वो बेटी है ना!

वो बेटी है ना! उसे पापा की शर्ट, माँ की साड़ी भाती है। सारे घर को रौशन करके स्वर्ग बनाती है। हंसकर हर जिम्मेदारी चुपचाप उ... Read more

याद आई कैसे?

उम्मीद है कि ख़ैरियत होगी उनके मोहल्ले में। अचानक ये गली उन्हें याद आज आई कैसे। फिराक़ में होगें फिर चिंगारियों को हवा देने ... Read more

"भारत देश हमारा है "

वुजू करें इस माटी से, भाल तिलक सा मलते हैं। ये जीसस की माला सी, हम "गुरुग्रंथ" सा पढ़ते हैं। ये देश है प्यारे उपवन सा, यह... Read more

मुक्तक

इन ग़मों ने तो खुशी का मतलब बताया है। ज़माने ने सभी को मातम में भी सताया है। ग़मगीन को हँसा लूँ वो हिम्मत दे मेरे खुदा!, ज़िन्द... Read more

रेत कह रही है

हवाओं को भी ख़बर है कि कोई हवा आई है। जिंदगी को दवा और मौत की मेरे दुआ लाई है। ये बादल बरस रहें इर्द - गिर्द इन रेगिस्तानों ... Read more

"वादा है"

आ गले लग ए ज़िन्दगी! बहुत हो चुका। वादा है कि तुझे अब कभी और रोने ना दूंगी। रिश्ते बिकते कौड़ियों के भाव सरेबाजार। वादा है तु... Read more

ए वक्त!

एवक्त! तू भी इन चंचल तितलियों सा ही है। जहाँ भी ठहरता है तेरे हर रंग छोड़ देता है। जा़लिम तेरे कारनामें क्या बयां करे ये जहाँ... Read more

बारिशें लाई है

इन पथ्थरों को भी सिखा दो मुस्कुराना कोई। मुद्दतों से जलने की इन्होनें एक सजा पाई है। दे दे काश इन्हें भी कोई भीगने का बहाना क... Read more

"बंदगी लिखूंगी"

तुम्हारा साथ मिले गर तो मौत को ज़िन्दगी लिखूंगी। जंगल के सफर को भी जन्नत-ए-बाशिन्दगी लिखूंगी। काफिर कहती है दुनियां ताउम्र मुझे प... Read more

"ख़्वाहिशें लिखूं"

जिंदगी! तेरी आज़माइशें ख़तम हो, मेरी ख़्वाहिशें लिखूँ। बिजली की आतिशें ख़तम हो, रेत पर कुछ बारिशें लिखूँ। कमबख़्त जलती दोपहरी मे... Read more

"खोई सी है जिंदगी "

खोई सी है जिंदगी इसे खोजने जाना है। वक्त - बेवक्त ही सही पर ढूँढ ही लाना है। जिंदा तो रहते हैं कई साँसो के सहारे पर। मुझे ... Read more

वो जीत जाता

जिंदगी के इम्तिहान में यूं असफल हो गया। वो जीत जाता गर हराने वाले अपने न होते। कहते हैं ख्वाब देखो आसमानी बुलन्दियों के। वो ... Read more

"गले लगाया ही कहाँ"

यकीनन गलत है कि उसने कुछ बताया नही। जो कह रहा था वो तुम्हें सुनने आया ही कहाँ? ढूँढ़-ढूँढकर निकाली थी उसमें खामियाँ तुमने। ए... Read more

रात का पैगा़म

रात आने के साथ एक पैगा़म लाती है। हर निशा पश्चात सुनहरी सुबह आती है। चाँद का मोल भी तो रात से ही होता है। दिन के उजाले में ... Read more

मैं सौदागर कच्चा हूँ।

क्यों तोलते हो समझदारियां मेरी। अभी भी दिलसे मासूम बच्चा हूँ। बिकता है इमान सरेबजार यहाँ। इस बाजार में मैं सौदागर कच्चा हूँ। ... Read more

"पिता"

मेरी एक चीख से उसका हृदय चित्कार उठता है। मेरे आँख से पढकर वो हर एक गम भांप लेता है। यूं तो आदत में है मेरी हरघडी़ मुस्कुर... Read more

