sunil nagar

Joined March 2017

सुनील नागर खुजनेर
राजगढ़ ( म. प्र.)
एम. ए . – हिन्दी
कार्य – अध्यापक हिन्दी , संस्कृत

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जिंदगी

जिंदगी की गति में और रेस न हो जाए , जरा आहिस्ते चल कोई केस न हो जाए ये जिंदगी मुश्किल से मिलती है यारो, हद से ज्यादा अय्याशी य... Read more

पुस्तकें ज्ञान का भंडार

खोलो ह्रदय के द्वार, पुस्तकें ज्ञान का भंडार । खाली दिमाग शैतान का घर व्यस्त रहो नित पुस्तक संग, अंतर्मन में ज्योत जलेगी ... Read more

भ्राता - प्रेम

भ्रात - प्रेम भाई भला सोचेगा तेरा , तेरी माँ का जाया है । वैरी कभी मत होना भैया, अंत बुरा ही आया है । राम - लक्ष्मण हुए... Read more

ये बेटियाँ

कविता - ये बेटियाँ पावन मूरत, सुहानी सूरत , तेजोमय आभा है , प्रकाश - पुंज सी उज्ज्वलता , माँ गंगा की धारा है , माँ की ममता है... Read more

कविता - माँ

माँ माँ दृष्टि है , माँ सृष्टि है , माँ जीवन , आनंद वृष्टि है । माँ निष्ठा है , माँ प्रतिष्ठा है , माँ सृष्टा है , माँ... Read more