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स्मारिका

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दिल में आग है

यह अश्क़ में भीगी ग़ज़ल,खून में डूबे राग हैं, लबों पर जलते हुए लफ्ज़ यह मेरे दिल की आग है, अब वक्त है जुदाई का,जा इनकार न कर, मेरी शख... Read more

।।मैं जिसको पूज रहा हूँ।।

मैं जिसको पूज रहा हूँ, वह पत्थर पानी बनता है, घूंट-घूंट में देता जीवन, आशीष भवानी बनता है, कालो में है महाकाल, जिस पर धरती का भ... Read more

बे-मोल बिके

एक बूंद छलक पलकों से आई, मैंने उसे वफ़ा माना। जिसको पूजा दिलने मेरे , मैंने उसे खुदा माना। भेद क्या होता गैरों में, अब तक न मैंन... Read more

।।कुछ तो कमी रह गई।।

............कुछ तो कमी रह गई होगी तुमको लगता है कि तुम हार गये? बल्कि सच यह है कि सार्थक , प्रयास ही नही किया। एक कलाकार अपनी ... Read more

कहीं तो मिलेगी

कहीं किस्से, कहीं कहानी, कहीं भीगे हुए, तेरे कदमो. की निशानी, चलो चलते हैं ढूंढने फिर से, वह दिन, कहीं तो मिलेगी, ज़िंदगानी।... Read more

संवाद -बहुत काम की बात

संवाद -बहुत काम की बात अभी उसको रहने दो, अपने आप में, कुछ भी कहना ठीक नही है। हां, अपने आप सब ठीक हो जाएगा। आंप नॉर्मल व्यवहार... Read more

व्यथा

सिमिट रहा आँखों में है, और अश्कों में डूब रहा, आज मोहब्बत की नगरी में, कोई आशिक़ गाता घूम रहा। बेंच रहा हूँ दर्दे मोहब्बत क... Read more

।।कड़वा है....लेकिन सच है।।

कटी पतंग जैसे, गिरना है, ठहरना है, पर अब सफर नहीं। मंज़िल है मकाम है, पर घर नही। अब कौन उठाएगा? कौन लूटेगा? कौन छीनेगी... Read more

मेरे साथ..ज़िन्दगी है

मेरे साथ ज़िन्दगी है, यह उसमे पल रहे हैं। मेरे साथ मे खुशी है, यह उसमे जल रहे हैं। मेरे साथ साज़िशें , यह रचने में सफल रहे हैं।... Read more

ऐसी हो बरसात

शब्द-शब्द में सुर बसे प्रेम सुखद प्रभात, कौआ के मुख मिश्री घुले कोयल गए गीत। सावन बरसे मनवा भीगे,बिछडे मीत मिलें सब साथ, प्रीत की... Read more

सच्चा धन

खुले ज़िस्म के बाजारों में जिसने बेंचा ज़मीर नहीं, मेरी नज़रों में इस दुनिया में कोई उससे बड़ा अमीर नहीं। गर ऐसा कोई सख्स मिले ... Read more

सिद्धांत

सिद्ध सकल संकल्प रूप ले, कोई उड़ जाता अम्बर में। पर कोई कदम फूंक -फूंक कर, रखता बीच डगर में।। आभारों का भार चुकाना, मुझको बहुत क... Read more

अनुभूति (विचार संकलन)

संवाद-: अगर गलत हो तो बताओ? नज़रें एक झलक देखती हैं और दिल पूरी तरह से महसूस कर लेता है ,,, कि सामने बाला कैसा है? उसके बाद श... Read more

मन-मंथन

एक आकृति एक अनुभूति, भूति-भूति अभि-भूति हुई। मन मंथन माटी और चंदन, मथ-मथ के फली-भूति हुई।। यह कर्म भूमि वीरों की धरती, यहां साग... Read more