Name- Vinay baali singh Belong to Ballia Disstt. U.P. Education – BA Gov. Servant , Head Constable in CISFPosted at Varanasi Airport.

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मूल्य, चुकाना पड़ता है।

है, बेशक बहुमूल्य, चुकाना पड़ता है। हर साँसों का मूल्य, चुकाना पड़ता है। निःशुल्क नहीं है कुछ भी प्यारे जीवन में , कुछ ना कुछ , समत... Read more

शौक से मरने चले है......

इश्क़ है हमको वतन से इश्क़ हम करने चले है। बांध कर सर पे कफ़न हम मौत से लड़ने चले है। तुम सियासी हो तुम्हारे साथ में धरने चले है, हम ... Read more

माटी है (((((((

जाने कैसी जग की ये परिपाटी है। जन्म जुदा पर अंत सभी का माटी है। सब कुछ खोकर तुझको पाता सोना था, तुझको खोकर जो पाया सब माटी... Read more

बोलूँ क्या ?

तुम बोलो, कुछ बोलूँ क्या ? राज हृदय का खोलूं क्या ? मन तुझको रब मान चुका है, मैं भी ... Read more

इश्क़ निभाया जाए।

रब की मर्जी अब कैसे ठुकराया जाए। अच्छा होगा हंसकर सब अपनाया जाए। नज़दीकी बीमार करेगी, बेहतर है- अलग-अलग ही रहकर इश्क़ निभाया जाए। Read more

मार देगी जिंदगी।

रास्तें हर बार देगी जिन्दगी। थक गये तो मार देगी जिन्दगी। दर्द में भी मुस्कुराने की अदा, आ गयी तो प्यार देगी जिन्दगी। कब... Read more

किधर जाओगे।

भागकर मुश्किलों से किधर जाओगे। कुछ कदम चल सकोगे ठहर जाओगे। डर गए जिन्दगी में अगर मौत से, मौत, आने से पहले ही मर जाओगे। Read more

नज़दीकी बीमार करेगी ((((((((

रब की मर्जी अब कैसे ठुकराया जाए। अच्छा होगा हंसकर सब अपनाया जाए। नज़दीकी बीमार करेगी, बेहतर है- अलग-अलग ही रहकर इश्क़ निभाया जाए। Read more

मुक्तक- मुश्किल है।

जीवन का ये सार समझना मुश्किल है। सांसारिक व्यवहार समझना मुश्किल है। कब तक साथ रहे, कब पीछे छोड़ चले, सांसो की रफ्तार समझना मुश्कि... Read more

नहीं करता तो अच्छा था......

निगाहों से कलाबाज़ी , नहीं करता तो अच्छा था। मुहब्बत में हमें राजी, नहीं करता तो अच्छा था। दिखाकर ख़्वाब आंखों को, बनाकर इश्क़ में ... Read more

कुछ बड़ा कीजिये ))))))))

खुद कि मेहनत से रुतबा खड़ा कीजिये। कद बड़ा हो न हो, दिल बड़ा कीजिये। मौत आएगी कुछ भी न कर पायेंगे- सांस है जब तलक कुछ बड़ा कीजिये। Read more

घर जाने की जल्दी है।

हरकत, बचकानी कर जाने की जल्दी है। जाकर गाँव ठहर जाने की जल्दी है। मस्त रहे, तब घर की चिन्ता किसको थी, आज सभी को घर जाने की जल्... Read more

और कब तक?

और कब तक ? जलजलों का डर रहेगा। और कब तक ? आदमी अन्दर रहेगा। खत्म , कब होगी लड़ाई मौत से- और कब तक? खौफ़ का मंज़र रहेगा। Read more

)))))) "राम" बने ((((((

राज तजे, जंगल जाकर 'जन' आम बने। त्याग, तपस्या, धर्म, दया का धाम बने। 'पुरुषोत्तम' बन जाना इतना सरल न था, राम तपे, वन-वन भटके, ... Read more

बिन 'माँ' के संसार अधूरा रह जाता।

अमृत से भरपूर सरोवर है 'माई'। कुदरत की अनमोल धरोहर है 'माई'। रिश्तों को रसदार बनाकर रखती है। 'माँ' ही घर में प्यार बनाकर रखती ... Read more

आराम से गुजरे.....

कुछ करो ऐसा की ऐहतराम से गुजरे। जिंदगी चार कदम तो आराम से गुजरे। लब्ज़ जब भी करें सफर कानों तक का, है दुआ, हर लब्ज़ तुम्हारे नाम ... Read more

सबरी के #राम

लघु कुटिया का ऐसे मान बढ़ाये "राम"। भक्त कि भूख मिटाने भूखे आये "राम'। लक्ष्मण घोर अचंभित होकर देख रहे, जूठे बेंर परोसे 'सबरी', ख... Read more

क्या चाहता है ?

जलाकर बस्तियों को घर बनाना चाहता है। खलीफा खौफ का मंजर बनाना चाहता है। हुई नाकाम सारी साजिशें तो आज कल, खुदा का नाम लेकर डर बना... Read more

अलग कुछ कहती है ।

दावों की तासीर, अलग कुछ कहती है। शहरों की तस्वीर, अलग कुछ कहती है। मजदूरों की, मजबूरी का दर्द अलग, मदिरा-लय की भीड़, अलग कुछ कहत... Read more

फिर जमाना मुस्कुराएगा।

साज छेड़ेगा, नया धुन गुनगुनायेगा। फिर जमाना मुस्कुराएगा.............। (१) फिर चलेगी रेल गाड़ी, फिर सड़क गुलजार होंगे। खेल के मैदान ... Read more

मुश्किल है।

जीवन का ये सार समझना मुश्किल है। सांसारिक व्यवहार समझना मुश्किल है। कब तक साथ रहे, कब पीछे छोड़ चले, सांसो की रफ्तार समझना मुश्कि... Read more

कुछ बड़ा कीजिये

कुछ, पुराने से 'घर' में नया कीजिये। 'कद' बड़ा हो न हो 'दिल' बड़ा कीजिये। 'शान' पाकर विरासत में क्या फायदा, खुद कि मेहनत से 'र... Read more

मुझे माँ याद आई है।

किसी उलझन में' उलझा हूँ, नहीं तो चोट खाई है। कही कुछ दर्द है शायद, मुझे माँ याद आई है। (१) बिना कारण भला ये आज कै... Read more

सियासत वो परिंदा है।

जहर पीकर भी जिंदा है, सियासत वो परिंदा है। सना है खून से दामन, घोटालों का पुलिंदा है। मदारी सा चुनावों में, नये करतब दिखाता है, ... Read more

"बिन तेरे"

बिन तेरे...मिल जाए सबकुछ, तो भी लगता कमतर है। बिन तेरे..........आँसू के बहने, रोने में भी अन्तर है। बिन तेरे..धड़कन से अपनी, अनब... Read more

गीतिका

दर्द जब-जब सताये, बढ़े प्रीत में। शब्द तब-तब हमारे ढले गीत में। जल गई कोर सारी हरी घास की, आग कैसी लगी माघ की शीत में। ... Read more

भारत की माता

तरलता भी रहे मन में, जिगर फौलाद हो जाये । बने गाँधी मगर कुछ तो, भगत आजाद हो जाये। यही बस चाह रखती है, सभी भारत की मातायें- विवेका... Read more