Suyash Sahu

Joined April 2017

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ग़ज़ल

हर सच की ये सच्चाई है आगे कुआं तो पीछे खाई है कैसे चीरा दिल पहाड़ का राह उसने खूब बनाई है अब नहीं हूँ मैं तनहा यारों मे... Read more

ग़ज़ल

हर शय का इस तरह एहतिमाम होता है गूंगों से पूछ कर यहां काम होता है साबित है घर किसका हंगामा-ए-शहर से चोर-सिपाही में अब दुआ-सला... Read more

ग़ज़ल

सुहानी शाम का मंज़र मगर तुम नहीं आये मेरा साया था हमसफ़र मगर तुम नहीं आये कहीं गा रहा था कोई नग़मे जुदाई के दिल में ... Read more

ग़ज़ल

यही मिला है मुझे उसके प्यार में बिखर गया हूँ मैं अपने हिसार में किसी दिन रसोई में लग जाएंगे ताले क्या नहीं मिलता अब दोस्तों ब... Read more

मुक्तक

ज़ुबानी जंग नहीं अब अंदाज़ बदलना होगा हम परिंदों को अपना परवाज़ बदलना होगा आस्तीन के साँपों को ज़रूरी है अब कुचलना सरहदों की ख... Read more

ग़ज़ल

कोई साज़ है न सुरूर है ये सज़ा किसे मंज़ूर है कुछ पास है कुछ दूर है प्यार कितना मजबूर है रात पकाएगी अब रोटी चांदनी का तं... Read more

ग़ज़ल

कितना प्यारा मंज़र है मैं हूँ , चाक समंदर है आँखों से वो ग़ायब क्यों धरती के जो अन्दर है उसके धन की चर्चा इतना जैसे ... Read more

ग़ज़ल

कोई एक नहीं सारा निज़ाम है सवालों में वफ़ा खड़ी है बरहना अवाम के दलालों में सब को मिलेगी रोटी फिर उसके बाद रोज़ी तस्कीन वो देता है... Read more

ग़ज़ल

चलो आज हम कुछ ऐसा करते हैं हाथ उनको दें जो यूँ ही डरते हैं मंज़िल तक जाना है ज़रूरी क्या सफर के लिए भी तो सफर करते हैं कभ... Read more