Sudha Singh

Koperkhairane, Navi Mumbai-709

Joined November 2017

संप्रति – हाई स्कूल शिक्षिका
वाशी, नवी मुंबई

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क्योंकि मृत हूँ मैं

हमेशा से ऐसा ही तो था हाँ.. हमेशा से ऐसा ही था जैसा आज हूँ मैं न कभी बदला था मैं और ना ही कभी बदलूंगा क्योंकि.. म... Read more

कुछ द्वीपदियाँ

कुछ द्वीपदियाँ 1 : फितरत छीन लूँ हक किसी का, ऐसी फितरत नहीं. आईना जब भी देखा, खुशी ही हुई.** 2: नियति नियत तो अच... Read more

एक और वनवास

ढूँढ रही थी अपने पिता की छवि उस घर के सबसे बड़े पुरुष में एक स्त्री को माँ भी समझ लिया था प्रेम की गंगा बह रही थी हृदय से मेरे ... Read more

माँ

अदृश्य- सी वह शक्ति, जो सदैव मेरे साथ है! पता है मुझे माँ, कि वह तेरा ही आशीर्वाद है! तेरा प्यार,तेरी ममता, तेरा स्नेह म... Read more