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मैं सौदागर कच्चा हूँ।

क्यों तोलते हो समझदारियां मेरी। अभी भी दिलसे मासूम बच्चा हूँ। बिकता है इमान सरेबजार यहाँ। इस बाजार में मैं सौदागर कच्चा हूँ। ... Read more

"पिता"

मेरी एक चीख से उसका हृदय चित्कार उठता है। मेरे आँख से पढकर वो हर एक गम भांप लेता है। यूं तो आदत में है मेरी हरघडी़ मुस्कुर... Read more

अपने ही नज़र में गिराया गया।

थोड़ा-थोड़ा शहद के प्याले में रोज ज़हर पिलाया गया। वो मरने की कगार पर पहुँचा तो खुदखुशी बताया गया। सम्मानित था, सम्मानित रहा उ... Read more

गलतियों का जुर्माना

आइना सच बोल जाए गर तो वो भी बिखरता है। खुद को असली किरदार में कुबूल कौन करता है। किसी ने अपनी किरदारे-असलियत देखी कब है। गलत... Read more

"बवाल लिखा है"

बता मैं तुझे क्या लिखूं ए जिन्दगी। खुदा ने तूझे खूब कमाल लिखा है। ढूढ़ता थक गया जिन जवाबों को। तुझे एसा कठिन सवाल लिखा है। ... Read more

रुठना जरुरी है

कभी-कभी खुद से रुठना जरुरी है। थोड़ा सा खुद का टूटना भी जरुरी है। पर यूं नहीं कि खुद को मना न सको। खुद को जोड़कर फिर बना न सको... Read more

"अर्थात बदल जाता है "

वक्त बदल जाता है हर हालात बदल जाता है। अर्थ बदल जाता है हर अर्थात बदल जाता है। गुजरता है जब तूफान सब कुछ मिटाकर, शख़्स बदल जाता... Read more

"साँसे गिनते हुए"

जिया नहीं गया हमसे उस कटघरे में ताज्जुब क्या है? मैं ने देखा है कठपुतलियों सी जिन्दा लाशें कई वहाँ चलते हुए। आजाद हूँ कैद गँवा... Read more

हो जाए जो होना अब है।

सच है वक्त रुकता नहीं पर हमने रोका कब है? जो गुजर रहा रब की मर्जी हमने ऐसा सोचा कब है? नहीं है भय किसी बात का भी हो जाए जो... Read more

तुम और हम

तुम और हम सूखी नदी के दो किनारे। जिसे कभी न लहरें जोड़ सकेगी न हवा। तुम और हम जीवन में हर क्षण के नासूर । जिसे कभी न दुआ म... Read more

"आदत रखो"

बेवजह ही खूब मुस्कुराने की आदत रखो। जो जले उन्हें और जलाने की ताकत रखो। चलो निरन्तर मंजिल आ गले लग जाएगी, साथ में हौसला और खुद... Read more

गलत ही रहे

हम खराब थे इस कदर कि किरदार में कोई मिलावट न की। हम गलत थे गलत ही रहे सही होने की भी सजावट न की। -Tanu Read more

हसीन लिख दिया

बड़ी साजिशें की तूफानों ने "जिंदगी" को "हादसा" लिखने की। बेखौफ "वक्त" ने बाजी पलटी और "हसीन" लिख दिया। -Tanu Read more

शेर

"जिंदगी" को भी सजा मिली है "ज़िंदा" होने की। "इल्ज़ाम" था कमबख़्त "मुस्कुराती" बहुत है। -Tanu Read more

"हालात लिखता हूँ"

हाँ डायरी नहीं लिखता मैं कुछ पन्नों पे अपनी बात लिखता हूँ। मीठे शब्द नहीं लिखता मैं कुछ गहरे से आघात लिखता हूँ। दूर हूँ फ... Read more

"पथ्थर रहूंगा हरदम"

लगता है किसी की मन्नत रंग ला रही है। धीरे-धीरे ही सही मौत करीब आ रही है। दुआ बेअसर थी, बेअसर ही रही उनकी। शुकर है कोई बद्दुआ ... Read more

शेर

रिश्तों की हरियाली मुकर्रर नहीं तो जीवन के बागानी में इसकी खुशबू बसा लो। कल टूटना होगा टूटेगी आज की डाली तो खूबसूरत खुशियों से सजा... Read more

मन की केतली

मन की केतली मे मां की प्यारभरी मिठास है पिता के स्नेह का प्यारा गरम सा आभास है। थोड़ी कड़वी पर आदर्श सी स्वाद में भली है। स... Read more

मौत नहीं!

