तेजस 'नीरा नंदन'

बिलासपुर छत्तीसगढ़

Joined November 2017

An Engineer With Arts

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ख़िलाफ़

मुझसे होकर तो जाती है मग़र तुझसे होकर नही आती ये हवा भी मेरे #ख़िलाफ़ चलती है। सारा मोहल्ला हुआ रौशन अंधेरा मेरे घर रह गया ये ... Read more

कहता है धागा मेरी कलाई का

कहता हैं धागा मेरी कलाई का तुम फ़र्ज़ निभाना एक भाई का। स्नेह का मोल नही मांगती मैं तुमसे बस क़ीमत मांग लेती हूं मिठाई का। व... Read more

नीरस कल्पना

प्रथम काव्य रचना - "नीरस कल्पना" (2006) हैं नीरस जिंदगी, मुझपर भी तो तरस। सुख की वर्षा बनकर इस मरु में भी बर... Read more

तमाशा देखकर ह

सबका एक ही रंग... बोलने का एक ही ढंग देश इतना कब बदला तमाशा देखकर हूं दंग। कहाँ किसी को परवाह हैं सबको कुर्सी की चाह हैं पक्... Read more

"शिखर पर"

"शिखर पर" शिखर पर आकर जब सूर्यास्त होगी, यही मेरी आख़री शिकस्त होगी। ना होगी माँ की ममता ना पिता का साया हर तरफ होगा उदासिय... Read more

माँ हिंदी की पुकार।

माँ हिंदी की पुकार। नहीं लिखूंगा कुछ भी, आजकुछ भी नहीं सुनाने को, फर्क नहीं पड़ता आहों से मेरी अंधे,बहरे, गुलामो को । ना मात... Read more

मोहब्बत एक अधूरी कहानी

मोहब्बत की थी शुरू हमने धीमे कदम से, डर डर के लगते थे हम सीने सनम से। एक दिन दरिया में बारिश अथाह हो गई , उनसे मोहब्बत हमें ब... Read more

नदान हूँ मैं इश्क़ के रिवाज़ो से

नादान हूँ मैं इश्क़ के रिवाज़ों से, यूं रूठकर मुझे उलझाया ना करो !! बड़ी मुश्किल से संभलता है दिल, दिल तोड़ के मुझे सत... Read more

जिंदगी साली सीली अपनी

न रोने -धोने का कचड़ा है ,, न खाने -पीने का लफड़ा है ! न तू तू -मै मै का कचपच है ,, न आने-जाने का मचमच है ! जिंदगी साली SILLYअ... Read more

किसको लिखूं

किसको लिखू? इश्क़ लिखू ! तो पहले ही बदनाम बहुत है। गम लिखूं! तो और भी काम बहुत है।। किसको लिखूं! राजनीति लिखूं! अब तो ये... Read more

कुछ कर

कुछ कर ! १। उम्मीदों के घरोंदे, गिरा मुँह औंधे। घर आँख लगाए छत पर, कहता है कुछ कर ! छत पर बैठा है कागा , बांधे  सिर पर क... Read more