sudha Singh

Joined June 2016

सुधा सिंह
रिहन्द नगर, सोनभद्र

संघर्षरत जीवन में कटू यथार्थ झेलते हुए मन जब कल्पनाओं में विचरने लगता है तब उसे कागज पर उतार लेती हूं!

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ख्वाब

पढ़ रही थी एक किताब , खोई थी मैं उसी जहाँ में ! कोई समझ न पाया, क्या बुन रही थी मैं ख्वाब में! सामने थे टूटे ख्वाबों के ढेर , ... Read more

गर्मी

सूर्य दहकता आग सा है, धरती जलती तवे सी! इस गरमी के आगे, फेल हुए कुलर -ए.सी! दिन के तपन के बाद जब संध्या बेला आई! ठंडक तन में लि... Read more

जल

धरा निर्जल सूखा गंगा जल प्यासा मन दुःख भरा कल!! Read more

स्त्री

स्त्री है ये थक नहीं सकती है ये रुक नहीं सकती है ये आये जो कोई बाँधा तो झुक नहीं सकती है ये स्त्री है ये!! जो हमेशा ताप दे एक... Read more