Taposh Kumar Ghosh

Vrindaban

Joined April 2018

Am multi lingual. Love meet people. Live LIFE as a Mystery to live.

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ग़ुज़रें हैं हम , देखते देखते

गुज़रें हैं हम , देखते देखते हम भी गुज़र जायेंगे , देखते देखते | सालों साल गुज़र गये, देकते दखते बाकी भी ग़ुज़र जायगा , देखते देखत... Read more

ज़िंदगी में तोल मोल

ज़िंदगी में तोल मोल जब ज़िंदगी में तोल मोल आ जाये ज़िंदगी तब गोल मोल हो जाती है, बहती ज़िंदगी , बर्फ बन जाती है, और भाप बन उड़ जा... Read more

शिक़वाए ग़ुस्सा

शिक़वाए गुस्सा शिक़वा अपनों से होती है, परायों से नहीं गुस्सा ख़ून के रिश्तों से होती हे , गैरों से नहीं | उड़ादे गुस्से को हवा... Read more

न तो मैं शायर हूँ ; न शायरी आती है

My shayri मैं ना तो शायर हूँ, ना शायरी आती है कभी कभी जोशे आगोश में, तुक बन्दी कर दिता हूँ तो वाह वाह हो जाती है और कभी दे... Read more