त्रिभवन कौल

दिल्ली

Joined November 2017

श्रीनगर (जम्मू कश्मीर ) में 01 जनवरी 1946 को जन्मे त्रिभवन कौल एक दुभाषिये लेखक-कवि हैं। अंग्रेजी और हिंदुस्तानी लेखन में इनको महारत प्राप्त है। हिंदी और अंग्रेजी भाषा में इनकी रचनाओं का प्रकाशन अभी तक 39 पुस्तकों में हुआ है जिनमे 5 स्वरचित , 15 हिंदी साझा संकलन और 20 अंग्रेजी साझा संकलन शामिल हैं। अपने पिताश्री बद्रीनाथ कौल के दिल्ली में सेवारत होने के कारण इनकी शिक्षा दीक्षा भी दिल्ली में ही हुई. तेरह वर्ष की आयु में ही इन्होने ‘ नन्हे मुन्नों के रूपक’ से बच्चों के लिया एक पुस्तिका लिखी. स्कूल , कालेज और भारत सरकार के एक उपकर्म वायुसेना में कार्यरत की अवधि में अनेक बार अपनी रचनाओं के माध्यम से इन्होने कई पुरस्कार और प्रशंसा पाई. इनकी कई कविताएँ ,कहानिया, आलेख, समीक्षाएं काव्यसंग्रहों, पत्र पत्रिकाओं में समय समय पर छपती रही हैं Iयह साहित्यक होने का दावा नहीं करते पर इनके कहने के अनुसार प्रत्येक लेखक /कवि का अपनी बात रखने के एक ढंग होता है I कविता किसी भी प्रकार की क्यूँ न हो, किसी भी विचारधारा को प्रकट क्यूँ न करती हो, असत्य नहीं होती Iहाँ उस सत्य को दर्शाने के लिए कल्पना का सहारा एक आवश्यक साधन बन जाता है. उनकी अधिकतर रचनाओं में, चाहे गद्य हों या पद्य , किसी भी विधा में लिखी गयी हों, उनमे समकालीन एवं तत्कालीन घटनाओं का समावेश होता है. जो कंही न कंही यथार्थ से जुडी होती हैं.

Books:
प्रकाशित पुस्तकें :-
(हिंदी ) नन्हे मुन्नों के रूपक, सबरंग , मन की तरंग , बस एक निर्झरणी भावनाओं की
प्रकाशित साझा संकलन :-
(हिंदी ) :-‘लम्हे’, ‘सफीना’, काव्यशाला , सहोदरी सोपान-2 , स्पंदन , कस्तूरी कंचन , उत्कर्ष काव्य संग्रह (प्रथम ), विहग प्रीती के , पुष्पगंधा , ढाई आखर प्रेम, उत्कर्ष काव्य संग्रह (द्वितीय), अथ से इति स्तम्भ – वर्ण पिरामिड , शत हाइकुकार साल शताब्दी. काव्य सुरभि, संदल सुगंध

Awards:
प्रमुख सम्मान :-
सम्मान पत्र/ इंडियन रेड क्रॉस सोसाइटी , सुल्तानपुर (उप) द्वारा 08 मई 2018
ट्रू मीडिया गौरव सम्मान -2017
”आचार्य रामचन्द्र शुक्ल सम्मान” 2017/ युवा उत्कर्ष साहित्यक मंच
ट्रू मीडिया साहित्य सम्मान 2016 /ट्रू मीडिया समहू
आगमन साहित्य सम्मान 2016 /आगमन साहित्यक और सांस्कृतिक समूह
सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ सम्मान 2016/युवा उत्कर्ष साहित्यक मंच
पिरामिड भूषण 2016 /सुप्रभात मंच
साहित्य भूषण सम्मान 2015 /युवा उत्कर्ष साहित्यक मंच
कवितालोक रत्न सम्मान 2015 /कवितालोक
सम्मान पत्र 2015 /विश्व हिंदी संस्थान , कनाडा।
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अन्य सम्मान :-
अन्य प्राप्त सम्मानों की सूची लम्बी होने के कारण यहाँ नहीं दी जा सकती। सादर।
संपर्क :-
(M) 9871190256
kaultribhawan@gmail.com

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मंथन

आयु के अंतिम पड़ाव पर एक छोर पर खड़ी एक ज़िन्दगी इतिहास बनने को उत्सुक दुविधा में पड़ी मंथन कर रही है क्या दिया है उसने सं... Read more

मुक्तछंद काव्य का शिल्प विधान

“मुक्त छंद का समर्थक उसका प्रवाह ही है। वही उसे छंद सिद्ध करता है और उसका नियमारहित्य उसकी 'मुक्ति"।“ ................................ Read more

नया युग, नयी औरत

नया युग, नयी औरत ----------------------- क्रोध भरी नज़रों से न देखो मुझे दोष का भागीदार न बनाओ मुझे तुमने प्यार को समझा सौदा या क... Read more