अपने ही नज़र में गिराया गया।

थोड़ा-थोड़ा शहद के प्याले में रोज ज़हर पिलाया गया। वो मरने की कगार पर पहुँचा तो खुदखुशी बताया गया। सम्मानित था, सम्मानित रहा उ... Read more

गलतियों का जुर्माना

आइना सच बोल जाए गर तो वो भी बिखरता है। खुद को असली किरदार में कुबूल कौन करता है। किसी ने अपनी किरदारे-असलियत देखी कब है। गलत... Read more

बवाल लिखा है।

बता मैं तुझे क्या लिखूं ए जिन्दगी। खुदा ने तूझे खूब कमाल लिखा है। ढूढ़ता थक गया जिन जवाबों को। तुझे एसा कठिन सवाल लिखा है। ... Read more

रुठना जरुरी है

कभी-कभी खुद से रुठना जरुरी है। थोड़ा सा खुद का टूटना भी जरुरी है। पर यूं नहीं कि खुद को मना न सको। खुद को जोड़कर फिर बना न सको... Read more

"अर्थात बदल जाता है "

वक्त बदल जाता है हर हालात बदल जाता है। अर्थ बदल जाता है हर अर्थात बदल जाता है। गुजरता है जब तूफान सब कुछ मिटाकर, शख़्स बदल जाता... Read more

"साँसे गिनते हुए"

जिया नहीं गया हमसे उस कटघरे में ताज्जुब क्या है? मैं ने देखा है कठपुतलियों सी जिन्दा लाशें कई वहाँ चलते हुए। आजाद हूँ कैद गँवा... Read more

हो जाए जो होना अब है।

सच है वक्त रुकता नहीं पर हमने रोका कब है? जो गुजर रहा रब की मर्जी हमने ऐसा सोचा कब है? नहीं है भय किसी बात का भी हो जाए जो... Read more

तुम और हम

तुम और हम सूखी नदी के दो किनारे। जिसे कभी न लहरें जोड़ सकेगी न हवा। तुम और हम जीवन में हर क्षण के नासूर । जिसे कभी न दुआ म... Read more

आदत रखो

बेवजह ही खूब मुस्कुराने की आदत रखो। जो जले उन्हें और जलाने की ताकत रखो। चलो निरन्तर मंजिल आ गले लग जाएगी, साथ में हौसला और खुद... Read more

गलत ही रहे

हम खराब थे इस कदर कि किरदार में कोई मिलावट न की। हम गलत थे गलत ही रहे सही होने की भी सजावट न की। -Tanu Read more

हसीन लिख दिया

बड़ी साजिशें की तूफानों ने "जिंदगी" को "हादसा" लिखने की। बेखौफ "वक्त" ने बाजी पलटी और "हसीन" लिख दिया। -Tanu Read more

शेर

"जिंदगी" को भी सजा मिली है "ज़िंदा" होने की। "इल्ज़ाम" था कमबख़्त "मुस्कुराती" बहुत है। -Tanu Read more

"हालात लिखता हूँ"

हाँ डायरी नहीं लिखता मैं कुछ पन्नों पे अपनी बात लिखता हूँ। मीठे शब्द नहीं लिखता मैं कुछ गहरे से आघात लिखता हूँ। दूर हूँ फ... Read more

"पथ्थर रहूंगा हरदम"

लगता है किसी की मन्नत रंग ला रही है। धीरे-धीरे ही सही मौत करीब आ रही है। दुआ बेअसर थी, बेअसर ही रही उनकी। शुकर है कोई बद्दुआ ... Read more

शेर

रिश्तों की हरियाली मुकर्रर नहीं तो जीवन के बागानी में इसकी खुशबू बसा लो। कल टूटना होगा टूटेगी आज की डाली तो खूबसूरत खुशियों से सजा... Read more

मन की केतली

मन की केतली मे मां की प्यारभरी मिठास है पिता के स्नेह का प्यारा गरम सा आभास है। थोड़ी कड़वी पर आदर्श सी स्वाद में भली है। स... Read more

मौत नहीं!

महज़ सांसो का थमना ही तो मौत नहीं। ठहरी सी जिंदगी भी बेजान ही होती है। -Tanu Read more

रो लिया करती हूँ।

हांँ सच है कभी-कभी रो लिया करती हूँ। खुद को ढूढ़ खुद में खो लिया करती हूँ। यूं तो ताल्लुक नहीं है कोई नींद से अब, जागती आँखों ... Read more

तू ही कह ए लेखनी!

