Sudershan Khanna

Delhi

Joined June 2019

वर्ष 1956 के जून माह में इन्दौर (मध्य प्रदेश) में मेरा जन्म हुआ । पाकिस्तान से विस्थापित मेरे स्वर्गवासी पिता श्री कृष्ण कुमार जी खन्ना सरकारी सेवा में कार्यरत थे । मेरी माँ श्रीमती राज रानी खन्ना आज लगभग 80 वर्ष की हैं । मेरे जन्म के बाद पिताजी ने सेवा निवृत्ति लेकर अपने अनुभव पर आधरित निर्णय लेकर ‘मुद्र कला मन्दिर’ संस्थान की स्थापना की जहाँ विद्यार्थियों को हिन्दी-अंग्रेज़ी में टंकण व शाॅर्टहॅण्ड की कला सिखाई जाने लगी । 1962 में दिल्ली स्थानांतरित होने पर मैंने दिल्ली विश्वविद्यालय से वाणिज्य स्नातक की उपाधि प्राप्त की तथा पिताजी के साथ कार्य में जुड़ गया । कार्य की प्रकृति के कारण अनगिनत विद्वतजनों के सान्निध्य में बहुत कुछ सीखने को मिला । पिताजी ने कार्य में पारंगत होने के लिए कड़ाई से सिखाया जिसके लिए मैं आज भी नत-मस्तक हूँ । विद्वानों की पिताजी के साथ चर्चा होने से वैसी ही विचारधरा बनी । आशा करता हूँ मेरे सीमित शैक्षिक ज्ञान से अभिप्रेरित रचनाएँ सम्माननीय लेखकों व पाठकों को पसन्द आयेंगी ।

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पंक्चर

पंक्चर --------------- ‘आओ काका, आओ, लगता है फिर तुम्हारी रिक्शा के पहिए में पंक्चर हो गया है’ पटरी पर बैठे साइकिलों की मरम्मत करने ... Read more

मैला रिश्ता

मैला रिश्ता --------------- ‘अब आपकी फाईल नहीं मिल रही तो मैं क्या करूँ ? इतना पुराना रिकाॅर्ड है । बेसमेंट में स्टोर रूम की अलम... Read more

मसाले वाली संस्कृति

मसाले वाली संस्कृति ---------- ‘शेखू, तेरे आम के बागीचे तो बहुत सुन्दर हैं’ बनवारी ने कहा। ‘अरे बनवारी, अभी तो तूने देखा ही क्या है... Read more

ऐ बादल झूम के चल

ऐ बादल झूम के चल ------ ‘सुन रहा है भाई पृथ्वीलोक वासी क्या कह रहे हैं?’ बादल का नन्हा टुकड़ा अपने बड़े भाई से बोला। ‘क्या कह रह... Read more

भुट्टेवाला

भुट्टेवाला ---------- ‘भइया, क्या तुम्हारे पास नरम नरम और कच्चे भुट्टे हैं, छोटे बच्चों के लिए ले जाने हैं?’ सुरेखा ने बाज़ार में रेह... Read more

लफ़्ज़ों से भरी पर खामोश

सूर्य ढलने को था। बूढ़ी अम्मा बागीचे में बरगद के नीचे बैंच पर बैठी थी। ऐसा प्रतीत होता था किसी की प्रतीक्षा कर रही हो। ‘अम्मा किसी ... Read more

गुल्लक

गुल्लक ----- ‘कमला, तुम मिट्टी के बर्तन बहुत मेहनत से और बहुत सुन्दर बनाती हो’ मास्टर जी ने स्कूल के चहारदीवारी के बाहर साइकिल-स्ट... Read more

ज़िन्दगी न मिलेगी दोबारा ---

ज़िन्दगी न मिलेगी दोबारा --- चलो आज कुछ नया किया जाये हृदय में हरेक के वृक्ष उगाया जाये बाहरी वृक्षों की सांसें हुई दूषित है... Read more

आज का प्यासा कौआ

आज का प्यासा कौआ --- ‘मां, बहुत गर्मी है, प्यास लग रही है, कहीं पानी नहीं मिल रहा, कोसों दूर तक उड़ कर आया हूं’ कौआ अपनी मां से बोला।... Read more

