गीत,नवगीत,गीतिका,ग़ज़ल विधा में लेखन एवं पत्र पत्रिकाओं में प्रकाशन।

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भूख चली पीहर

सूनी आँखों में सपनों की अब सौगात नहीं चीख, तल्खियों वाले मौसम हैं,बरसात नहीं। आँख मिचौली करते करते जीवन बीत गया सुख-दुःख ... Read more

महमहाई रातभर

झूमती डाली लता की महमहाई रात भर । शाम ढलते ही मदिर सी गन्ध कोई छू गई नेह में  डूबी हुई सिहरन जगी फिर से नई प्यास  अधरो... Read more