Sudhir kewaliya

Joined January 2019

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दस्तूर

बिगड़े हालात वजह न थे जिनके यहां आने की कभी आज धूल के गुबार उड़ाता उनका काफिला आ रहा है अफरातफरी मची है हर ओर हमदर्द बनने की पहल ... Read more

प्रतीक

रावण , मेघनाद और कुम्भकर्ण पुतले के दहन से असत्य पर सत्य की जीत मानकर सभी आनन्दित हैं ........ बेखबर हैं सभी अपने ही... Read more

बादल

बादल --------- पनप रहे हैं कैक्टस बंजर हो रही धरा पर काले और सफेद बादल साथ में बरसने लगते हैं देखकर पनपते हुए कैक्टस वहां...... Read more

सौदा

सौदा -------- बिकता होगा कोई इंसान किसी कीमत पर यहां नादां हैं मुझसे इंसानियत का सौदा करने आए हैं कर ही न सके जो सौदा मेरे ... Read more

तस्वीरें

तस्वीरें ----------- एल्बम में ये तस्वीरें सिर्फ तस्वीरें ही नहीं हैं ये हैं गुजरा वक़्त और उसके यादगार लम्हे गुजरा वक़्त ... Read more

फ़ज़ा

फ़ज़ा --------- बदल रही है फ़ज़ा घाटी की बादलों की ओट से निकल कर मुस्कुराता हुआ सूरज बिखेर रहा है लालिमा चारों ओर चमन फिर से गुल... Read more

रिश्ता

रिश्ता --------- गायब हो गई है गहराई अब इंसानी रिश्तों में कल लगाया रंग भी आज फीका पड़ गया है बेखौफ़ चलता रहा कांटों भरी रा... Read more

सौदा

सौदा -------- बिकता होगा कोई इंसान किसी कीमत पर यहां नादां हैं मुझसे इंसानियत का सौदा करने आए हैं कर ही न सके जो सौदा मेरे ... Read more

आँचल

जमकर बरसा आवारा बादल नहीं भिगो पाया आँचल मेरा हां,आंसुओं से भीगा आँचल मेरा संभालकर रखे हैं कुछ आंसू बिखरने से बचाकर इन आंसुओं म... Read more

आँचल

आँचल ----------- आवारा ही तो है बादल जमकर बरसा फिर भी नहीं भीगो पाया आँचल मेरा हां, आँचल मेरा आंसुओं से भीगा संभालकर रखे ह... Read more

पहेली

पहेली --------- प्रकाश और अंधकार समय के अंतराल पर एक दूसरे को अपने आँचल में समेटते.......... कभी धूप और कभी छाँव पल-पल इम्त... Read more

सफ़र

सफ़र ----------- खुशी और गम के छोर उनके बीच वक़्त के नाजुक धागे से बंधी कुदरत का नायाब तोहफ़ा खूबसूरत ज़िंदगी......... वक़... Read more

नसीब

नसीब ------------- जब भी देखता हूँ आईना वक़्त से पहले बालों से गुजरती सफ़ेदी और आईना पूछने लगते हैं मुझसे मेरा गुनाह और... Read more

स्थायी

स्थायी ----------- नहीं मानता कि कुछ भी स्थायी नहीं है दुनिया में मेरे कुछ अपनों की दुनिया में देखता आ रहा हूं बरसों से सब... Read more

मजदूर दिवस

मजदूर दिवस ------------------ चिलचिलाती धूप या मूसलाधार बारिश या शरीर कंपकपाती ठंड सबसे बेपरवाह सुनाई देती है आवाज चौतरफा कह... Read more

ताल्लुकात

ताल्लुकात --------------- नहीं करना चाहता है वह सामाजिक रिश्तों में देकर वक़्त जाया अपना देकर तवज्जो सामाजिक रिश्तों पर फुरसत... Read more

वजूद

वजूद ---------- करता है इंसान ताउम्र गुरुर शोहरत पर अपनी वक़्त औ हालात हमेशा मुस्तक़िल भी नहीं रहते मुगालते में रहता है त... Read more

मायने

मायने --------- कमरे की खुली खिड़की से घुसपैठ करता रहता है उजाला करने को दूर अंदर का अंधेरा बेबस है नहीं कर सकता दूर मेरे अंदर ... Read more

मंज़र

मंज़र --------------- ज़िंदगी में मंज़र बदलते हर दौर को हमने देखा है इम्तेहाने ज़िंदगी में अपनों को पराया ... Read more

मुहब्बत

मुहब्बत ----------- निशाँ है हमारी मुहब्बत के हिज़्र के बाद भी वहाँ ज़िंदगी में एक बार वह मक़ाम मुड़कर तो देखो नहीं छोड़... Read more

तन्हा

तन्हा --------- शोर मचाती हुई तेज रफ़्तार से आकर टकराती हैं साहिल से समन्दर की मौजें बिखरकर लौट जाती हैं खामोशी से..... अब अपन... Read more

अमानत

अमानत ------------ महफूज़ है मेरी बंद हथेलियों में तुम्हारी आंख से ढुलके अनमोल अश्क जो अमानत हैं तुम्हारी संभालकर रखे थे तुमन... Read more

इन्तहा

इन्तहा ----------- बहुत कुछ दरक गया है मेरे अन्दर देखकर,सुनकर पल भर में बेजान होते इंसानी जिस्म वातावरण में फैलती बारुदी गंध ... Read more

खुदगर्ज़

खुदगर्ज़ ---------------- आईने में अक्स बढ़ती उम्र का हिसाब मांग रहा है ... Read more

खुदगर्ज़

खुदगर्ज़ ---------------- आईने में अक्स बढ़ती उम्र का हिसाब मांग रहा है ... Read more