सच्ची कसम

कोरोना काल के दौरान लॉक डाउन में जब कुछ सख्ती कम हुई तो ग्वाला मुन्नालाल की पत्नी ने उससे कहा ' देखो अब खुला दूध लोग कम ले रहे है... Read more

दैनिक आहार योजना

एक दिन एक पादरी साहब ने मुझे एक हिंदी में अनुवादित पवित्र पुस्तक बाइबल की प्रति भेंट की । जब मैंने उस पुस्तक के प्रथम पृष्ठ को खोला... Read more

लॉक डाउन ( तालाबंदी )

ऐसे लॉक डाउन ( तालाबंदी ) के अवसर किसी की पूरी जिंदगी में शायद ही कभी कभार आते हैं , जब ये हमें ज़िन्दगी की आपाधापी से दूर आत्माााव... Read more

जो मैं ऐसा जनता

बात उन दिनों की है जब मैं रानीखेत में नियुक्त था , वहां की खूबसूरत वादियों में स्थित अस्पताल के चारों ओर बड़ा मनोरम दृश्य था दूर तक ... Read more

मैं जानती हूं

वह युवती पिछले तीन-चार माह से एक बुजुर्ग वृद्ध जिनकी उम्र लगभग 75 - 80 साल की रही होगी को लेकर मुझे नियमित रूप से दिखाने आती थी । म... Read more

न में हां

वह कई बार इलाज के लिए मेरे पास लाया जा चुका था ना ही उसकी बीमारी ठीक हो रही थी और ना वह अत्यधिक शराब पीना छोड़ रहा था । मेरी सलाह व... Read more

प्रारब्ध

एक बार मैं वाराणसी से गोरखपुर के लिए बस में बैठ कर चला तो उस बस के परिचालक ने जो 10-12 सवारियां बैठी थी उनसे पैसे ले लिए और टिकट की ... Read more

प्रश्न वही आयाम कई

प्रायः हर कोई किसी भी डॉक्टर से अपने मरीज के बारे में यह प्रश्न जरूर करता है कि डॉक्टर साहब हमारा मरीज ठीक तो हो जाएगा ? यही प्रश... Read more

जोरूं का गुलाम

उस दिन आईसीसीयू में मैं अपने प्रातः कालीन राउंड के समय जब उस 93 वर्षीय वृद्ध के पास उसको देखने के लिए पहुंचा तो वह बिस्तर पर कान में... Read more

हीरा देवी

उस दिन जो सांवली सी अधेड़ उम्र की मरीज़ा स्टूल पर मेरे सामने नील कमल की कली जैसी अपनी बड़ी बड़ी आँखों सहित एक भावहीन चेहरा लिए एक प... Read more

मुमताज़

संस्मरण उस शाम वह अपने पति के साथ फिर मुझे दिखाने आई वही उदास सा चेहरा अधेड़ उम्र और तमाम लक्षणहीन तकलीफ़े बताने लगी - यहां दर्द वहा... Read more

छोड़ने को बीड़ी हमने कही थी ......

पता नहीं कभी कभी लोग मेरी बात को इतनी गम्भीरता से क्यूँ ले लेते हैं । यह बात उन दिनों की है जब में कानपुर में sr ship कर रहा थ... Read more

मारने और मरवाई का फर्क

संस्मरण मारना आसान है मरवाई भारी है यह बात उन दिनों की है जब मैं चिकित्सा अधिकारी के पद पर तैनाती के दिनों में होली से दो-तीन... Read more

जो होता है होने दो

नाम पात्र समय एवं स्थान काल्पनिक है एक बार मेरी अधेड़ मरीजा जब कई बार घबराहट और छाती में दर्द के लिए भर्ती होने आई और उसके साथ ए... Read more

मैं केवल आज में जीता हूं

मैं केवल आज मैं जीता हूं मेरे सुधी पाठक यदि आज तुमने इस पेज का आद्योपांत पठन किया तो इस निष्कर्ष पर स्वयं पहुंच जाओगे कि जीवन दर... Read more