मैं विनय कुशवाहा ‘विश्वासी’ देवरिया (उत्तर प्रदेश) का निवासी हूँ। मैं अभी कवि जैसा बनने की कोशिश कर रहा हूँ।

तीन साझा काव्य-संकलनों ( युगमंच,नवांकुर, मंजुल) में छोटा सा योगदान रहा है।

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अभी से चेत जाओ तुम

नदी के गर्भ से इतना, न लेकर रेत जाओ तुम। खजाना लूटकर ऐसे, न अपने केत जाओ तुम। पड़ेगी मार जब उसकी, मिले जीवन नहीं फिर से- ... Read more

आधुनिकता

आधुनिकता को लिए अब,क्या से क्या हम हो गये। देखकर बस लाभ अपना ,स्वार्थ में हम खो गये। खोजते हैं घूमकर हम, फल मुहब्बत का ... Read more

रिश्तों की अहमियत

घर तो हैं अब घर नहीं, सिर्फ ईंटों के मकान हुए। मिट रहे अब रिश्ते सभी, धन ही बस पहचान हुए। मोल-भाव शुरू हुआ है, ये रिश्त... Read more

इंसाफ कर दें हम

लगे हैं झाले जो दिल में,जरा सा साफ कर दें हम। करे गलती अगर कोई, उसे भी माफ कर दें हम। जिएँ इंसानियत खातिर, मरें इंसानियत खातिर ... Read more

विरह की वेदना

विरह की वेदना हम तो,कभी भी सह नहीं सकते। दबी है बात दिल में जो,किसी से कह नहीं सकते। अजब बंधन बना देखो, हमारे बीच दिल का ये- बि... Read more

उफ्फ ये गर्मी

हर दिन कैसे बढ़ रहा,सूर्यदेव का ताप। गर्मी से राहत नहीं,तन से निकले भाप।।६३। Read more

गर्मी से बुरा हाल

बढ़ा है ताप सूरज का, गगन से आग ही बरसे। भलाई है इसी में अब,कहीं निकलें नहीं घर से। जलाती है तपिश ऐसी, कि रेगिस्तान की राहें- मिले... Read more

दोहा

घर को अब सब आ रहे, छूटा उनका काम। पल-पल कदम बढ़ा रहे,लेकर हरि का नाम।।६२।। Read more

दूर हमसे जाते रहे

तुझे हम तो पाने के सपने सजाते रहे। मगर और भी दूर तुम हमसे जाते रहे। खता क्या हुई ये हमें तो पता भी नहीं- रुलाकर अकारण हमें तुम सत... Read more

नाक़ाफी इंतजाम

वादे सारे खोखले, सच में हैं श्रीमान। अब से भी कुछ कीजिए,बचा लीजिए जान।।६१।। Read more

राजनीतिक पाखंड

लड़ें आपस में सब नेता,मरा आँखों का पानी है। उन्हें चिंता नहीं जन की, फ़क़त बातें बनानी है। मुसीबत है खड़ी आगे,पड़ी उनको सियासत की- म... Read more

जाते हैं तो जाइए

आज का दोहा दिनांक - २०/०५/२०२० जाते हैं तो जाइए, लगी नहीं अब रोक। फिर मुड़कर मत आइए,कभी मनाने शोक।।६०।। विनय कुशवाहा 'वि... Read more

विवशता

हुईं विपरीत शुभ घड़ियाँ, गमों के मेघ छाये हैं। विवशता हो गयी ऐसी,सभी पर भय के साये हैं। हजारों मील की दूरी, नहीं वाहन मिले क... Read more

दोहा

रोजी खातिर वे गये, घर से अपने दूर। उनको अब रोटी नहीं,हुए सभी मजबूर।।५९।। Read more

पलायन का दर्द

ये कवि की लेखनी भी दर्द अब तो लिख नहीं सकती। बना है घाव जो तन पर, किसी को दिख नहीं सकती। बहुत निर्मम हुई सरकार हर सुविधा न... Read more