स्टडी इन इंडिया

स्टडी इन इंडिया - राहुल, तेरा क्या प्लान है अब’ रुचित ने पूछा। दोनों मित्रों ने बारहवीं की परीक्षा अच्छे नंबरों से पास की थी। ‘रुचि... Read more

असूलों वाले लाला छुन्नूमल

असूलों वाले लाला छुन्नूमल - शाम की शुरुआत हुई थी। लाला छुन्नूमल हलवाई की दुकान पर ग्राहकों की भीड़ हो रही थी। एक कारीगर बड़ी सी ए... Read more

नई उम्र की नई फसल

नई उम्र की नई फसल ‘रोहन, तुम्हें प्रधानाचार्य जी बुला रहे हैं’ चपरासी ने आकर कहा। रोहन अभी दसवीं क्लास में पढ़ रहा था। रोहन मुस्कु... Read more

गुब्बारा

गुब्बारा ‘देखो भाई, इस हाल की हर दीवार को और छत को गुब्बारों से सजाना है । आज मेरी बिटिया का जन्म दिन है । गुब्बारे हरेक रंग ... Read more

दूर का चश्मा

दूर का चश्मा ‘सर, मैंने आपकी आंखों की जांच कर ली है, नम्बर में मामूली परिवर्तन हुआ है, पर लैंस बदलने होंगे। आइए, मैं आपको एक से... Read more

रिटर्न गिफ्ट

रिटर्न गिफ्ट ‘बाबू, सुबह से भूखे हैं, कुछ नहीं खाया ।’ कहते हुए हाथ फैला दिये । पति-पत्नी दोनों ही फटेहाल हालत में लोगों स... Read more

रक्तदान

रक्तदान ‘तू चलेगी, तो आ जा, आज देख ही आते हैं कि रक्तदान कैसे किया जाता है ।’ पिंकी अपनी सहपाठिनी से कह रही थी । ‘हम भी चलेंगे’... Read more

कलम

कलम ‘भइया, ये कलम का पैकेट ले लो सिर्फ 20 रुपये का है’ आठ दस बरस की एक बालिका नये पैनों के कुछ पैकेट लिये घूम-घूम कर पैन बेचने ... Read more

बर्थडे सेलीब्रेशन

‘टाफियों के पैकेटों को छोड़ कृपा कर इन सभी उपहारों को वापिस ले जायें’ अध्यापिका ने अत्यन्त विनम्रता से उस धनाढ्य पिता से कहा था जो अप... Read more

सैकंड हैंड

सैकंड हैंड ‘भैया यह किताब कितने की है ?’ पूछ रहा था ग्राहकों से भरी दुकान के काऊंटर पर एक बालक । बड़े-बड़े लोगों की भीड़ में उसकी ... Read more

माॅनसून

माॅनसून मान-सून भई माॅनसून अब तो ले हमरी भी सुन, हमरी भी सुन यू कम ऑनली साल में वन्स, तुनक तुन तुन, तुनक तुन तुन करते तुम बादल ... Read more

आकाश और धरा

आकाश और धरा ‘आकाश बेटे, मुझे तुमसे यह उम्मीद न थी, तुम तो समझदार हो, पढ़े-लिखे हो, इतनी बड़ी कम्पनी में काम कर रहे हो, और तुमने यह ... Read more

स्टैंडर्ड

स्टैंडर्ड ‘नितिन, तुम पार्किंग में से गाड़ी लेकर बस स्टैंड के पास आओ, मैं वहीं पहुंचती हूं’ राधिका ने कहा। ‘ठीक है’ कह कर नितिन गा... Read more

खरपतवार

खरपतवार ‘मम्मी, देखो तो वह लड़की उस छोटे से रिंग में कैसे पूरी निकल गई’ लाल बत्ती पर रुकी कार में बैठी वृतिका अचानक चिल्लाई। उसके... Read more

तनेजा साहब का संकल्प

तनेजा साहब का संकल्प ‘मि. तनेजा, आप जानते हैं कि स्कूल का नया सैशन शुरू होने जा रहा है, विद्यार्थी अगली क्लासेज़ में जायेंगे। ... Read more