तू ही कह ए लेखनी! तुझे कैसे हाथ लगाना छोड़ दूं? रगो से बहते लहू में कैसे शब्द-भाव बहाना छोड़ दूं? जीवन के बलिदानों की कोई नीति-रीत... Read more

मातम का त्योहार नहीं करते।

ये सच है कि हमें मोहब्बत नहीं आती पर नफरत का व्यापार नहीं करते। महसूस होती है तकलीफ़ दर्द की किसी के मातम का त्योहार नहीं करते। -... Read more

एक वसूल

सीखा है एक वसूल रास्ते से, मुड़ता तो हैं सिर्फ आगे बढ़ने को। पिछले मोड़ और चौराहे उसे याद नहीं रहते। -Tanu Read more

बद्दुआ में

किनारा कर लिया हर दुआ ने मेरे रुख से। शायद बद्दुआ में उठे हाथ दुआ से कहीं ज्यादा रहे होगें। -Tanu Read more

अच्छी ख़बर दोगे क्या?

मैने देखा है जो कुछ भी वो कम तो नहीं, नज़रंदाज कर सकूं एसी नज़र दोगे क्या? माना है बेहद काँटों से भरी जिंदगी मेरी, सारे काँटे... Read more

दर्द की भाषा

दर्द की भी अपनी एक भाषा होती है। हर चोट की अपनी परिभाषा होती है। आह गवाह है पीड़ा में नासूर को भी, किसी के दवा-दुआ की आशा होती ... Read more

भगवान बना देते हैं।

बेहतरीन कारीगरी है इंसानों की, पथ्थर पूज-पूज कर भगवान बना देते हैं। देवता से पवित्र मन को बारम्बार दुत्कार कर, पथ्थर सा विरान बना ... Read more

ए शाम!

ए शाम! हमसे कुछ तो बोल, ये हवाएं कौन सी खुशबू ला रहीं है। इन पंक्षियों की चहचहाहट सुन, इतना मधुर न जाने ये क्या गा रहीं है। त... Read more

वकालत न दे।

जो झूठ की पैरवी करे मुझे वो वकालत न दे। सच शर्मशार करे वो न्यायाधीश,अदालत न दे। कटे सिर मंजूर झूठे लफ्ज अदा न करुं मौला, खामखा़ ... Read more

मज़दूर

दूर का सफर है पर खुद के हौसले से पार कर जाएंगे। गिरते-उठते, थमते-चलते, मंजिल तक पहुँच ही जाएंगे। मज़दूर हैं साहब! हमें आदत हैं ग... Read more

"खुशी-खुशी"

खुशी-खुशी विदा किया मेहमान की तरह। तेरा आना कुछ-कुछ बरसात सा था। मिलो गर कभी मिलना अनजान की तरह। तेरा रव्वैया कुछ-कुछ बेपरवाह... Read more

"लिखा था कुछ"

रेत पर लिखा था कुछ, वो लहरों में बह गया। हवाओं से कहा था कुछ, वो झोंकों में रह गया। पर्वतों ने जो सुना था कुछ, वही मुझ... Read more

"कहाँ तक"

कहाँ तक कहोगे अधूरे किस्से कहो एक बात ही सही पर गहराई तो हो। चढे़ मुकाम कई सारे बढ़े बेखौफ वही जिसने जड़ जमीन से लगाई हो। ... Read more

"एक काम कर"

कर न कर कुछ बस तू एक काम कर। तेरे हाथों में ये मेरा हाथ रख थाम कर। जो दे ग़म सर झुका करु क़बूल ए खुदा!, कम से कम कुछ खुशी तो म... Read more

"ज़िन्दगी के हर रंग से"

जिंदगी के हर रंग से नहाना तो पड़ेगा। कड़वा-तीखा हर स्वाद खाना तो पड़ेगा। कहते है आसान नहीं मुहँ मोड़कर जाना, रिश्ता जैसा भी हो... Read more

"वो माँ है "

मुझ तक आती हर बद्दुआ को बे-असर किया है। जागते-सोते हर घड़ी मेरी ही तो फिकर किया है। हम न होते गर उसके आँचल की छाँव न होती, वो ... Read more