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आओ , मिलकर वृक्ष लगाएँ

चलो .....,कुछ अच्छा करते हैं सब मिलकर ,कुछ अच्छा करते हैं ले आओ कुछ बीज वृक्षारोपण करते हैं चलो ..कुछ अच्छा करते हैं वट ,प... Read more

गुलमोहर

सडक के उस पार गली के छोर पर हुआ करते थे दो गुलमोहर ... बडे़ मनोहर लगते थे मुझे जब लद जाया करते थे फूलों से ...... Read more

मानवता

मानव , कहाँ छुपी है तेरी मानवता शायद दब गई है मन के किसी कोने में तेरी इच्छाओं ,महत्वाकांक्षा के बोझ तले आगे निकलने ... Read more

बाल दिवस

मन करता है चलो आज मैं , फिर छोटा बच्चा बन जाऊँ खेलूं कूदूं ,नाचूँ ,गाऊँ उछल उछल इतराऊँ मन करता है... खूब हँसूं मैं... Read more

माँ

ममता की छाँव जीवन की नाव स्नेह की मूरत प्यारी- सी सूरत सिखाती है बुनना सपनों को वो ... Read more

ठूँठ

हाँ ..... ठूँठ हूँ मैं आते-जाते सभी लोग लगता है जैसे चिढ़ाते हुए निकल जाते मुझे भेजते लानत मुझ पर कहते... Read more

तपती दुपहरी..

जेठ की इस तपती दुपहरी में हाल -बेहाल पसीने से लथपथ जब काम खत्म कर वो निकली बाहर घर जाने को बडी़ गरमी थी ... Read more

उम्मीद...

न जाने किस उम्मीद मेंं पथराई आँखें रोज़ टकटकी लगा देखा करती बंद दरवाज़े को निरंतर...... इक आस है अभी भी... Read more

उड़ता पंछी

मैं , उड़ता पंछी दूर -दूर उन्मुक्त गगन तक फैलाकर अपनी पाँखें उड़ता हूँ कभी अटकता कभी भटकता पाने को मंजिल ... Read more

सवेरा

उठो ,जागो मन हुआ नया सवेरा आ गए आदित्य लिए आशा किरन नई रमता जोगी गाए मल्हार झूम रहे खग वृंद नाच... Read more

जिंदगी

जिंदगी क्या है ? समझ न पाई कभी लगती है कभी अबूझ पहूली सी कभी प्यारी सहेली सी कभी खुशनुमा धूप सी कभी बदली ग़मो... Read more

दीपावली

लो आई फिर दीपावली चलो ,इस बार मन के किसी कोने में दीप जलाएं इक शांति का , प्रीती का , स्नेह का ... Read more

मेरा बचपन

वो बस्ता लेकर भागना सखी सहेलियों से कानाफूसियाँ भागदौड में चप्पल टूटना नाश्ते के डब्बे कपड़ो पर स्याही के धब्बे ... Read more

पिंजरे की मैना

पिंजरे की मैना ये किसे सुनाये दास्ताँ दिल की कितनी खुश थी पेड़ों पे वो दिन भर चहकती रहती थी इस डाल से उस डा... Read more

दूसरा पहलू

देखा पलट के पीछे की ओर था नज़ारा वहाँ कुछ और होठों पे थी मुस्कान जैसे ओढ़ी हुई उस के पीछे छुपा दर्द भ... Read more

मन

उड़ चल रे मन कर ले अपने सपनों को पूरा देखे थे जो तूने कभी मत देख आसमाँ को बन्द कमरे की खिड़की से चल,बाहर निकल ... Read more

फर्क

बंगले में रहने वाली मेमसाब से पूछा महाराज ने आज क्या बनेगा ? पालक पनीर या शाही पनीर बिरियानी और खीर ? मे... Read more

संज्ञा

जी हाँ, संज्ञा हूँ मैं। व्यक्ति या वस्तु? कभी-कभी ये बात सोच में डाल देती है रूप है, रंग है आकार भी है दिल ... Read more

रिश्ते

बडे़ अजीब होते हैं रिश्ते कुछ बने बनाए मिलते हैं तो कुछ बन जाते हैं और कुछ बनाए जाते हैं स्वार्थ पूर... Read more

लोग

बंद किवाड़ो की दरारों से झाँकते लोग दीवारों से कान लगाकर कुछ सुनते -सुनाते लोग लगाकर उसमें नमक -... Read more

बंधन

रक्षा का बंधन बंधन अनोखा शहद में भीगा मीठा-मीठा रसीले आम सा जिसमें भरा है जीवन रस ... Read more

झूला

एक वृक्ष कटा साथ ही कट गई कई आशाएँ कितने घोंसले पक्षी निराधार सहमी चहचहाहट वो पत्तों ... Read more

वक्त

ये तो वक्त -वक्त की बात है कभी मिलता है ,तो कभी मिलाता है कभी खा़मोश सा बैठाता है कभी कहकहे लगवाता है तो कभ... Read more