गुलाबी नगर में जन्मी मैं (सुनीता), मैने कभी नहीं सोचा था कि मैं लेखन की दुनिया में कदम रखूँगी, शिक्षा पूरी होने के बाद कब और कैसे मैने कलम को थामा, स्वंय नहीं जानती । 12 सालों से बैंकाक के इंटरनेशनल पायोनियर स्कूल में हिंदी पढ़ा रही हूँ । तभी मुझे लगा लगा कि कविताओं से मैं अपनी भावनाओं को आप तक पहुँचा सकती हूँ। समझा सकूँ जीवन की अहमियत को, खत्म कर पाऊँ आपसी मतभेद, बस यही चाह है मेरी ॥

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घोर कलयुग

क्या यही है शुरुआत घोर कलयुग की? हैवानियत की हदें हो रही पार, कैसे है हम जिन्दा मानवता की हत्या के युग में ? लांघ चुका है मनुष्य... Read more

गणपति बाप्पा……

गणपति बाप्पा मोरया, मंगल मूर्ति मोरया, देवों में देव हमारे, दुःख संताप मिटाते हमारे, तुम हो हमारे हरिद्र गणाध्यक्ष ।। पार्वती क... Read more

उफ!! ये परीक्षाएँ

निकली जब स्कूल के लिये, गाड़ियों का शोर, समुद्री लहरें- हवा की भीनी-भीनी खुशबू, सभी मन ही मन मुस्कुरा रहे थे, बोल उठे……..उफ!! ये ... Read more

माँ, तुम्हीं तो हो

माँ, तुम्हीं तो हो.... माँ, तुम्हीं तो हो नींव परिवार की, तुम्हारें बिना अधूरी है,जिंदगी सभी की । माँ, साधारण- सा वाक्य भी अधूरा ... Read more

नन्ही परी!!!

नन्ही परी!!! ‘माँ मुझे बचा लो,माँ!! पर किसी ने न सुनी उसकी, फिर से एक भ्रूण हत्या, क्या दोष था उस नन्ही परी का, उसने तो कदम भी ना... Read more

नन्ही परी!!!

नन्ही परी!!! ‘माँ मुझे बचा लो,माँ!! पर किसी ने न सुनी उसकी, फिर से एक भ्रूण हत्या, क्या दोष था उस नन्ही परी का, उसने तो कदम भी ना... Read more