Vijay Mishra

Joined August 2016

मै विजय मिश्र अभंग शौकिया तौर पर कुछ स्वतन्त्र लेखन कर लेता हूँ !
हिन्दी साहित्य की अधिक जानकारी ना होने के कारण व्याकरण ,मात्रा
व भार मे कुछ चूक हो सकतीं है , कृपया इसे अनन्यथा ना ले !
जो थोड़ा बहुत भाव आते है उन्हे पन्नों पर उतारने का प्रयास मात्र है !

Copy link to share

अब लौट के न आऊँगा !

अब न गीत कोई प्रीत की गाऊंगा अब न दिल किसी का बहलाऊँगा ! खिलौना समझ कर तोड़ देते है वो अब न दिल किसी से मै लगाऊँगा ! तेरी ... Read more

देश की आवाज़

भारत देश महान हुआ और शक्तिवान ! अंतरिक्ष मे हुआ बड़ा नाम है वैज्ञानिकों पर हमे अभिमान !! ... Read more

जिंदगी का सफर

हँसते रहे मुस्कुराते रहे दिल को दिलों से मिलाते रहे ना रहे यहाँ जगह बैर भाव की ज़िन्दगी सितारों से झिलमिलाते रहे ! @ विजय ... Read more