sumit jain

Joined January 2017

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बीता जाता है ये जीवन

छाया है तिमिर चारो और उदासीनता है जीवन में कही ग़म है तो कही खुशियाँ है कभी है धूप तो कभी है छाँव बीता जाता है ये जीवन जब... Read more

स्वप्न और मन

रात की चादर ओढ़ स्वप्न करते है चहल-पहल रंग बिरंगी बग्घी में बैठ गुफ़्तगू करते है हवाओ से दी है दस्तक रंगीन लोक में ये बिखरते ... Read more

मौत का दामन थामा

खुशियों के माहौल में जन्मा हर कोई मुझे खिलाया सबकी चाहत बन जाता कभी रोता तो कभी हस्ता फिर उसी में रम जाता माँ कि लोरिया सुनते ... Read more