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खुरदरी सतह

बचपन में फर्श की वो खुरदरी सतह जब फिसलना रोक दे जाया करती थी। हमारी नाक उसपल सिकुड़ जाया करती थी। मुहँ बिगड़ जाता था जब वो हमे ऐसे स... Read more

बारिश

जब भी बारिश आती है। किसी को झूमने को मजबूर कर जाती है, किसी में घूमने की ललक जगा जाती है। खुशमिजाज गाना गाने लगते हैं, उदास भी म... Read more

आ रहा हूँ मैं

गर शक है मुझ पर की कहाँ जा रहा हूँ मैं, थोडा सब्र रख ले जिंदगी बस आ रहा हूँ मैं। चला था समंदर पार करने मैं, ज्वार भाटा में ऐसा... Read more

अपनेपन, मानवता के फूल और भेदभाव की सोच

ना फूल बरस रहे हैं ना बरसाने की चाह बरस रही है बस दिल मई एक अजीब सी आग धधक रही है। असहीशुनाता, असहनशीलता,नस्लियता,भेदभाव और स्वार... Read more