Kumari Rashmi

Joined November 2018

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Pratilipi.com
Amar ujala
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हम नरभक्षी हो गये

जाने कौन लोग होते हैं वो भीड़ से मारे जाते हैं जाने कैसी भीड़ होती है जो लोगों को मार देती है मानवता खतम हो गयी या मानवता शब्द ... Read more

हम बिजुखा हो गये (व्यंग्य काव्य)

आज हम वो नहीं,जो हम हैं हमने अपनी रूह को कोने मे दफना कर रख दिया आज जो हम लिखना चाहते लिख नहीं सकते आज जो हम कहना चाहते कह नही... Read more

लॉकडाउन में वक्त हमारा है

आज सुर्योदय भी हमारा है आज सुर्यास्त भी हमारा है आज चन्द्रमा भी हमारी खिड़की पे आता है आज सितारे भी हमारे छत पे जगमगाते है... Read more

लॉकडाउन मजदूर

दर्द इनके देखकर लफ्ज भी हमारे झुठे लगते हैं हम घरों में बैठे हैं वो सड़कों की खाक छान रहे हैं । अंतरियों और कंठ में भूख प्यास के... Read more

ईश्वर के आंसू (कथात्मक काव्य)

ईश्वर = हर बस्ती हर झुग्गी हर झौपड़ी में धुआं धुआं सा क्या है.. मनुष्य = आग लगी है आग लगी है - ईश्वर = ये कैसी आग है भाई ! ... Read more

मुक्तक

1-जब रिश्ते खोखले हो जाये उसे तराजू पे तोला नहीं करते। समुंदर की लहरों को नापा नहीं करते ।। 2- जरूरी नहीं हर पीने वाला... Read more

अक्स

मेरी वफा मेरा ईश्वर जानता है। तेरी वफा तेरा ईश्वर।। मुझसे क्या पूछता है तु। पूछना है तो अपने ईश्वर से पूछ।। मुझसे क्या ... Read more

चलो हम खेले किक्रेट

चलो हम खेले किक्रेट - 2 लहू में भर ले नया जोश - 2 आगे-पीछे कुछ ना सोचो लोग क्या कहते हैं चलो हम खेले किक्रेट - 2 अंशिका क... Read more

मुक्तक

1- हमने बुलंदी पे जाने की कसम खाई थी। अपनों ने फलक से नीचे खींचने की कसम खाई थी।। 2- खामोश रहो तो सब है। कह दो गर त... Read more

मंदिर - मस्जिद

क्या मंदिर - मस्जिद करते हो इक दिन खाक में सबको मिल जाना है क्या मंदिर - मस्जिद करते हो सबके लहु का रंग एक सबके लहु का प्रवाह ... Read more

उदास इश्क

एक उदास इश्क मेरी खिड़की से रोज गुजरती है पुछती है - कैसी हो ? मेरी बेजुबान सांसे .... मूंक आंखों से कहती है - चल रहा है........ Read more

मुक्तक

(1) कहीं कोई रास्ता मिलेगा जीने का बहाना मिलेगा जीवन बौनसाई का पेड़ नहीं मुश्किलों को छोटा कर दे । (2) अब क्य... Read more

अकेलापन

बढ़ती आबादी - बढ़ता अकेलापन जिधर देखो, उधर भीड़ ही भीड़ पर सब कितने तन्हा - तन्हा घर मे अकेले - सड़क पे अकेले अंदर अकेले - बाहर अकेले... Read more

भुल

कहीं गीली -गीली सी धरती कहीं सूखा-सूखा सा आसमान कहीं जलप्रलय कहीं जलविहीन जीवन कहीं पक्षियों का रुद्रंन कहीं इंसानों की कराह प... Read more

तेरे अफसाने से

निकल गई तेरे हर अफसाने से। तेरे शख्सियत के हर पैमाने से।। अपना भी एक वजूद होगा। अपना भी एक अक्स होगा।। तेरे ख्वाब अब मेरे नह... Read more

