Sudhir kewaliya

Joined January 2019

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वजूद

वजूद ---------- करता है इंसान ताउम्र गुरुर शोहरत पर अपनी वक़्त औ हालात हमेशा मुस्तक़िल भी नहीं रहते मुगालते में रहता है त... Read more

मायने

मायने --------- कमरे की खुली खिड़की से घुसपैठ करता रहता है उजाला करने को दूर अंदर का अंधेरा बेबस है नहीं कर सकता दूर मेरे अंदर ... Read more

मंज़र

मंज़र --------------- ज़िंदगी में मंज़र बदलते हर दौर को हमने देखा है इम्तेहाने ज़िंदगी में अपनों को पराया ... Read more

मुहब्बत

मुहब्बत ----------- निशाँ है हमारी मुहब्बत के हिज़्र के बाद भी वहाँ ज़िंदगी में एक बार वह मक़ाम मुड़कर तो देखो नहीं छोड़... Read more

तन्हा

तन्हा --------- शोर मचाती हुई तेज रफ़्तार से आकर टकराती हैं साहिल से समन्दर की मौजें बिखरकर लौट जाती हैं खामोशी से..... अब अपन... Read more

अमानत

अमानत ------------ महफूज़ है मेरी बंद हथेलियों में तुम्हारी आंख से ढुलके अनमोल अश्क जो अमानत हैं तुम्हारी संभालकर रखे थे तुमन... Read more

इन्तहा

इन्तहा ----------- बहुत कुछ दरक गया है मेरे अन्दर देखकर,सुनकर पल भर में बेजान होते इंसानी जिस्म वातावरण में फैलती बारुदी गंध ... Read more

खुदगर्ज़

खुदगर्ज़ ---------------- आईने में अक्स बढ़ती उम्र का हिसाब मांग रहा है ... Read more

खुदगर्ज़

खुदगर्ज़ ---------------- आईने में अक्स बढ़ती उम्र का हिसाब मांग रहा है ... Read more