प्रेम का तीसरा रंग

वह छत की बालकनी के कोने के पास खड़ी थी। उसके घर की छत हमारे घर की छत से केवल 15 फीट दूर थी। बीच से गुज़रती एक छोटी गली दोनों घरों की... Read more

गलती

गलती (लघु कथा) --------------------------- वह स्मार्ट लड़की वाटस्प पर चैट कर रही थी। बन्दे ने बैग बर्थ के नीचे र... Read more

भारत मेरा महान

" हिन्दू पाकिस्तान ! " "हिन्दू तालेबान !" बड़बोलों का देश बना यह भारत मेरा महान ? एक "पड़ोसी अच्छा " कहता ! दूजा " जाओ पाकिस... Read more

मेरी गौरैया

मेरी गौरैया बच कर रहियो यहाँ दरिन्दे आम हैं ना उनके बेटी ना उनकी बहना उनका संगी ‘काम’ है । पहन मुखौटे तरह तरह के सब को ... Read more

सूक्ष्म कथायें : १-५

सुक्ष्म कथा -5 -------------- चौक पर 200 भारतीय युवक युवतियों का जमावड़ा था। नेता सरीखे कुछ युवकों ने इशारा किया। चौक नारों से गू... Read more

पच्चीसवीं लड़की

२३ वर्षीय राधिका ने समाचार पत्र खोला और चाय की चुस्कियों के साथ विज्ञापन का पृष्ठ पढ़ने लगी। उसकी दृष्टि एक पांच पंक्तियों के विज्ञ... Read more

फेसबुकया प्यार

तृष्णा ने लैपटॉप खोला। स्टार्ट स्विच दबाया तो उसके समक्ष उसीकी एक मनमोहक अंदाज़ में खींची गयी तस्वीर प्रस्तुत हो गयी। तस्वीर को देख ... Read more

नव विवाहिता

मादक धरती मादक अम्बर मादकता से भरपूर चमन मादक कर्ण की लौ भी है मादक होंठों का प्यारा मिलन मदमस्त फ़िज़ा मदमस्त पवन मदमस्... Read more

इंद्रा ताई

क्षमा ने मोबाइल पर मिस काल देखी तो माथे पर हाथ मार लिया। फिर व्हाट्स अप खंगाला। इंद्रा ताई का बुलावा आया था। उसने जल्दी से आफिस का ... Read more

काव्यशक्ति

काव्यशक्ति क्या है ? यद्दीपी भिन्न भिन्न साहित्यकारों के इस पर भिन्न भिन्न विचार हो सकते हैं पर एक आम आदमी की दृष्टि से देखा जाये तो... Read more

बलात्कारी आईना

केला को होश आया तो अपने को अधनंगी हालत में पा कर रोने लगी। बलात्कारी हंसने लगे। मोबाइल दिखा कर और ऊँगली होंठों पर रख कर उसे चुप रहने... Read more

घेरे के बाहर

'घेरे के बाहर' विस्थापित कश्मीरी हिन्दू समाज में युवा पीड़ी की सोच में आ रहे बदलाव की कहानी है। इस सोच का क्या कारण है ? क्या यह सोच... Read more

बाल गीतिका (१८ बाल कविताओं का संग्रह )

बाल गीतिका/ त्रिभवन कौल अनुक्रमणिका १. नन्हा चूहा भागा दौड़ा २ छोटा टौमी दुम हिलाए ३ पिंजरे का ... Read more

कलमकार

एक प्रसिद्ध लेखक का निधन हो गया। परिवार की ओर से शान्ति पाठ का आयोजन किया गया। लेखक मित्र , आलोचक , पत्रकार , प्रकाशक, पाठकगणो में ... Read more

वह दिन याद आते हैं

वह दिन याद आते हैं, जब वह मुस्कुराती थी कमल खिलते थे यूँही, जब वह गुनगुनाती थी साये में प्यार के उसके जिया, आज तक इश्वर मेरे आहट ... Read more

जसाला वर्ण पिरामिड लेखन, एक स्पष्टीकरण

हिंदी साहित्य को समृद्ध कर रहे फेसबुक के पटलों ,जसाला वर्ण पिरामिड पर साप्ताहिक वर्ण पिरामिड आयोजनों पर या युवा उत्कर्ष साहित्यक मंच... Read more

कश्मीरी युवाओं के नाम-एक पैगाम

उस माँ से आज़ादी मांग रहे, जिस माँ ने तुमको जन्म दिया उस माँ से आज़ादी चाह रहे, जिस माँ का तुमने दूध पिया आज़ादी का शब्द नाद अर... Read more

नमन है तुझको नारी , मेरा नमन (विश्व नारी दिवस के उपलक्ष्य में )

नमन है तुझको नारी, मेरा नमन सलाम तमाम नारीत्व को तुम लक्ष्मी की अवतार दुर्गा की प्रतीक सरस्वती सी आदर्श मूर्ती धन-धान्य, साहस ... Read more

धर्म परिवर्तन !

