सदस्यों का एक दूसरे से हो रहा मोह भंग लेकिन मुझे उस दिन का है इंत... Read more

जख्म

इस जख्म को हरा रहने दो यह मुझे कमजोरी बताता है आगे मुझे क्या करना है इसका हमेशा बोध कराता है जिंदगी के कठिन रास्ते कैसे कर... Read more

मां से अनुरोध

मुझे मत मारो, मैं जीना चाहती हूं मां यदि तुम मुझे जन्म लेने दोगी तो मैं तुम्हारा जीवन भर दुंगी खुशियों से तुम्हारे जीवन की बगिया ... Read more

तुम रहनुमा हो मेरे

सदियों से हम साथ हैं फिर क्यों मन उदास है तुम रहनुमा हो मेरे फिर क्यों नहीं है खुशी जिंदगी कहां ठहर गई, क्या रह गई है कमी तुम रहन... Read more