कोरोना योद्धा

लेकर सभी उर विशाल। माँ भारती के ये लाल। अब लड़ रहे देश के लिए, मिलाकर सब कदम ताल। चिकित्सक और सिपाही। बने हैं अब दोनों ह... Read more

गाँव की मिट्टी

हमारे गाँव में तुम भी, कभी तो घूमने आओ। हवा के संग बागों में, जरा तुम झूमने आओ। मिलेगी हर खुशी तुमको जहाँ भी पग बढ़ाओगे- ... Read more

आर्थिक पैकेज

भारी-भरकम घोषणा, लेकर आये नाथ। फायदा बस अमीर को,गरीब मलते हाथ।।५८।। Read more

कहाँ जा रहे हो?

मुझे छोड़कर तुम कहाँ जा रहे हो? कि दिल तोड़कर तुम कहाँ जा रहे हो? तुम्हें ही तो माना था बस एक अपना- यूँ मुँह मोड़कर तुम कहाँ... Read more

आशिक का दर्द

सजनी से मिलने चले,पैदल उसके गाँव। मिल तो हम पाए नहीं,उल्टे दुखते पाँव।।५७।। Read more

निजी विद्यालयों की खुली लूट

हर साल ही बच्चों की किताबें बदल रहे। बातें बनाकर कैसे सभी को ये छल रहे। कैसे खरीदे कोई महंगी किताब को - मासूम बच्चों के अ... Read more

एक और ग़ज़ल

ग़ज़ल(221 1221 1221 122) तरकश के अभी तीर न बेकार करो जी। मासूम दिलों पर न ऐसे वार करो जी। मैं आशिक़ हूँ सिर्फ तिरा ही इक जान... Read more

माँ

#मातृ_दिवस माँ तो ममता की मूरत है। चाहे कैसी भी सूरत है। जैसा सुख माँ के आँचल में। क्या है दूजा भूमंडल में... Read more

दूर जाने लगे हैं

न जाने वो क्यों दूर जाने लगे हैं। घड़ी हर घड़ी क्यों सताने लगे हैं। कभी रोज आँखें मिलाये थे जिनसे, हमें आज आँखे दिखाने ल... Read more

लौटते लोग

चले छोड़कर ये शहर अब सभी गाँव के लिए। विवशता में आये सभी इस घड़ी ठाँव के लिए। कठिन मार्ग पर धूप में चलने जैसे थी जिंदगी- सभी दौ... Read more

मुक्तक

सिर्फ़ ऐसे ही न बातें जाँ बनाया कीजिये। प्यार जो करते हैं हमसे तो निभाया कीजिये। हर समय आते हैं चलकर पास हम ही आपके- जाँ ... Read more

दोहा

बारिश ऐसे हो रही, जैसे भादों मास। गर्मी गायब हो गयी,सर्दी का है वास।।५६।। Read more

बेवफाई

वे प्यार के पंखों को कुतरने लगे। दिल के अरमान सारे बिखरने लगे। कल तक दिल के नजदीक थे उनके, अचानक ही हम इतना खटकने लगे।... Read more

मुक्तक

ये दौलत यहीं छोड़ जाते सभी। गरीबों को फिर क्यों सताते सभी। यहाँ की अदालत से बचते मगर - खुदा के भवन दंड पाते सभी। Read more

शराब की महिमा

ये शराब तो कितनों की बत्ती गुल कराती है। खर्चे भी अनगिनत ही ये फिजूल कराती है। जब चढ़ती है ये अपने असली शबाब पर तो,... Read more

शराब

लगे सभी कतार में शराब के लिए। जुटी है भीड़ देखिये ख़िताब के लिए। रसद ज़रूरी है कि ये ज़हर जनाब अब- मिले हमें न कोई भी जवाब... Read more

