V.k. Viraz

प्रयागराज(इलाहाबाद) गाँव धुमाई

Joined May 2020

समाजहित में लिखना ही मेरा धर्म है और मैं आशा करता हूँ कि मेरे द्वारा रचित कविताएँ सभी पाठकों को पसन्द आएँगी तथा उनके जीवन को एक सही मार्ग की ओर अग्रसर करेंगी।

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// क़िस्मत //

तन्हाईयाँ भी तन्हाइयों को रास नही आतीं। कुछ तो खता होगी वर्ना काली घटाएँ यूहीं उजालों के पास नही आती। मंज़र यूहीं नही बदलता ब... Read more

●【--मैं क़तरा ज़मी का--】●

चमक चहरे पे मग़र दिल मे दर्दों के साए रहते हैं। मैं ज़मी का ऐसा क़तरा हूँ जिसके सर पे सदा बादल छाए रहते हैं। एक पल भी सुकूँ का ... Read more

कम में भी ज़िन्दगी चल जाया करती है।

चिंगारियों से भी आग जल जाया करती है, छोटेबदलावों सेभी ज़िंदगी बदल जाया करती है। ज़्यादा की तमन्ना हर बार अच्छी नही हो... Read more

■///【बदलता दौर】■

दौर उल्फ़त का ख़तम हो गया है। मतलबी अबहर सनम हो गया है। पहले इंसानियत हीधरम था,अब पैसा सभी का मजहब हो गया है। कागज़ के नोटों... Read more

\लोग काम नही आते//

आदतों से लोग अपनी अब बाज नही आते। इंसानियत वाले लोग लोगों को रास नही आते। गुनगान करते हैं सिर्फ बुरी फ़ितरत वालो... Read more

\जलता नर्क है//

दुनिया की हर चीज़ में तर्क है बस सब के समझ मे फ़र्क है। किसी के लिए स्वर्ग है ये धरती तोकिसी केलिए जलता नर्क है। ... Read more

धूल भी कब्र बना देती है//

यादों में यार कि अब सारे दिन कटते हैं साँसों के प्यारे गुब्बारे हर रोज़ सिमटते है। मिट्टी कि नन्ही सी धूल भी कब्र बना देत... Read more

\कुछ गहरे घाव//

उभर आए हैं कुछ दर्दों के भाव नजऱ आए फिर कुछ गहरे घाव। टूटा है फिर दिल का सन्नाटा मेरे, है इस पर फिर यादों का दबाव। Read more

\ लोग भी अजीब हैं //

●●●●●●●●●●●●●●●●●●●● गुनाहों की गठरी सर रखे चलते हैं दूसरों को अच्छे काउपदेश देते हैं। अपनी तो रखते हैंसँभाल करसदा दूसरों की इज़्... Read more

::(लोग मतलबी)::

--------------------------------------------------- केवल धोका है सब यहाँ अपनों के नाम पर देता है ध्यान हर कोई बस अपने काम प... Read more

【■ हालात ज़िन्दगी के ■】

------------------------------------------ हालात इस क़दर बिगड़े हैं ज़िंदगी के पत्थर से ज्यादा टुकड़े है ज़िन्दगी के। सँभालना चाहा जिन... Read more

{【ब्याज़ पे मदद 】}

V.k. Viraz शेर Sep 23, 2020
अपनों से ही तो बस ,अपनीयता दिखाती है। दूसरों पर तो दुनिया मदद,ब्याज पे उठाती है। By vk viraz Read more

( नमकहरामी )

V.k. Viraz शेर Sep 23, 2020
# खून में सबके नमकहरामी ही तो है। दुनिया के पास दुनिया की बदनामी ही तो है। Read more

!!!! अंदरूनी लिबास !!!!

V.k. Viraz शेर Sep 23, 2020
कहाँ देखती है दुनिया अंदरूनी लिबास को। लत्तों से पहचानती है ये सबकी औक़ात को। By vk viraz Read more

!:::बुरी राहें चलना मत:::!

