Sunder Singh

Joined November 2016

I am a voice of justice. I do not want to write just for the sake of laurels of praises and awards or name and fame. I just want to spread humanity in the world. That’s it.

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ये शादी के बंधन

वो शादी के बंधन हैं झूठे सभी जहाँ मन से मन की लगन ही न हो वो अग्नि वो फेरे भी किस काम के जहाँ प्रेम की कुछ अगन ही न हो... Read more

धार्मिक कौन

धार्मिक कौन (लघु कथा) नवरात्रों की शुरुआत हो चुकी थी। घर घर में व्रत उपवास भजन कीर्तन पूजा पाठ आदि से मोहल्ले का लगभग हरेक घर पर... Read more

नारी जीवन सतत एक संग्राम है

नारी जीवन सतत एक संग्राम है हर किसी का ही जग में ये अंजाम है नारी जीवन सतत एक संग्राम है उसको लेकर जनम से ही मर... Read more

तू भी थोड़ा बदल जरा

तू भी थोड़ा बदल जरा ****************** सदियों से ये नदी निरन्तर बस बहती ही जाती है कदम कदम कठिनाइयों को हरदम सहती जाती है ची... Read more

थोड़ा तो विश्वास करो

बेटी को बस कम ही कम अब आंकना तुम छोड़ दो हम से भी है शान देश की अब तो आखिर मान भी लो झुका हुआ था शीश तुम्हारा हमने ... Read more

क्यों रोता है चिल्लाता है

क्यों रोता है चिल्लाता है ******************** ये जीवन भी क्या बंजारा कुछ दिनो को ही रुक पाता है फिर छोड़ सभी कुछ यहीं कहीं नई... Read more

जय बजरंग बली

हास्य रस में प्रस्तुत एक संदेश जय बजरंग बली एक बार की बात बताऊँ सुन लो ,मेरे भाई गर्मी की छुट्टी के दिन थे और थी बंद प... Read more

एक बार झाँक कर देख कभी

एक बार झाँक कर देख कभी ^^^^^^^^^^^^^^^^ कुछ सही गलत का पता नहीं खुद को ही माना सदा सही हे मनुज तू मन के दर्पण में एक ... Read more

क्यों इतना घबराता है

क्यों इतना घबराता है '''""""""""""”""""" प्रातःकाल की किरणों से सब अन्धेरा छँट जाता है रात की सारी कालिमा का दंभ सभी मिट जा... Read more

देखो रवानी मिल गई

ठहरे से इस जीवन को , देखो रवानी मिल गई जैसे सूखे पेड़ को फिर से जवानी मिल गई अब तलक ये ज़िन्दगी , बस अंधेरों मे... Read more

संसार है ये परिवार

संसार है एक परिवार अपना तो ये सारा ही संसार है एक परिवार क्या हिन्दू और क्या मुस्लिम हमें है सबसे प्यार आओ मिलकर सभी सजाएँ ... Read more

स्वागत आगत वर्ष तुम्हारा

नोटबंदी ने , बहुत है मारा मुश्किल है ,अब और गुजारा कुछ तो राहत लेकर आओ स्वागत आगत वर्ष तुम्हारा जीवन कितना ... Read more

खुद ही खुद से मिलता चल

खुद ही खुद से मिलता चल माना है दूर बहुत मंजिल और कदम-कदम पर अँधियारा माना कि आज खड़ा है बनकर दुश्मन तेरा जग सारा विश्वा... Read more

एक सामूहिक हत्या थी

भोपाल गैस त्रासदी पर कुछ बह निकले व्यथा के शब्द इक सामूहिक हत्या थी किसको था मालूम कि उस दिन रात वो ऐसी आएगी एक रात की निद... Read more

ये मात्र लेखनी नहीं

ये मात्र लेखनी नहीं एक तुला है न्याय की ये मात्र लेखनी नहीं अपने और पराये को कभी भी देखती नहीं युगों युगों से बनती आई सत्य... Read more

सादगी में आनन्द

सादगी में आनंद सादगी का आनंद जो भी जान गया एक बार फिर नामो-शोहरत की सारी , दौड़ हैं ये बेकार वैर भाव और अहंकार फिर बचे न कोई ... Read more

नोटबंदी कर दी जाती है

नोटबंदी जैसे बच्चे को , थाली में माँ चन्दा दिखलाती है बोल के उसको चन्दा मामा उसका मन ... Read more