Sweta Sinha

जमशेदपुर(झारखंड)

Joined April 2017

मन के कहे अनकहे भावों को शब्द देने का प्रयास करती हूँ।

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मूरखता का वरदान

समझदारी का पाठ पढ़ हम अघा गये भगवान थोड़ी सी मूरखता का अब तुमसे माँगे वरदान अदब,कायदे,ढ़ंग,तरतीब सब झगड़े बुद्धिमानों के प्रेम,प... Read more

अधूरा टुकड़ा

बूढ़े पीपल की नवपत्रों से ढकी इतराती शाखों पर कूकती कोयल की तान हृदय केे सोये दर्द को जगा गयी हवाओं की हँसी से बिखरे बेरंग प... Read more

हथेली भर प्रेम

मौन के इर्द-गिर्द मन की परिक्रमा अनुत्तरित प्रश्नों के रेत से छिल जाते है शब्द डोलते दर्पण में अस्पष्ट प्रतिबिंब पुतलियाँ स... Read more

नारी:कही अनकही

जीवन की बगिया की मैं पुष्प सुरभित सुकुमारी सृष्टि बीज कोख में सींचती सुवासित करती धरा की क्यारी मैं मोम हृदय स्नेह की आँच से ... Read more

तेरे नेह में

तुमसे मिलकर कौन सी बातें करनी थी मैं भूल गयी शब्द चाँदनी बनके झर गये हृदय मालिनी फूल गयी मोहनी फेरी कौन सी तुमने डोर न जाने कैसा... Read more