उमा शर्मा

Kaithal

Joined January 2017

आकाश से ऊँची, धरती सी महान हो…
है एक ही तमन्ना कि पूरा मेरा अरमान हो…
ए क़ाश कभी दुनिया में मेरी भी पहचान हो…
छोटे से शहर कैथल में जन्मी-पली-बढ़ी और आरोही मॉडल स्कूल, जल्लोपुर में अंग्रेजी की प्राध्यापिका के पद पर कार्यरत हूँ। अपनी कल्पनाऒं को उड़ान देना और भावनाओं को शब्दों में पिरौना मुझे रूचिकर है।

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माँ

बैठकर मेरे सिरहाने, नींद मीठी सी सुलाने थपकियां देती रही। दुख के कांटे खुद सहे मुझको दी खुशियों की लड़ी। मुश्किलें आई तो, थी तेरी ... Read more

मां

बैठकर मेरे सिरहाने, नींद मीठी सी सुलाने थपकियां देती रही। दुख के कांटे खुद सहे मुझको दी खुशियों की लड़ी। मुश्किलें आई तो, थी तेरी... Read more

बेटियाँ तो बाबुल की रानियाँ हैं

मन का मृदंग हैं, भाव हैं, तरंग हैं, कल्पनाओं की पतंग हैं निर्झर, निर्मल, नेह भरी, ये वात्स्ल्य पूर्ण रवानियाँ हैं फिर भी बोलो आखिर... Read more

बेटियाँ तो बाबुल की रानियाँ हैं

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