महज़ सांसो का थमना ही तो मौत नहीं। ठहरी सी जिंदगी भी बेजान ही होती है। -Tanu Read more

रो लिया करती हूँ।

हांँ सच है कभी-कभी रो लिया करती हूँ। खुद को ढूढ़ खुद में खो लिया करती हूँ। यूं तो ताल्लुक नहीं है कोई नींद से अब, जागती आँखों ... Read more

तू ही कह ए लेखनी!

तू ही कह ए लेखनी! तुझे कैसे हाथ लगाना छोड़ दूं? रगो से बहते लहू में कैसे शब्द-भाव बहाना छोड़ दूं? जीवन के बलिदानों की कोई नीति-रीत... Read more

मातम का त्योहार नहीं करते।

ये सच है कि हमें मोहब्बत नहीं आती पर नफरत का व्यापार नहीं करते। महसूस होती है तकलीफ़ दर्द की किसी के मातम का त्योहार नहीं करते। -... Read more

एक वसूल

सीखा है एक वसूल रास्ते से, मुड़ता तो हैं सिर्फ आगे बढ़ने को। पिछले मोड़ और चौराहे उसे याद नहीं रहते। -Tanu Read more

बद्दुआ में

किनारा कर लिया हर दुआ ने मेरे रुख से। शायद बद्दुआ में उठे हाथ दुआ से कहीं ज्यादा रहे होगें। -Tanu Read more

अच्छी ख़बर दोगे क्या?

मैने देखा है जो कुछ भी वो कम तो नहीं, नज़रंदाज कर सकूं एसी नज़र दोगे क्या? माना है बेहद काँटों से भरी जिंदगी मेरी, सारे काँटे... Read more

दर्द की भाषा

दर्द की भी अपनी एक भाषा होती है। हर चोट की अपनी परिभाषा होती है। आह गवाह है पीड़ा में नासूर को भी, किसी के दवा-दुआ की आशा होती ... Read more

भगवान बना देते हैं।

बेहतरीन कारीगरी है इंसानों की, पथ्थर पूज-पूज कर भगवान बना देते हैं। देवता से पवित्र मन को बारम्बार दुत्कार कर, पथ्थर सा विरान बना ... Read more

ए शाम!

ए शाम! हमसे कुछ तो बोल, ये हवाएं कौन सी खुशबू ला रहीं है। इन पंक्षियों की चहचहाहट सुन, इतना मधुर न जाने ये क्या गा रहीं है। त... Read more

वकालत न दे।

जो झूठ की पैरवी करे मुझे वो वकालत न दे। सच शर्मशार करे वो न्यायाधीश,अदालत न दे। कटे सिर मंजूर झूठे लफ्ज अदा न करुं मौला, खामखा़ ... Read more

मज़दूर

दूर का सफर है पर खुद के हौसले से पार कर जाएंगे। गिरते-उठते, थमते-चलते, मंजिल तक पहुँच ही जाएंगे। मज़दूर हैं साहब! हमें आदत हैं ग... Read more

"खुशी-खुशी"

खुशी-खुशी विदा किया मेहमान की तरह। तेरा आना कुछ-कुछ बरसात सा था। मिलो गर कभी मिलना अनजान की तरह। तेरा रव्वैया कुछ-कुछ बेपरवाह... Read more

"लिखा था कुछ"

रेत पर लिखा था कुछ, वो लहरों में बह गया। हवाओं से कहा था कुछ, वो झोंकों में रह गया। पर्वतों ने जो सुना था कुछ, वही मुझ... Read more

"कहाँ तक"

कहाँ तक कहोगे अधूरे किस्से कहो एक बात ही सही पर गहराई तो हो। चढे़ मुकाम कई सारे बढ़े बेखौफ वही जिसने जड़ जमीन से लगाई हो। ... Read more

"एक काम कर"

