Dr.Priya Sufi

Hoshiarpur

Joined July 2016

हम फकीरों का बस इतना सा फ़साना है,
न अम्बर मिला न ज़मीं पे आशियाना है।

Books:
आराधन, तितिक्षा, गुलनार, गुलज़ार, मधुबन, काव्याक्षर

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नन्हीं गुड़िया

मैं नन्ही सी प्यारी गुडिया मम्मी की दुलारी गुडिया चंदा है मामा मेरे पापा के मन न भाई गुडिया मुझे उठाया पास बिठाया साथ ले जा ... Read more

नाम है शिक्षक हमारा (गीत)

ज्ञान दे कर कल सँवारे, अनुभवों की खान है। नाम है शिक्षक हमारा, राह की पहचान है। हल चलाया ज्ञान का जब, साज सुख अपने तजे, हम से ही ... Read more

गज़ल

मेरे रहबर, मेरे मेहरम, सनम मुझ पर अहसान करो, मैं तूफानों का पाला हूँ, न मंजिल तुम आसान करो। जमीं हूँ मैं मुहब्बत की, न जलती हूँ न ... Read more

सागर उदास है

उस सागर की क्या बात सुनाऊँ वो आजकल उदास रहता है। किनारों से दूर है सीपियों के पास रहता है वक्त के घोंघें चुन... Read more

मिर्जा साहिबा

मोहब्बत की दुनिया में साहिबा का नाम विश्वास और धोखे के ताने बाने में उलझा सा प्रतीत हो... तब भी मिर्जा साहिबा का इश्क कहीं भी उन लोग... Read more

नदी अभी जागी है...!

सुनो नदी अभी जागी है अभी तो सिराये हैं मैंने कुछ पूजा के फूल और कुछ यादें पिछली रातों की कुछ कलियाँ अपनी बातों सी कोई कश्ती प... Read more

सोचती हूँ.....

सोचती हूँ किसी दिन पी लूं तुम्हारे होठों की मय एक ही सांस में और कूद जाऊं तुम्हारी आँखों की पनीली झील में तुम पुकारो म... Read more

फोक्ट का तमाशा

यह रविवार था। वीणा के लिए सुखद सुहानी भोर का आनन्द लेने का दिन। घर में सब सो रहे थे। वीणा ने एक गहरी साँस ली और चाय बना कर इत्मीनान ... Read more

सवाल तुमसे.....

कभी देखा है अग्निमुख नग के साये में बसे घरों की लुटी पिटी तहस नहस दुनिया... टुकड़ों में कटी दरारों में फटी खुले ज़ख्... Read more