तारीफ़ों की आंच से पिघलना मत चिनगारियों से कभी जलना मत। बुरी राहें मंज़िल तक क्यों न जाएं, साथ उनके कभी तुम चलना मत। By-वि के ... Read more

((())) ग़मों के डेरे ((()))

घर के आगे मेरे भी ग़मो नेडेरे बहुत लगाए हैं। तुम्हारी ही तरह हमे भी कभी अपनों ने सताए हैं कभी ग़ैरों ने सताए हैं। इम्तिहान तो हम भ... Read more

||||◆लोग बहुत सारे◆||||

अपने शहर में रहते हैं लोग बहुत सारे, कुछ वक्त के सताए हुए कुछ अपनों के मारे। तिल तिल कर बिखरा है जिनका जीवन ये सारा, सहारों में ... Read more

●【नक़ाब हटाया जाए】●

चेहरों से नकाबों को अब हटाया जाए झूठ का सामना हक़ीक़त से कराया जाए। बहुत रह लिए दो मुए साँप बनकर क्यों न अब एक रूप में ज़िंदगी को बि... Read more

// रात //

ये रात भी क्या कुछ दे जाती है थके हुए इंसान को प्यारी नींद सुलाती है। चिंताओ के बोझ से भय मुक्त करवाती है ये रात भी क्या ... Read more

||●||साथी||●||

एक साथी बिछड़ गया है उसे ढूंढ रहा हूँ। खोज रहा हूँ पूछ रहा हूँ। यादों में उसकी तड़प रहा हूँ सिसक रहा हूँ। मिलने को उससे तरस... Read more

||{ कलम }||

कलम हूँ मैं कमाल हूँ। लिखता मै बेमिसाल हूँ। क्रांति की बौछार हूँ। लेखक की तलवार हूँ। सच्चाई की पुकार हूँ। समाज का सुधार ... Read more

■||तुम चलो हम आ रहे हैं||■

तुम चलो हम आ रहे हैं जरा दोस्तों से हाथ मिला रहे हैं। न जाने फिर कब मिल पाएंगे जिनको आज छोड़कर जा रहे हैं। काटी थी जिनके संग मस्त... Read more

【◆कभी दिल से हाल पूछा होता◆】

कभी दिल से हाल पूछा होता तो दिल से अपना हाल बताते हम। ग़म के कितने काँटे चुभे हैं हर किस्सा कह सुनाते हम। तुम तो बस यूं ही ख़ै... Read more

【●【मानव पर विकट संकट】●】

संकट तुझ पर विकट आ गया है, मानव तेरा अंत निकट आ गया है। भर गया अब,तेरे पाप का घड़ा पानी सर से अब ऊपर चढ़ा। बादल आख़िरी साँसों क... Read more

(पुरानी संस्कृति)

V.k. Viraz शेर Aug 19, 2020
बीते वक़्त के साथ-साथ तुम भी बदल जाना विराज़। वर्ना तो ये दुनिया पुरानी संस्कृति सी-तुम्हे भूल जाएगी। कवि-वि के विराज़ Read more

{¶【●मैं ग़ैरों का दुःख फिर भी बंटा रहा हूँ●】¶}

पता है के मै लूटा जा रहा हूँ। बाद इसके भी दोस्ती निभा रहा हूँ। कहीं पाता हूँ ख़ुद को ग़लत कहीं यारों को ग़लत पा रहा हूँ। डूबनी है न... Read more

©®°°°|||【दुनिया】|||°°°®©

आग-ऐ-शोलों पे चलाती है दुनिया हर काम मे टांग अड़ाती है दुनिया। सुनती नही किसी की कभी अक्सर अपनी ही अपनी चलाती है दुनिया। दूस... Read more

【■【जा फँसोगे】■】

कहाँ -कहाँ और किस-किस से बचोगे। तूफान से बचे तो बवंडर मे जा फँसोगे। रास्ता नही कोई बच निकलने का इनसे, नफ़रत से बचे तो मोहोब्बत म... Read more

**बुराइयाँ टिकने न देंगे**

V.k. Viraz शेर Jul 25, 2020
साँस जब तक रहेगी हम भी रिश्ते मिटने न देंगे। अच्छाइयाँ इस कदर बढ़ाएंगे बुराई टिकने न देंगे। विराज़ Read more

**प्यार व्यापार**

V.k. Viraz शेर Jul 25, 2020
रंग से लोग सच्चे प्यार नही करते। जिन्हें रूह की परख होती है वो जिस्मों का व्यापर नही करते। विराज़ Read more

**कुछ भी हो सकता है**

V.k. Viraz शेर Jul 24, 2020
ये दुनिया है कुछ भी हो सकता है। पल में ख़ुश कोई पल में रो सकता है। Viraz Read more

चैन हम् ढूंढ़ लाते

V.k. Viraz शेर Jul 24, 2020
चैन तो हम खुद ही ढूंढ लाते। हँसकर न सही तो रोकर ही सो जाते। Viraz Read more

**चाहतों का डेरा**

V.k. Viraz शेर Jul 24, 2020
चाहतों का डेरा भी जरूरी है। कुछ मेरा तो कुछ तेरा भी जरूरी है। विराज़ Read more