मुक्तक

इस तरह अब जाँ सताना छोड़ दो। हर घड़ी ये दिल जलाना छोड़ दो। मैं न जानूँ ये मनाने की अदा- रोज़ का तुम रूठ जाना छोड़ दो। Read more

हम बालक भोले-भाले हैं

हम बालक भोले - भाले हैं। चाहे गोरे हैं या काले हैं। है अपनी अलग सी दुनिया, हम जग में सबसे निराले हैं। छोटे - छ... Read more

मुक्तक

यूँ दिल के पाश से अब तो रिहाई हो नहीं सकती। करे कुछ भी जमाना पर जुदाई हो नहीं सकती। मैं हूँ तेरा, तू है मेरी, हकीकत है यही... Read more

दोहा

दिनांक - ०२/०५/२०२० पाती पढ़कर प्रेम की,खिला है अंग-अंग। सब कुछ है रंगा हुआ, चढ़ा है प्रेम-रंग।।५५।। विनय कुशवाहा 'विश्वासी'... Read more

मुक्तक

करोगे जो भला जग का तो खुद का भी भला होगा। दिलों के बीच भी तब तो बहुत कम फासला होगा। खपा दो जिंदगी अपनी सदा इंसानियत खातिर-... Read more

मैं एक मजदूर हूँ

मैं एक मजदूर हूँ। रोटी कमाने खातिर, घर से अपने दूर हूँ। नसीब नहीं सुख की नींदे, हालत से मजबूर हूँ। चाहे कोई काम कराना, हर काम ... Read more

मजदूर

हरदम रहें अभाव में,क्या पाएँ मजदूर। दुख उनके मिटते नहीं,रहते हैं मजबूर।।५४।। Read more

दोहा

खुद ही बनने को बड़ा, लम्बी लगी कतार। जो दिल रखे बड़ा नहीं, सभी जतन बेकार।।२।। Read more

प्रेम गीत

मैं तो रोगी हुआ जान तेरे प्यार में, अब आके खुद ही मेरा दवा कीजिए। तर-बतर हो गया है तन ये स्वेद से, अपने पल्लू से ठंडी हवा कीजिये।... Read more

दिल लगाकर तो देखो

2122 2122 2122 212 यूँ न जाओ दूर अब तुम,दिल लगाकर तो देखो। इश्क़ सच्चा है ये मेरा , आजमाकर तो देखो। तुम क्यों रखती हो इतना ... Read more

मजबूर मजदूर

चले वे सहर में ही शहर के लिए। रखे संग भोजन दोपहर के लिए। तलाशे थे वे दिनभर न रोज़ी मिला- चले खाली ही हाथ वे घर के लिए। Read more

मान के बदले मान

भला है या बुरा कोई न हम पहचान पाते हैं। किसी के दिल में क्या है चोर कब ये जान पाते हैं। बहुत ही जाँचे-परखे तो हमें भी ये... Read more

दोहा

होती है जग की यहीं , देख पुरानी रीत। हार के बाद ही मिले, खुशी भरा इक जीत।।१।। Read more

योजनायें

योजनायें भले बनी, देखो कई हजार। रहते हैं फिर भी अभी,गरीब बन लाचार। गरीब बन लाचार,उनकी न कोई सुनता। सभी बने बेदर्द, दुख कोई... Read more

मुक्तक

चेहरे से ये पर्दा हटा दीजिये। क्या है आपके दिल में बता दीजिये। देखिये इधर अब शर्म को छोड़कर, प्यार है अगर मुझसे जता... Read more

एक ग़ज़ल

एक ग़ज़ल (2122 1122 1122 22) प्यार में अब हम तो हद से गुज़र जायेंगे। गर मिली तू न हमें तो हम मर जायेंगे। एक तुम्हीं पर तो है... Read more

हर काम को विशेष करो

हर काम को विशेष करो मत बैठो बेकार यूँ ही किसी काम का श्रीगणेश करो, कोई काम न होता छोटा हर काम को विशेष करो। शुरुआत में हो... Read more