Uttam Tekiwal

Joined January 2017

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अपने होने का अहसास

मैं ढूँढ रहा था जिसे अंतरिक्ष के उस पार या सांसों से भी करीब अंतर्मन के आस पास क्यों विचलित करती है मुझे शांति की यूँ बढती प्... Read more

स्त्री

:::: स्त्री :::: एक कोमल सी कलि बन खिलती है वो सुगंध सी, मिठास सी घुल मिलती है वो मुझे गुमान है अपने मर्दाने अस्तित्व पर स... Read more

तुम मेरी कविता

तुम मेरी कविता -------------------- जब मन का तालाब दर्द की बारिश में सराबोर हो कर रिसता रहता है आँसू बन कर, हर बूँद में ढल कर ... Read more