काजल की लरी बना हूँ मै आँखो मे छिपना सीख जाऊँगा,
इक पल मे उतरा जेहन मे दिल मे भी उतरना सीख जाऊँगा….
……………
न कोई शायर , न कोई कवि न कोई संगीतकार हूँ
शौक है, सुकुन मिलता है , ऐ कविता तुझे इसलिए लिखता हूँ

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हे माँ मुझे सुला दे मै सोना चाहता हूँ....

हे माँ मुझे सुला दे मै सोना चाहता हूँ तेरी ममता के आँचल का कोना चाहता हूँ हे माँ ! मुझे सुला दे मै सोना चाहता हूँ मखमल के गद... Read more

हे माँ मुझे सुला दे मै सोना चाहता हूँ

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हो सकता तुम मुझसे बेहतर जानते हो....

हो सकता है तुम मुझसे बेहतर जानते है क्या सही है गलत है पहचानते हो, बहुत कहते हो तुम अपने हो अपने हो...मोनू क्या दिल से तुम मुझ... Read more