गरीबी रेखा से नीचे रहने वाली वह बस्ती अल्पसंख्यों की थी। स्थानीय विधायक गुलाम रसूल ने जान बूझ कर मुल्ला मौलवियों के साथ मिल कर आबादी... Read more

हाइकु रचना : कलात्मक और दर्शनात्मक अभिव्यक्ति

हाइकु विधा को जापान के कविश्रेष्ठ बोशो (1644–1694) ने एक काव्य विधा के रूप में स्थापित किया जिसे आजकल संसार की अनेक भाषाओँ ने अपना ल... Read more

पर्यटन

ज़िंदगी, लहरों से खेलती चेतावनियों की उपेक्षा करती पर भंवर की क्षुधा से बचते हुए लहरों के उतार चढ़ाव को झेलती दुःख ,भ्रम उ... Read more

अभिलाषा

कंधों पर लटकी गुते तेरी ऊरोजों को छूती हैं ऐसे सावन का बादल, पर्वत की चोटी को छूता हो जैसे. चंचल से नयन तीखी चितवन अधरों पर प... Read more

अंदेशा (लघुकथा)

इतवार का दिन होते हुए भी स्कूल में गहमा गहमी थी। वार्षिक उत्सव की तैयारी ज़ोरों पर थी। १० वर्ष के मनुज ने डांस प्रैक्टिस कर, गिटार ... Read more

इत्तेफ़ाक़

कैफे में साथ वाली टेबल से जब उसे किसी ने पुकारा तो उसने आवाज़ की दिशा में सिर घुमा कर देखा । "राकेश !" "अरे, तुम यहाँ? क्या इत्तेफ़... Read more

एक महानगर

पेड़ों के झुण्ड, खम्बों की कतारें सीमेंटेड सड़क,बेशुमार कारें ठिठुरते बदन, थिरकते होंठ जोर का ठहाका,भूख की दौड़ I झूमते मदहोश,... Read more

लाली का सपना

सोलह साल की उम्र में सपनो को भी पर लग जाते हैं I वह सपने जिनका जीवन की आपा धापी से कुछ लेना देना नहीं I एक बार देखने लग जाओ तो अफीम... Read more

हाइकु श्रृंखला

उज्ज्वल सूर्य लुप्त होते सितारे शोषित बच्चे I ----------------------- वसंत ऋतु राग-रंग उत्सव पिघले बर्फ I --------------... Read more

कविता

जो मन में है वह लिखती हूँ जो लिखती हूँ वह बोलती हूँ जो बोलती हूँ वह सत्य है जो सत्य है वह निर्विवाद है जो निर्विव... Read more

स्वप्न

हे स्वप्न सुंदरी आती हो बार बार कर नव श्रृंगार हे नीलांभरी देखूँ मैं तुमको बारम्बार हे श्वेतांभरी तुम गगन की परी उत... Read more

हिंदी और आभासी दुनिया।

फेसबुक और ब्लॉग सहित विभिन्न वेबसाइट के माध्यम से हिंदी में जो भी रचनात्मक कार्य हो रहें हैं वह हिंदी भाषा के उत्थान के लिए एक ऐसा... Read more

आवाह्न

कल का भविष्य तुम्हारा बच्चो, अंतहीन आकाश में छू सको तो छू लो सीमा, अपने जीवन के प्रकाश में बढ़े चलो बढ़े चलो, कदम मिला बढ़े चलो. य... Read more

द्विपदी

किसी ने गर जो मेरे ग़म को तराशा होता हम भी कोयले से वह हीरा बन गए होते -------------------------------------------- प्यार को रि... Read more

आती है ललाई चेहरे पर I

आती है ललाई चेहरे पर जब देख मुझे मुस्काती हो दिल में होल सा उठता है जब हंस कर तुम लज्जाती हो. ऑंखें तुम्हारी कजरारी सी ज़ुल्फ़ो... Read more

दुपदी

प्यार चाहते सब , नफरत का क्या काम नफरत चंद सिरफिरों की बनी बपौती है। त्रिभवन कौल -------------------------------------------... Read more

कविता के समक्ष वर्तमान चुनौतियाँ।

जीवन ही जब चुनौतियों से भरा नहीं हो तो उस जीवन के क्या मायने। वह जीवन तो मृत समान है। इस परिवेक्ष में कविता को देखा जाए तो कविता भी... Read more

ज़हर

ज़हर ज़हर ज़हर ज़हर जीव बना ज़हर ज़हर जिधर देख ज़हर ज़हर सुबह शाम यहाँ ज़हर ज़हर ज़हर ज़हर ज़हर ज़हर ज़हर ज़हर ज़हर। पानी ज़हर हवा ज़हर... Read more

मन

मन ----- मन कभी चंचल, कभी स्थिर कल्पनाजनित भ्रमजाल उत्पन करता आशा,निराशा,अपेक्षाओं और व्याकुलताओं का मायाजाल बुनता हुआ, कभी... Read more

बेचारा आम आदमी

गाँधी जी के तीन बंदर तीनो मेरे अन्दर कुलबुलाते हैं बुरा मत देखो, बुरा मत सुनो, बुरा मत कहो पर देखता हूँ, सुनता हूँ, कहता हूँ.... Read more