UPENDRA SINGH ALOK

DIGHWARA

Joined September 2018

ऊँचा कद, दुधिया-गेहुआ रंग, कद-काठी के धनी, स्वभाव से मृदुल व शांत, हृदय में व्यवस्था के प्रति विद्रोह आदि एक साथ मिलकर व्यक्तित्व का बोध कराता है।
किशोरावस्था से साहित्य के प्रति लगाव एवं झुकाव । कवि कंठ इंटरमिडिएट कक्षा से फूटा। दिनोंदिन साहित्य प्रेमी के हृदय मे स्थान बनाने की ललक से कहीं अंतरात्मा की बेचैनी को आवाज देना मेरी साधना रही है।

Books:
A GLIMPSE OF ENGLISH GRAMMAR AND TRANSLATION

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हाइकु

एक जाति बँटेगी , सरकार बनेगी, देश डूबेगा ।। दो मंत्री जी बन, फिर पशुचारा खा, लोकतंत्र ला ।। तीन परीक्षा होगी, ... Read more

अभिनंदन

उनको मेरा अभिनंदन ।। दिया जिन्होंने अस्थि काट कर, मानवता हित अंग छाँट कर धड़कन में थी प्यार ... Read more

तन्हाई

चाह थी आँखों की जो वर्षों पुरानी, आज उसको खा गई तेरी नादानी । हाय! दिल दुहरा नहीं सकती कहानी, देख अरमा बन गई है आज पानी, हसीन ... Read more

परिचय

मेरा जनम हुआ है इस वतन के वास्ते मेरा जीना मरना है इस वतन के वास्ते । मेरा हबीब वतन है मेरा नसीब वतन, मेरी शान... Read more

नारी तेरा उद् बोधन......संबोधन!

मैं नारी हूँ, सृष्टि का सृजनहार ! मैं इड़ा भी हूँ और श्रद्धा भी हूँ . मैं सारस्वत प्रदेश की देवी... सरस्वती. जिसकी गोद में सभ्यता ने... Read more

अहसास के आईने में

फूल तुझको दिया हर धड़कन के लिए, मुझको काँटे मिले हैं चुभन के लिए. प्यार ही प्यार दामन में सजता रहे, मैं मचलता रहा उस सपन के लिए... Read more

कुंडलियाँ

वोटतंत्र की मार से, लोकतंत्र लाचार. जनता व्याकुल पीस रही, फैला भ्रष्टाचार. फैला भ्रष्टाचार, मार जनता ही खाती. संसद सेवा विमुख, वि... Read more

कुंडलियाँ

एक प्रजातंत्र की लूट है, लूट सके तो लूट. अंत समय पछताओगे, पार्टी जाएगी टूट.. पार्टी जाएगी टूट, फूट जब दल में होगा, रह जाएगा हा... Read more

चंद असआर कलमकारों के नाम

ज़माना जब जुबाँ वो जिस्म पे पहरे बिठाता है, बगावत कर गुजरने को कलम तब बोल उठती है. सियासत और सियासतदारों की अब बात क्या कीजै, ब... Read more

शायर

विवश किया है लिखने को कुछ मौंसम की अंगराई ने, और अपनी तनहाई ने कि "बसंत आ गया है." मधुवन के मंजर भींने कहते, कहते भौंरों के... Read more

स्वागत गीत

स्वागत है आपका, दर पे हमारे आए. पलकें बिछाई हमने,धड़कन भी गीत गाए. दर पे आप आए, जैसे कि चाँद आए, गुलशन बहारे लाए, हर गुल्ची खिल... Read more

सरस्वती वंदना

जय वाणी, वर दे कल्याणी. शोभित है वीणा पाणी में, सुधा बरसती है वाणी में, दानी है ... Read more