साथ

साथ वो अच्छा है जिसमें आपका वजूद जिंदा रहे। साथ वो अच्छा है जिसमें आपके सपने जिंदा रहे। साथ वो अच्छा है जिसमें सच्चाई हो । साथ... Read more

श्वेत और श्याम

उस चेहरे की हर लकीरों के उतार-चढाव में पलकों के खुलने-बंद होने मेंं आंखों की तरलता और खामोशी मेंं तनिक भी कहीं वो अपनापन, थो... Read more

आंखें मुंदे

आंखें मुंदे नदी किनारे नाव चले पतवार हिले हवाओं की सनसनाहट पेड़ो की हलचल खामोशी से हौले-हौले गीत सुनाये प्रीत बताये डालों ... Read more

भागी हुई लड़की

नन्ही सी परी थी ओस की बुंदो सी नाजुक थी बर्फ की छतरी तले भोर की मुस्कान मेंं होठों पे लाली लगाये आंखों मेंं काजल सजाये आशाओं क... Read more

ईमानदार प्रेम

ईमानदार प्रेम हर किसी के वश की बात नहीं होती । वफा की आग जलाये रखना हर शमा की अरदास नहीं होती । करना है आसान इश्के-मोहब्बत ... Read more

बरस हो गये

तेरे दिल को गये बरस हो गये मेरे दिल मेंं बरस भर की बात रह गई कहनी थी तब जब मेरे दिल से गुजरी अच्छी थी - बुरी थी सब जमा हो गई... Read more

मुश्किल होता है

मुश्किल होता है उन लम्हों से पार पाना जो लम्हें गुजर गये । मुश्किल होता है उन जज्बातों को मार पाना जो आत्मा से जुड़ गये । म... Read more

भ्रम की दुनियां

जीवन के विस्तार में खुद को खोजना सपनों के अथाह सागर मेंं खुद को डुबाना एक अलग पहलू है पर सतत् जीवंतता का खो जाना भ्रम की दुन... Read more

कहने को हमसफर हैं

कहने को हमसफर हैं मगर संग नहीं, संग होता गर और के संग की तुम्हें दरकार ना होती । संग होता गर, तो सच और झुठ छुपम और छुपाई ... Read more

हम मजदूर हैं

करते हैं हम मेहनतकश काम मिलती है हमें मेहताना अधुरी जो बच गया पुरी करते हैं बातों के प्रहार से लात - घुंसो का दौर भी चलता ... Read more

बिछुड़न की बेला

(1) चाँदनी रात फिर भी चाँद उदास सा बिन बादल बरसात सा चहुं ओर फैली है उजियारी फिर भी दीपक तले अंधियारा ... Read more

जीवन पहेली है

इस दुनियां में जब से आदमी है तब से जीवन पहेली है जब से प्रेम है तब से जज्बात पहेली है जानते हैं हम कुछेक साये में ही हर-पल ... Read more

उड़ान

उड़ते हुए पक्षियों के साथ मैं अपना आसमान ढुंढती हूँ। भेड़-चाल की भीड़ से अलग मैं अपना स्वप्न ढुंढती हूँ । लोग सवाल करे - संदेह करे... Read more

भटकता इंसान

एक नई दुनियांं की तलाश में भटकता इंसान । वर्तमान को नकारता भविष्य की खोज करता इंसान । सुकून की लालसा में जगत से निकल भागता इ... Read more

रोज खिड़की के पास

रोज खिड़की के पास आँखें मुंद कर महसूस किया करती हुँ तुम्हें और भोर की सुनहली किरणों से वादा किया करती हूँँ मैं नहीं रोऊँँगी स... Read more

दर्द

दर्द के साथ हम कहाँ जीते हैं दर्द हमसे जीता है हमारे ह्रदय में पलता है बढता है- सांंसे लेता है अपनी आयु लंबी कर हमारी क्षीण कर... Read more

सोचा ना था

जीवन की सुनहली सुबह मे बड़ी तमन्यता से तिनका - तिनका जोड़ा था उसने और बनाया सपनों का घोंसला अपनो के लिये तब सौचा ना था जीवन ... Read more