Rashmi Singh

Joined January 2017

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इंतज़ार

अक्सर तुम कहा करते थे कि तुम सीधे सीधे शब्दों का इस्तेमाल किया करो। यूँ पहेलियों में बातें न किया करो और तब मैं बस इतना ही कह पाती थ... Read more

प्रथम स्पर्श

आसमान के तले जब हम चाँद संग चले ख़्वाबो सा था वो शमाँ जब तेरी आँखों के स्पर्श में मुझे छुआ हाय मैं सिहर गई छुई मुई सी सिमट गई।... Read more

मैं क्यू लिखा करती हूँ

यादों के गुलदस्ते से निकल कर जब खुद से रूबरू होती हूँ अक्सर सोचा करती हूँ मैं क्यू लिखती हूँ हाँ मैं क्यू लिखती हूँ अक्सर तौबा ... Read more

तलाक

न उलझी थी न सुलझी थी जब हम प्रेम पाश में बंधे थे की अब कोई प्रेम को प्यास न मानता जब से ये तलाक पास आई है तखय्युल करता है ये ज... Read more

एक कहानी मेरी भी लिखना

#कभी_मौका_मिले_तो मेरी भी एक कहानी लिखना की मैं टुकड़ो टुकड़ो में कविताएँ कहूँगी तुम लम्हो लम्हो को जोड़ तोड़ कर एक कहानी रच... Read more

क्यू तुमने मुँह फेर लिया

सर्द रात जब तुम असहाय पीड़ा में थी मेरी किलकारी ने तुम्हारे सारे दर्द को भुला दिया था और तुम मुस्कुराते हुए बोली थी तुम मे... Read more