Uma jha

Joined April 2020

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दूर करो माँ सघन अंधेरा

दूर करो माँ सघन अंधेरा, जाने आया किस काल द्वार से, महाप्रलय, अट्टहास- अहंकार से, विध्वंस नृत्य किया घनघोर, क्रंदन, विलाप करत... Read more

टिप्पणी

टिप्पणी करना गए हम भूल , दिखा जब भावों का शूल । हमने तो परिहास किया, सम्मुख जन को व्यंग्य शब्द कुछ खास लगा । चले फिर शब्दों क... Read more

शिशु और चंद्रमा

एक नन्हा शिशु सोया था, माँ के आँचल में खोया था । स्व चेतना में भरकर उमंग, खेल रहा था नव उदित चंद्रमा के संग । अनायास पड़ोसन द्... Read more

जातक कथा

शिव की थी मैं अति प्यारी, नाम हमारा उमा कुमारी । सुनाऊँ मैं अपनी जातक कथा, मत कहना है मनगढा । धरती की एक तपस्विनी नारी, शिव से बेट... Read more

सत्युक्ति

जहाँ ज्ञान वहाँ गुरू है, जहाँ धुंध वहाँ आग, जहाँ जीवन वहाँ नीर है, जहाँ जीव वहाँ मात, भले दिखाई पड़े नहीं... Read more

भारत वंदना

Uma jha गीत Jul 5, 2020
अखण्ड भारत, सुर-सर तारक, कण-कण शायद धारक, जग करे अर्चना, अछि शब्द खंडित, वाणी कुंठिलत करु कोना माँ अराधना । सप्तसिंधुनी, जंब... Read more

शौर्य उद्घोष

चेत धरा के रिपु समस्त! यह हिन्दुस्तान नहीं, जम्बूद्वीप का अभियान है । हम सत्य अहिंसा के परिचायक, शान्ति धरम के हम हैं नायक, ... Read more

फूल सी बच्ची

थी वह एक फूल सी बच्ची, मृदुल कोमल भाव की सच्ची । पिता से पाया था बस देह, मिला नहीं कभी मन का नेह । बेटी बनना उसके लिए था अभिशाप... Read more

पराक्रम

वह भुजबल ही क्या, भुजबल है, बंदी पर कहर प्रहार करे। वह साहस ही क्या साहस है मूर्छित का गर्दन काट चले । भुजबल की चाह अगर है तो,... Read more

चल हवा तू चैलते चल

Uma jha गीत Jun 13, 2020
चल ,हवा तू चैलते चल, चल,हवा तू चैलते चल, निर्भीक चित सौं जतौऽ जइहैं, गाछ- पात सौं नेह लगविहैं, हम छी गुड्डी, संगे- साथ, डऽरै ... Read more

स्वर संधि व्याख्यान

दो स्वर वर्णों की होती जब युगलबंदी, तब ही दिखती स्वर संधि । नवम, नागेन्द्र, बसुधैव, हिमालय, हैं कितने किसलय स्वर संधि के आलय । ... Read more

कविता

होगा कब मेरे जीवन का भोर, कब फैलेगी सुख-शांति युक्त इंजोर। थी जो अपनी छाया,प्रतिक्षण रहती साथ, चली वह भी ,देख अंधियारी में छोड़ ... Read more

जाग जाग हे-- - -

जाग जाग हे परशुराम, छोड़ो अब चिर ध्यान । बिन तेरे त्रासद है जनता, पिंजर बंध पड़ा निर्बोध विहंगा, तरप रहा जल रहित भांति मीन, ... Read more

तू ज्वाला की तिल्ली हो

तू ज्वाला की तिल्ली हो, चाहो तो जीवन भस्म करो , या जन- जन में ज्योति का संचार करो, विपदा आए राह अगर, ग्रास करो बन कर मगर, ... Read more

रिसेप्शन

कल दीपक भैया की शादी हुई थी ।अगले दिन रिसेप्शन होने वाला था ।दीपक भैया हमारे मंझले भाईजी के पक्के मित्र थे ।जिस कारण उनका हमारे घर आ... Read more

कर्म बड़ा या भाग्य बड़ा

कर्म बड़ा या भाग्य बड़ा, हे मनुज तु सोच जरा, जो नर भाग्यशाली होते हैं, सुख शांति का सोमरस पीते हैं, जग के सदा करणीय वो ही होते, ... Read more

