Vinod Chadha

Joined October 2016

Copy link to share

दिनचर्या से विराम

.....दिनचर्या से विराम..... जिंदगी की रोज की भाग दौड़ वो ही सूरज की पहली किरण से दिन का आगमन दिन भर धुप छाँव के बीच रोजी रोटी ... Read more

उड़ान

.....उड़ान..... जिंदगी की ऊंचाइयों को छू कर तो देख कुछ ख्वाब हसीं मिलेंगे तू उड़ कर तो देख यह अच्छा है तू जुड़ा है जमीन से... Read more

बहुत याद आते हैं

~~~बहुत याद आते हैं ~~~ कभी कभी बहुत याद आते हैं वो सुहाने दिन वो अटखेलियां, वो लड़कपन वो मस्ती, वो प्यारे ज़माने बचपन के क... Read more

जलाओ इनका भी रावण तुम

...जलाओ इनका भी रावण तुम... सदियों से जलाते आ रहे हो रावण तुम बुराई पर अच्छाई की जीत पर फिर भी न ख़त्म हुई बुराई और न ला सके ... Read more

उम्र गुजरी तो ख़ुदा याद आया

...उम्र गुजरी तो खुदा याद आया... उम्र सारी जोड़ता रहा, हसरतों का सिला उम्र गुजरी जो उस मोड़ से तो ख़ुदा याद आया करता रहा जी तोड़... Read more

~पहला जवाब~

मत छेड़, मत छेड़, कब से कह रहा था तुमसे बहुत दफा, प्यार से समझाया बड़े भाई होने का फर्ज निभाया दोस्ती का हाथ बढ़ाया लीक से हट ... Read more

~~~जज्बात~~~

इतने जज्बात निकलेँगेँ दिल से मेरे कभी सोचा न था सोने न देंगें चैन से रात भर मुझे कभी सोचा न था बयां कब तक... Read more

मूरत, भगवान और इंसान की

हे प्रभु, इंसान की बनाई मूरत है तेरी यहाँ हर मंदिर में तेरे जबकि हर शख्स जमीं पर इक नुमाइन्दा है तेरा तेरी कारीगरी का... Read more