तुम्हारी याद भीगी सी,

तुम्हारी याद भीगी सी, मुझे सोने नहीं देतीं शहद जैसी ये मीठी भी, कैरियों सी है खट्टी भी, कभी अल्हड़ किशोरों सी, समझदारी की पट्ट... Read more

मेरी सहेलियाँ

प्यारी सी सहेलियाँ बड़ी ही सुंदर बड़ी ही न्यारी ठीक वैसे कि जैसे होतीं, खूबसूरत सी तितलियां, हँसी सरस् है निर्झर जैसी पर झगड़े मे... Read more

इस होली पर चुनरी लाना

सुनो, मुझे फर्क नहीं पड़ता, कि लोग क्या कहेंगे, तुम तो ले ही आना, इस होली पर, अपने प्रेम रंग रंगी, चटक सी चुनरी, जिसे ओढ़कर, थ... Read more

हे ज्ञानेश्वरी माँ

हे ज्ञानेश्वरी मैया मेरे हृदय विराजो माँ, तुम शुभ्र वस्त्र धारिणी,तेरी हंस सवारी माँ, है धवल रूप तेरा सबसे ही न्यारा माँ, तुम कलु... Read more

वैधव्य

वैधव्य का अर्थ , सिर्फ एक जीवन का अंत नहीं, वैधव्य बताता है कैसे धकेला जाता है, जीवन को मृत्यु की ओर, कैसे बदला जाता है , चमचमा... Read more

ये कैसे डर के साये में जी रही हैं बेटियां

-ये कैसे डर के साए में जी रही हैं बेटियां यूँ तो सौभाग्य से आती हैं बेटियाँ, कहते हैं किस्मत साथ लाती हैं बेटियाँ। किस्मत बदकिस्म... Read more

मैं श्रृंगार न लिख पाऊँगी

मैं श्रृंगार न लिख पाऊँगी मैं श्रृंगार न लिख पाऊँगी, प्रिय मेरा पथ कंटक है, पथरीला भी भयंकर है, उर में तेरे गुंजित होने, मैं झं... Read more

संस्कारों की घुट्टी

बचपन से ही, पिलाई गयी थी घुट्टी, संस्कारों के नाम की, एक अच्छी लड़की , विकसित हो सके मुझमें, भले ही खुद को भूल जाऊँ मैं, मेरी र... Read more

पाषाण प्रारब्ध

राम क्या तुम वापस आओगे, देख रही हूँ तुम्हारा रास्ता , पाषाण बन कर अब भी, जड़ हो चुकी हूँ फिर से, क्या चैतन्य कर पाओगे, झुलस गया ... Read more

पतंग

क्या अर्थ तुम्हारी छटपटाहट का, नहीं कर पाओगे कैद मुझे, विचरण करूंगी नील गगन में, उन्मुक्त अपने पंखों के दम पर, ईश्वर ने दिए हैं ... Read more

कभी करुणा कभी निर्भया

कभी करुणा,कभी निर्भया, कभी सोनाली कभी दामिनी बन, हर बार आती हो, एक नया रूप धारण कर, दिखाने आइना, हमारी विकृत सोच का, इंसान से ... Read more

तुम साथ दोगे अगर

......................... चलो ले चलूँ, अपने शब्दों को, सकारात्मकता की ओर, तुम साथ दो अगर, चल पड़ेंगीं कविताएँ भी, अमावस से पूनम... Read more

जितनी बाहर चहल पहल है

जितनी बाहर चहल पहल है, उतना भीतर एकाकी मन, रिश्तों से जब दर्द ही मिलता, खुद में सिमटे बैरागी मन। उम्मीदों का बढ़ते जाना, कष्ट सद... Read more

कुछ बात तो है मेरे भी मन में

कुछ बात तो है मेरे भी मन में, पर उमड़-घुमड़कर लौट जाती है वापस, जैसे हवा बहा ले जाती है, काली बदली को बिन बरसाये, बहुत पसंद है मुझ... Read more