कर न कर कुछ बस तू एक काम कर। तेरे हाथों में ये मेरा हाथ रख थाम कर। जो दे ग़म सर झुका करु क़बूल ए खुदा!, कम से कम कुछ खुशी तो म... Read more

"ज़िन्दगी के हर रंग से"

जिंदगी के हर रंग से नहाना तो पड़ेगा। कड़वा-तीखा हर स्वाद खाना तो पड़ेगा। कहते है आसान नहीं मुहँ मोड़कर जाना, रिश्ता जैसा भी हो... Read more

"वो माँ है "

मुझ तक आती हर बद्दुआ को बे-असर किया है। जागते-सोते हर घड़ी मेरी ही तो फिकर किया है। हम न होते गर उसके आँचल की छाँव न होती, वो ... Read more

"राह कौन बताए"

सुनसान रातें विरान गलियां हर राहें। भटके पथिक को राह कौन बताए। सहमें से बैठे चौबारे और हर चौराहे। है अमा कोई तारा रोशनी तो ज... Read more

उँगलियाँ मात्र गिनती हैं।

समेटे हुए पल उसने जूड़े में बाधा है। इसलिए वो अब बाल खुले रखती नहीं । बकबक करती घूमती थी जो आंगन में। सिर्फ सुनती है किसी को... Read more

चाँद निकलता नहीं।

बड़ी हसरत थी उन्हें राह-ए-सफर चुनने की। रहमते रब सफर में थे, आज भी सफर मे हैं। न था वास्ता जिनका इनकी-उनकी बातों से। सुना है ... Read more

प्रश्नों की सीमा तक जा।

किस बात की परेशानी है। कैसी ये हैरानी है? तू है सार विकल्पों का। तू ही असीम ग्यानी है। अन्तर्मन में लगा के गोते। मन के मोती... Read more

ख़ामोशी सुन लो!

ये खामोशी सुन लो, असीम कोलाहल स्थापित है। है शीतल ये अमृत सी, पूरा हलाहल समाहित है। उग्र है ये ज्वाला सी, लहरों सी प्र... Read more

माँ

"माँ" लिख पाऊं शब्दों में तुमको, वो अधिकार कहां है? गा सकूं सरगम में तुमको, वो सुर का संसार कहाँ है? गहराई नापूं मैं ममत... Read more

"ए जिंदगी!"

मैं कहूं-"लिख दूं तुम्हें" तुम कहोगी-"जी नहीं"। मैं कहूं-"पढ़ लूं तुम्हें" तुम कहो "बिल्कुल नहीं"। जो कहो तुम ही कहो तुम मेरी... Read more

बैर नहीं है।

"सच है कि मेरा किसी से बैर नहीं हैं। सब अपने हैं कोई भी तो गैर नहीं है। सख्त हूं क्योंकि मौत दहलीज पर है , लापरवाही से जिदं... Read more

समय

काश सब कर लिया होता समय से समय रहते। वो समय बीत गया तो फिर हम आज न कहते। जाने क्यों मुड़ गया रास्ता मंजिल के करीब से, वक्त कहाँ... Read more

एतराज़

आज भी खुश हूं मैं लोगो को बहुत एतराज़ है। टूट गई पर बिखरी नहीं इसका एक ही राज़ है। हर सुबह एक ही बात याद रखकर जगती हूं, आज... Read more

" सजा़वार "

भरोसा कर उसकी बातों पर, हम गुनाहगार हो गये। बदली उसने अपनी फितरत, हम खतावार हो गये। यूं तो समयानुसार कई शक्लें हैं उसके किरदारों ... Read more

" हार-जीत "

हार-जीत तो किस्मत के सिक्के का दो पहलू है। तेरे जीवन के शतरंज का प्यादां और राजा तू है। हर चाल तेरी तुझको तेरे मंजिल तक ले जाए... Read more

" कान्हा की उलाहना "

सुनहु मात हम वैसहु नाई। जैसन ई सब नारि बताई।। मै नही चोरी माखन कीनि। कर बरजोरी मुख मलि दिनि।। पहर तलक मोहे नाच नचायो। पकर... Read more

"मेरे दुश्मन"

ये दुश्मनी मुझे हार को भी जीतने को मजबूर कर जाती है। झूठ हैं कहते सब तेरी हर नुकीली बात सच कह जाती है। तू ईर्ष्या में ही सही म... Read more