पता परिचय |नाम- विनोद कुमार
ग्राम- नोहरी का पूरा चायल कौशाम्बी (उ.प्र.) | शिक्षा – बी.ए.फस्ट इयर | हिन्दी उर्दू गज़ल, गीत छंद कविता भी लिखना | काव्योदय के दोनो साझा संकलन में मेरी दो गज़ल प्रकाशित हो चुकी है

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"मोहन से मिलने को आयी राधा मोहिनी"

"मनहरण घनाछरी छंद" काजल लगा के चक्षु,शशि रुप धरे हुये, मोहन से मिलने को,आयी राधा मोहिनी। लोचन से लोचन का,मिलन होते ही राधा, ना... Read more

फ़लक से चाँद किसी दिन जमीं पे लायेंगे

"गज़ल" मतला- जरा सा सब्र करो हम हुनर दिखायेंगे। फलक से चाँद जमीं पे किसी दिन लायेंगे। गुरुर कर न ए तूफान खुद पे तू इतना, तेरी... Read more

जीत कहानी है ये हार कहानी है

"गज़ल" जीत कहानी है ये हार कहानी है। कुछ स्याही है,बाकी तो सब पानी है। ऐ मेरे हमदम मुझको न कहो बूढा, साथ अभी तक मेरे याद पुरान... Read more

आँखो में चाँदनी है चेहरे पे सादगी है

मतला- आँखो में चाँदनी है चहरे पे सादगी है। तितली हवा नदी जैसी मेरी हमनशी है। माना कि बंद रखता है तू जुबान अपनी, पर राज सारे दि... Read more

दोहा

लालच की होती नहीं,जग में कोई थाह। जो इसमें जितना गया,उतना हुआ तबाह। होती है क्यूँ प्यार में,अक्सर ऐसी बात। जिसको दो दिल में जगह,करे... Read more