चिड़िया रानी

दूर गगन की चिड़िया रानी, आकर पीलो थोड़ा पानी । दाना चुगते लगेगी प्यास, कहाँ भटकेगी दूर आकाश, बिन पानी क्या जीवन का आस, तन मन ... Read more

मेरी लेखनी कहती मुझसे

मेरी लेखनी कहती है मुझसे, शब्द लिखो फिर सूझबूझ से , लिखे शब्द में होती इतनी क्रांति, छिन्न-भिन्न हो जाती दिशा भ्रांति , माना... Read more

पराधीन

सत्य कहा है तुलसीदास, पराधीन होने से उत्तम है वनवास । अधीनस्थ रहने वाले ही होते दोषी, स्नेह, सहानुभूति कहाँ कहलाते परपोषी। हो... Read more

जब लिखती हूँ मैं कविता

जब लिखती हूँ मैं कविता, पग नूपुर नहीं, कंठहार नहीं गहनों से होती श्रृंगार नहीं, होती है शब्दों की रुनझुनता , जब लिखती हूँ मैं ... Read more

तुम्हारा ही पुकार है

अखण्ड दीप ज्योत्सना, प्रकाश दिव्यमान है, धरा में अंधकार है, तुम्हारा ही पुकार है तुम्हारा ही पुकार है ,तुम्हारा ही पुकार है ... Read more

30वाॅ राज्य

सब मोदी की ही करते जय जयकार, किन्तु मैं दूं धन्यवाद विपक्षी तुम्हार । तुम सब मिलकर ही कीचड़ बनाया, देश के सोए जनता को झकझोर जगाय... Read more

मजदूर की करुणा

हे ईश्वर तेरी माया के आगे, विवश पड़े मजदूर अभागे। थे रहते जब अपने गाँव, गुंडा गर्दी के मुख चढते दाँव। गाँव गाँव धनवानों की रहती... Read more

माँ बनना है कितना सुन्दर एहसास

माँ बनना है कितना सुन्दर एहसास, जब तक न मिलता नारी को संतान सुख, घर-परिवार सर्व समाज रहते विमुख। जाने किन किन बातों से करते तीक... Read more

मैं विपदा - - -

मैं विपदा की हूँ तरंग, जिस ओर चलूँ, जिस ओर मुरूँ, कायर की न भांति चलूँ, तनिक टूटते मेरे तन, कर देती मैं अंग भंग, राहों की ... Read more

हे जन्मदात्री करूँ क्या तुझको अर्पण

हे जन्मदात्री करूँ क्या तुझको अर्पण, तु पीपल की छाया हो माँ , तु आदिशक्ति की काया हो माँ, प्रकृति की हो हर दशा मनोरम, परब्रह्... Read more

बुद्धि विवेक में कितना अंतर

बुद्धि विवेक दो शब्द हैं सुन्दर, है पर दोनों में कितना अंतर । बुद्धि सदा स्व हित का जपता मंतर, विवेक होता परहित का बड़ा समंदर ।... Read more

वसुधैव कुटुम्बकम्

करना है जो कर लो मानव, पर मत भूलो अपना उद्यम । इस जग के हैं बस हम पंछी, जाने कब किधर उड़ चलेंगे हम। क्यो सोच रहे हो यह मेरा, वह है ... Read more

काली रजनी

आज खिला कितना सुन्दर चांद, छुप गया अंधेरा जा निज मांद। काली रजनी बनी मन मतवाली, पी कर मदिरा भर भर प्याली । है छिटपुट तारों का ... Read more

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पढ लिख कर भी जीवन बेकार, मूर्खों को आज ढूंढ रही सरकार । है सच कोरोना के मारे से, हुआ अनेक जन बेरोजगार । सबको पर रहा, आज यहाँ प... Read more

होती जब घमासान वर्षा की कहर

दुबक दुबक कर बैठे सब अपने घर, होती जब घमासान वर्षा की कहर । समय समय पर बिजली कड़की, शांत चित वाली धरती भी धड़की, बादल गर्जना कर... Read more

शराब की दुकान (व्यंग्य व्यंजन )

सरकार से मिला एक फरमान, खुलेगी अब शराब की दुकान । नेता को आया सोते जागते सपना, शराब पीने वालों को न होते कोरोना । जो मदिरा पीक... Read more

दुविधा

संघर्षपूर्ण है मेरा जीवन, विश्वनाथ नगर की गलियों मे, एक तरफ है माँ का आँचल, एक तरफ कर्तव्य खड़ा है, है दुविधा अब मेरी, किसक... Read more