**चलन**

V.k. Viraz शेर Jul 24, 2020
वफादारी अच्छा चलन है चलाए रखिए। लाख बुराइयों में भी हुनर ख़ुद में ये बनाए रखिए। Viraz Read more

||【*त्याग*दो*】||

बुरी मनोस्तिथियों पर गोलियाँ अब दाग दो जिस चीज़ का असर बुरा हो उस चीज को अब त्याग दो। कटु वाणी पर न सुर न ताल न अब राग दो जिस ... Read more

कोरोना{_हाइकु_}

दुविधा भारी कोरोना महामारी बढ़ी लाचारी मुँह में मास्क दूरियाँ बढ़ गईं जां बच गई ठप हैं धंधे बढ़ी है भुखमरी जान की पड़ी Read more

【जसाला वर्ड पिरामिड विधा】

(1) हैं कुल मानव एक जैसा तो क्यों कुछ सुर और कुछ असुर बन बैठे ★■■★ (2) है जब तक ये जातिवाद न होगा ख़त्म इस पाव... Read more

【हम अलग नही】

न तुम अलग,न हम अलग हैं बस हमारा मज़हब अलग है। करते तुम भी पूजा ईश्वर की ही बस हमारा भजन तुम्हारी नमाज़ अलग है। जिसका हम व्रत र... Read more

**प्रभु अब अवतार लो**

घड़ा पाप का भर गया प्रेम बाग़ सब उजड़ गया। राक्षसों का खुनी मेला अंतिम चरण चढ़ गया। के मानवहित ख़ातिर प्रभु फिर नरसिंह रूप धार लो प... Read more

\// अंतिम प्रयास //\

फ़ौलाद भरा है सीने में तो हार कैसे मानु। जब जीत है मेरी मुट्ठी मे तो भेद शिकस्त का क्यों जानु। परिश्रम पर विश्वास करूँ मै न और क... Read more

**हाइकु**

नोच स्त्री देह_ साधारण मानव_ बना दानव! मन चिंतन_ देख इंसानियत_ का ये खंडन! हकीकत है_ बदलता कोन है_ ग़ैरों के लिए! Read more

।4।【दोहे】

(1)साथ समय के जो चले ,वो ही भरत उड़ान जो करे बरबाद इसे,बने न कभी महान"। (2)मन मे तीखा भाव रख,न मीठे कि आस कर जो चाहे मिल जाएगा... Read more

** हम लड़ेंगे **

बाजार की महँगाई से सत्ता की चतुराई से जीवन की हर कठिनाई से हम लड़ेंगे । हम बलिदानी वीर हैं सच्चाई के तीर हैं। लेकर जीवन को अप... Read more

■【(3) हाइकु】■

याद प्रीतम- मन करे विभोर- हो दुःख जोर! ********* प्रेम रुआता- ह्रदय को जलाता- दर्द बढ़ाता! ********* सावन बर्षा- न आई सवारिय... Read more

{● 【◆【अँधेरे अभी दिन तेरे हैं ] ◆】●}

अँधेरे अभी दिन तेरे हैं बढ़ जितना तू बढ़ सकता है। छा जा ज़मी आसमान तक ढक उजाले को तू जितना अभी ढक सकता है। है हाँथ नही कुछ भी मेरे... Read more

\** ||| फ़ौलादी ज़िगर||| **\

मन की व्यथाओं से जीवन की दुविधाओं से भी बाहर आया जा सकता है गर जिगर फ़ौलादी हो तो हर दोष मिटाया जा सकता है। चिंताओं को आग लगाग... Read more

◆【{{{ मै वहाँ नही जाऊँगा }}}】◆

उस शहर की ओर मै नही जाऊँगा। जहाँ बिकता है इंसान मै वहाँ नही जाऊँगा। उस गुलशन की ओर मै नही जाऊँगा। जहाँ टूटकर बिखर जाते हैं प... Read more

¶¶【हमे चलते रहना चाहिए】¶¶

दिन तो ढलता ही है उसे ढलते रहना चाहिए। कर्तव्य हमारा चलना है हमे चलते रहना चाहिए। सूरज तो जलता ही है उसे जलते रहना चाहिए। क... Read more

●{◆|◆ वो पुराने दिन ◆|◆}●

वो पुराना गाँव वो पुराने लोग वो बुजुर्गों का प्यार वो बड़ों का दुलार कहाँ खो गए। वो पुराना खेल वो अपनों से मेल वो पुरानी आपस... Read more

【बेटियों की उड़ान】

कृपालाल एक मजदूर है जो कबाड़े का काम करके अपने बीवी,बच्चों का भरण पोषण करता है उसके घर मे उसकी बीवी के अलावा उसकी दो बेटियां हैं जो ... Read more