Varsha Jain

Joined September 2017

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मुझ में तुम हो तुम में मैं हूँ

दिल के कोने में हसरतों को छिपा कर न रखना बातें जो भी हों उसे साझा जरूर करना बड़ी तकलीफ देती हैं अनकही बातें तुम इस बात को जरा समझन... Read more

शब्द

मन की अभिव्यक्ति का सहज माध्यम होते हैं शब्द कटु कठोर और कड़वे हों तो चुभते हैं शब्द बिगड़ते रिश्तों को बनाते और बनते रिश्तों को बि... Read more

जवानी

अनकहे अहसासों की गुदगुदाती कहानियाँ अनजान छुअन से जग उठने वाली सिहरन बार-बार खुद को सवांरने की तलब बात-बात में कातिल मुस्कान की च... Read more

अजन्मी चीख

नवरात्री में पूजी जाती है दुर्गा नारी के नौ रूप में विराजती है दुर्गा नवरात्री में ही पूजी जाती है कन्या फिर क्यों कोख में मारी ... Read more

बचपन

विश्वास भरे कदमों की आहट है "बचपन" जिज्ञासा भरी सोच का नाम है "बचपन" निश्वार्थ, निर्मल मन की उत्तम परिभाषा है "बचपन" छल, द्वेष, ... Read more

अमर नाथ हमला.....एक विनम्र श्रद्धांजलि

हे भोलेनाथ हे अविनाशी हे आशुतोष हे भालचंद्र ये कैसा विध्वंश छाया है तेरी ही बनाई धरती पर तेरे ही बनाये लोगो ने कहर ये कैसा ... Read more

प्रियतम

मेरे एकाकी जीवन में बनकर आये बहार हरितम प्रीतम तुम घेर दिया एक सिंदूरी परिधि में और सिंदूरी हो गया मेरा जीवन मुझ पर पड़ी बारिश ... Read more

वजूद

एक ही पटरी पर दौड़ती जिंदगी रोजमर्रा की जद्दोजहद से गुजरती जिंदगी खो सा गया है अस्तित्तव कहीं औरत हूँ बस यह याद है..... स्वतंत्... Read more