V.k. Viraz

प्रयागराज(इलाहाबाद) गाँव धुमाई

Joined May 2020

समाजहित में लिखना ही मेरा धर्म है और मैं आशा करता हूँ कि मेरे द्वारा रचित कविताएँ सभी पाठकों को पसन्द आएँगी तथा उनके जीवन को एक सही मार्ग की ओर अग्रसर करेंगी।

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【{बेटियों की उड़ान}】

कृपालाल एक मजदूर है जो कबाड़े का काम करके अपने बीवी,बच्चों का भरण पोषण करता है उसके घर मे उसकी बीवी के अलावा उसकी दो बेटियां हैं जो ... Read more

【मानवता धँसती जाएगी】

मानवता और अधिक जमी में धँसती जाएगी। बस्ती इंसानों की जैसे जैसे और बसती जाएगी। बढ़ती जाएगी क्रूरता और प्रेम भावना घटती जाएगी।... Read more

बदल गई ये दुनिया प्रभू

है प्रभू तूने कैसी ये सृष्टि रचाई। किसी के दुःख किसी के ख़ुशी हाँथ आई। ज्ञान के तेरे सब भवसागर आज हुए धरासाई। छोड़कर स्नेह की... Read more

[[ संगदिल सनम ]]

बड़े दूर के मुसाफ़िर हैं जरा आराम लेने दो। मंज़िल भी ढूंढ लेंगे जरा हाँथ उनका थाम लेने दो। नही चढ़ती हमे किसी मैक़दे की दारू हम ख़ुद ... Read more

【फूटी क़िस्मत】

नही लिखी जाएंगी नज़्में कोई नही खाई जाएंगी कसमें कोई। सबकुछ छोड़ दिया हमने अब जब से है हमारी ज़िन्दगी रोई। हर बाज़ी हारते हि चले... Read more

(ख़्याल तुम्हारा)

ख़्याल तुम्हारा आता रहता है मुझे नींदों से जगाता रहता है। रह रह कर मेरे मन के भीतर दर्द सदा ये बढ़ाता रहता है। ख़्याल तुम्हारा आ... Read more

■【【हमे मानव मोल चुकाना है】】■

प्रेम के पथ पे जाना है मन उपवन में पुष्प खिलाना है। दिखा के सब पे दया दृष्टि हमे मानव मूल चुकाना है। सो चुकी जो मानवता दिल मे... Read more

{【मुश्किल】}(एक पथ प्रदर्शक)

जीवन मे जितनी भी मुश्किलें आती हैं। राहें मंजिलों के उतनी ही क़रीब पहुँच जाती हैं। इनसे घबराकर पीछे चलने वालों को कुछ हासिल न... Read more

【【मज़दूर】】

एक सुकून की तलाश में निकले थे अपनों से मिलने की फ़िराक में निकले थे। मालूम न था सफ़र अधूरा रह जाएगा रास्ते भी मज़दूरों के ख़िलाफ़ में... Read more

}}सड़क{{【【एक राही】】

बन सड़क चल बेधड़क रुक न किसी मोड़। *** मेहनत ख़ुद रंग लाएगी तु क़दम बढ़ा पुलजोर। *** अनसुना कर बातों को जो खींचे पीछे की ओर। ... Read more

कोरोना

हरि हरि की गुहार कर भगवान को पुकार कर मानव आज चीख़ रहा मृत्यु निकट जान कर। मंदिर में कर पूजा पाठ गलती अपनी सुधार रहा कैसे निप... Read more

समय अभी निकला नही है

समय अभी निकला नही है ********************* पछता न अपनी करनी पर जो भूल हुई सो भूल जा। माथा टेक के बैठ न फिर से मन मे जोश जगा क... Read more

भविष्य

साथ समय ने जब दिया तब ख़ास कुछ भी किया नही। व्यर्थ गवांते रहे वक़्त को ध्यान भविष्य पर दिया नही। घूमना फिरना काम रहा चर्चों में... Read more

दुःख की घड़ी

(दुःख कि घड़ी) ************ चिंता को दूर कर भय के मायाजाल से बाहर निकल। ये दुःख की घड़ी है प्यारे जल्दी ही तेज़ हवा की भांति ये भी... Read more