आनन्द खत्री (सूफी बेनाम ) (निवासी : नोएडा )
जन्म : २२ फरवरी १९७१ , कानपूर।
पेशे से वस्तुविद्य हैं और भारोत्तोलन (power lifting nationals silver 2013 ) का शौक भी रखते हैं, पर कविता लिखने की रूचि बचपन से है।

Copy link to share

सादी है नून रोटी सांचे हैं मिटटी के

ग़ज़लों में सांस लेते अरमान ज़िन्दगी के सादी है नून रोटी सांचे हैं मिटटी के मिट्टी के फर्श पर है उम्मीद की दीवारें ज़ख़्मी ये बदल... Read more

यादों की छाल

रात अपने ख्यालों के जंगल में जाना कभी तो रास्ते किनारे झील पे झुके पेड़ से एक शरारत तोड़ लाना। फ़र्द में अधूरी मिसरों क... Read more

हमें भी बता दो जहाँ जा रहे हो

कभी तो कहो की कहाँ जा रहे हो हमें भी बता दो जहाँ जा रहे हो वफ़ा और मंज़िल इशारा बनी हैं न जाने सफर ले कहाँ जा रहे हो ज़रा आ... Read more

सागर

सूक्ष्म की सतह धरे लहर का विकार है अंतः अलंकार पर रतनों का अम्बार है नौ पर मुझसे मिलना सतही मुलाक़ात है अनगिनित जन्तुओं... Read more