स्थानीय संपादक
हिन्दुस्तान, मुरादाबाद

Books:
प्रकाशनाधीान

Awards:
राष्ट्रीय युवा साहित्यकार पुरस्कार
मोदी कला भारती अवार्ड

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मुक्तक

विरल से क्यों सब सघन हो गये खोकर स्वयँ , हस्ताक्षर हो गये सीखकर ज़िन्दगी से संधियाँ नाम अपने ही अलग हो गये । * सूर्यकान्त द्विवेदी Read more

सांकल सांकल

सांकल-सांकल सांकल, सांकल हो गया मन बैरागी हो गया.... तारों से हमने पूछा नील गगन है क्या तेरा है गगन तो तेरा अपना ... Read more

ज्वार भाटा

मन में कितने ज्वार भाटे क्या तुझको मैं बतलाऊँ उठना गिरना सब कुदरत है कैसे किस्मत को समझाऊं । * सूर्यकान्त द्विवेदी Read more

ज्वार भाटा

मन में कितने ज्वार भाटे क्या तुझको मैं बतलाऊँ उठना गिरना सब कुदरत है कैसे किस्मत को समझाऊं । * सूर्यकान्त द्विवेदी Read more

अस्त सूर्य

सूर्य अस्त घोर तिमिर की बेला थी निस्तेज खड़ा रश्मि रथ अश्व उसके सब बंधक स्तब्ध पड़ा ज्योति पथ तेज पुंज का वो पोषक देदीप्... Read more

मन दीप

बंधन के दीप दीप जलाओ घर में अपने, है बहुत अंधेरा बाती ये बंधन की छोटी, है अभी सवेरा। कितने कच्चे प्यार के धागे ... Read more

मन दीप

बंधन के दीप दीप जलाओ घर में अपने, है बहुत अंधेरा बाती ये बंधन की छोटी, है अभी सवेरा। कितने कच्चे प्यार के धागे ... Read more

अवसान

अवसान उत्थान अवसान जीवन का विश्राम आशा जीवन अभी निराशा जीवन नहीं अंतर्द्वंद्व की शैया पर सोचता अपलक नर जिया ज... Read more

मासूम कली

मेरा बचपन मेरा क्रंदन मासूम कली का ये उपवन भीगा भीगा मां का आँचल भीगा भीग मेरा तन मन। मैं भोर सूर्य का थी प्रकाश उज्ज्वल ... Read more

मासूम कली

मेरा बचपन मेरा क्रंदन मासूम कली का ये उपवन भीगा भीगा मां का आँचल भीगा भीग मेरा तन मन। मैं भोर सूर्य का थी प्रकाश उज्ज्वल ... Read more

बेटी की शादी

पूर्णमासी हो गई कन्यादान हो गई तात रोया उम्रभर बेटी विदा हो गई। थे अचरज में सब क्या कमाल हुआ कहाँ से हुई कृपा क्या धमाल हुआ। ... Read more

बेटी की शादी

पूर्णमासी हो गई कन्यादान हो गई तात रोया उम्रभर बेटी विदा हो गई। थे अचरज में सब क्या कमाल हुआ कहाँ से हुई कृपा क्या धमाल हुआ। ... Read more

दर्पण

झूठ बोलता है दर्पण हम जो दिखते हैं वो हैं कहाँ दर्पण दर्प से चूर और तुम गर्व से कभी फुर्सत में देखना दर्पण तुमको तुम्हारे ... Read more

शह और मात

मैं करता हूं अक्सर बातें, आंधी और तूफान की, अपनी कलम नीचे रखकर सोचता हूं ईमान की। तर्क, वितर्क, कुतर्क से मैंने सदा किए ही समझौते ... Read more

मर्यादा

कहते हो मुझसे मैं मर्यादा में रहूं सच, कहा आपने मर्यादा का मर्म बताया मेरा धर्म मैं मर्यादा में रहूं कैसे जो सीखता हूं कहता हू... Read more

बताओ न

बताओ न तुम उजले हम उजले कौन है काला, बताओ न तुम वाकिफ हम वाकिफ क्या है राज, बताओ न तुम सत्य हम सत्य कौन है झूठा, बताओ न ... Read more

क्या सुनाएं

उठती-गिरती लहरों पर आओ कोई गीत लिखें तुम अपनी व्यथा कहो हम अपनी कथा कहें.. क्या सुनाएं तुमको गाथा क्या बताएं अभिलाषा रिक्त-... Read more

स्वर कहां से लाऊं

स्वर कहां से लाऊं.... आगत स्वर, आहत स्वर तुम प्राण प्रिये, मैं नश्वर शांति मन की यही वेदना संताप स्वरों की संवेदना। स्वर-... Read more

दर्द

उपहारों की भीड़ में अब गोपियों जैसी प्यास कहां वो प्यार की राग-तपस्या विरह-मिलन के संत कहां।। पूछ रहा उद्धव माधव से कहां पुक... Read more

पग-पग

एक प्रयास.. हम तो शीशे से बिखर जाएंगे तुम न आए तो सिहर जाएंगे फूल और शूल का रिश्ता यही हर हाल में हम निखर जाएंगे।। उदास रा... Read more

क्या सुनाएं

क्या सुनाएं उठती-गिरती लहरों पर आओ कोई गीत लिखें तुम अपनी व्यथा कहो हम अपनी कथा कहें.. क्या सुनाएं तुमको गाथा क्या बताएं ... Read more

बताओ न

बताओ न तुम उजले हम उजले कौन है काला, बताओ न तुम वाकिफ हम वाकिफ क्या है राज, बताओ न तुम सत्य हम सत्य कौन है झूठा, बताओ न ... Read more