उस माँ का लाल अब लौटेगा नहीं

ए भोर मुझे दे दे थोड़ी सी उजास, बाँट दू वहाँ जहाँ सिर्फ अँधेरे बसते हैं, कि अँधेरे से उपजी सिसकियाँ डराती हैं बहुत, थोड़ी सी चमक और... Read more

मेरा तुमसे नाता इतना

5-मेरा तुमसे नाता (The bond between us) मेरा तुमसे नाता इतना, मैं गागर हूँ तुम हो पानी, मैं मरूथल की रेत सी तपती, तुम मेघों से... Read more

चलकर देखो साथ प्रिये

-है संकोची मेरा मन , ( My heart hesitates) तुमसे कुछ ना कह पाये, प्रिय समझो तुम व्याकुलता, दृग प्यासे ना रह जाएं। अधरों पर मुस... Read more

सुनो राम अनुज

सुनो राम अनुज , अब मत खींचो लक्ष्मण रेखा, मेरे चारों ओर, सीता भी नहीं रह पायीं, सुरक्षित इस रेखा से, मैं कैसे रह पाऊंगी, मत बा... Read more

मैं सीता नहीं बनूंगी

सीता नहीं बनूंगी हां ये तय है, मैं सीता नहीं बनूंगी, राम को मन में धारूंगी, पर अग्नि परीक्षा में, चरित्र का प्रमाण देने, स्व... Read more

क्यों न करती मैं जीवन अर्पण

क्यों न करती मैं जीवन अर्पण (Why shouldn't I devote my life) भर लो अपने अंक में , उतर जाओ प्राण में भी, तुम ही मेरी स्वांस हो,... Read more

अंश ब्रह्म का जीव में जैसे

2-अंश ब्रह्म का जीव में जैसे (A part of god in a soul) तुम सरसों के पीले फूलों से, खिल जाते हो शरद ऋतु में, तुम सूरज की किरण सुन... Read more

भूख

जो नहीं मिटा पाता पेट की भूख, भूख मिटा देती है उसको, भूख और जीवन की लड़ाई में, कई बार ऐसा होता है, जीत जाती है भूख हार जाता है जी... Read more

करो मित्रता कृष्ण द्रोपदी सी

बनो तुम मित्र बेशक, मित्रता से नहीं परहेज मुझे, जोड़ो एक नेह का बंधन, करो मित्रता कृष्ण द्रोपती सी, साझा करेंगे हम अपने विचार, स... Read more

बेटियाँ हैं पराई दोहराया गया

कितने नाजों से बेटी को पाला गया, प्रेम से सींचा और संभाला गया। लो आ गयी निष्ठुर विदाई की घडी, गले मिलके कितना रुलाया गया। आँख भर... Read more

गुरुत्वाकर्षण

गुरुत्वाकर्षण नियम कहता है, चीजें गिरने के बाद जमीन पर आती हैं, यह नियम लागू नहीं होता, आज के दौर के इंसानों पर, क्योंकि आज का म... Read more

जल

बचपन में पढ़ा था जल भिगोता है, शीतलता देता है, जल का अर्थ अब कुछ भिन्न सा, नहीं दिखता जल अब नदियों में, सूखे तालाब पोखर और मन के... Read more

उमड़े घुमड़े क्या मेरे अन्तस्

1उमड़े घुमड़े क्या मेरे अन्तस् उमड़े घुमड़े क्या मेरे अन्तस, मैं कुछ भी समझ न पाऊं, कौन हिलोरें लेता मुझ में, कौन शांत सा हो जाता है... Read more

इमरोज

मैं भी चाहती हूँ, तुम इमरोज़ बनो, मेरे लिये, मैं अम्रता नहीं बनूंगी पर, कभी नहीं उकेरा जाएगा, तुम्हारी पीठ पर, किसी साहिर का ना... Read more