मानव की चिढ

तुझे मिली हरियाली डाली, मेरी प्रकाशयुक्त कोठरी भी काली। यह जग है मेरा साम्राज्य, हर छायाप्रति पर दिखे तुहीं आज । तुझे देख होत... Read more

मेरी कविता - - (व्यंग्यात्मक )

कहूँ क्या लाॅकडाऊन की प्रभुताई, कुहर-कुहर कर होती कविता की भरपाई । पहले दिन एक में लिखते कविता चार, चार दिन भी आज एक में हुआ ब... Read more

अर्थ बिना जीवन बेकार

गुरूजी पुस्तक कांख दबाए, भूखे पेट अश्रुधार के मारे, जा पहुंचे धनपति के द्वार । मुट्ठी भर दाना दे कर, साथ कई शर्त लगाकर, किया... Read more

जीवन आशा

दुविधा छाई यदि समृद्ध आकाश, उसकी शक्ति, अपनी भक्ति का है विश्वास , निश्चय ही समृद्ध होगा अच्युत प्रकाश, शाश्वत सत्य मानव का हो... Read more

मैं गुड्डी मन की मतवाली

घटा भी मुझसे पूछे, कहो क्या राह तुम्हारी, हवा भी मुझसे पूछे, चलूँ क्या साथ तुम्हारी, खगवृंद मुझसे पूछे, बन जा तू सखिया हमा... Read more

तु है कौन - - ?

सुन रे गगन विशाल, संग सुनो धरती पाताल, तू खड़ा देख रहा क्यों मौन, मेरा जना पुत्र पुछ रहा तू है कौन? अपना रक्त पिलाया जिसको,... Read more

जागृति

चिंता एक मध्यवर्गीय परिवार की लड़की है ।वह लड़की के रुप मे जन्म लेती है इसलिए उसका नाम चिंता रखा गया ।और दूसरी ओर हर्षित करने वाला, पु... Read more

मेरी संस्कृति

स्वर्ग लोक से अवतरित हुई थी तुम उस दिन, काली रजनी के बेरी में बंध चुके थे अरुणबिन्द । था जीवन की धरती पर हाहाकार भरी हे! तृष्णा, ... Read more

बेगूसराय की हार - - - - - ?

बेगूसराय की हार हुई, या प्रकृति की अदृश्य मार पड़ी । कभी जल से भरा था यह क्षेत्र, आज बन गया क्षणिक इत्र, हम कैसे हैं स्वार्थ... Read more

आखिर लोग गरीब ---------??

किसी नगर में एक राजा था । उसका स्वभाव, कहा नहीं जा सकता है कि वह कैसा था? उसके राज्य में प्रजा का जीवन यापन हो रहा था । ... Read more

वो है संस्कृति

जिस बालिका को मेने जनम दिया, वह है संस्कृति वह है संस्कृति वो संस्कृति है, वो चंचल है मधु गुंजन वन की गुंजरी है, बाल... Read more

प्रगति बन गई प्रकृति की सौतन

भाव भंग लिपटी एक अलबेली, अवतरित हुई प्रगति नार नवेली । करने मानव को निज ओर आकृष्ट, तरल स्नेह की करती हुई वृष्टि । अनुजा भान प... Read more

जाग जाग हे परशुराम

जाग जाग हे परशुराम, छोड़ो अब चिर ध्यान । हो रहा सनातन धर्म विध्वंस, गीदर की खाल में दिख रहा असंख्य कंश, मानव बन कर भी दानव की... Read more

शिशु - - -

हे जग के पालनहार जन्म देकर तू क्या किया, स्नेह सुधा गंग धार, बिन बताए मुझसे छीन लिया, मिलना था, माँ का आंचर नंगी धरती पर त... Read more

जाग उठी धरती की ज्वाला

जाग उठी फिर से धरती की ज्वाला, देख द्रोही होता अब क्या होने वाला । क्रांति की आंधी जब चलती है, सहस्र शिव की तांडव दिखती है । ... Read more

बाल श्रमिक

फटे अधर, नयनाश्रु लिये कहा बालमन, सुन माँ धरणी, सुन पिता गगन । है क्या मेरा निर्छिन्न अपराध अपार, श्रमिक पांत खड़ा हूँ विवश लाचा... Read more

महात्म्य ऊषणोदकस्य

Uma jha दोहे Apr 20, 2020
राम सिया राम सियाराम जै जै राम सुनहु समाज जन सब कोई, ऊषणोदक सम् प्रीत नहि होई। राम सिया राम सियाराम जै जै राम। जिस दिन चाय प... Read more